शिक्षक भर्ती: एसटीएफ़ के शिकंजे में एक दर्जन से अधिक अभ्यर्थी, पूछताछ जारी

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लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े़ की जांच कर रही एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को कई जगहों पर ताबड़़तोड़़ छापे मार एक दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इनमें से ज्यादातर अभ्यर्थियों के नंबर 130 से ज्यादा आए थे जिसकी वजह से वह जांच एजेंसी के रड़ार पर हैं। खासतौर पर पूर्वाञ्चल में वाराणसी‚ जौनपुर‚ आजमगढ़ समेत कई जिलों में एसटीएफ गहन छानबीन कर रही है। वहीं प्रयागराज पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गये शिक्षक भर्ती के टॉपर और उससे जुड़े लोगों से भी एसटीएफ की पूछताछ जारी है। जांच के दायरे में वह कंपनी भी आ चुकी है‚ जिसे ओएमआर शीट की स्कैनिंग का काम सौंपा गया था।

More Than A Dozen Candidates In The Clutches Of Stf Inquiry Continues :

खास बात यह है कि एसटीएफ इस मामले में नकलचियों के गिरोहों के अलावा उन ठगों पर भी पैनी नजर रखे है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण कराने का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगते हैं। अभ्यर्थियों से पूछताछ में सामने आया है कि मेरिट में शामिल करने के लिए 26 मई को कुछ लोगों को मोटी रकम दी गयी थी। इसके पांच दिन बाद मेरिट घोषित कर दी गयी। फिलहाल एसटीएफ इस प्रकरण में भर्ती परीक्षा से संबंधित अफसरों‚ पेपर छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस व ओएमआर शीट की स्कैनिंग करने वाली दिल्ली की कंपनी की भूमिका की पड़़ताल में जुटी है। इसके अलावा जिन दागी केंद्रों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था‚ वे सब एसटीएफ के राड़ार पर हैं।

प्रयागराज पुलिस द्वारा इस बाबत दर्ज मुकदमे में तलाश किए जा रहे केएन पटेल के बारे में भी एसटीएफ ने सुरागसी शुरू कर दी है। पटेल पहले भी कई बार भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़़ा कर चुका है। ॥ लखनऊ में जनवरी में पकड़़ा गया था रैकेटःशिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान राजधानी में इसका एक रैकेट पकड़़ा गया था। विगत 6 जनवरी 2019 को एसटीएफ ने नेशनल इंटर कॉलेज के प्राचार्य उमाशंकर सिंह‚ थाना गोसाईगंज के सिपाही अरुण कुमार सिंह सहित 11 लोगों को पकड़़ा था जिनमें दो अभ्यर्थी भी थे।

एसटीएफ को इनके पास से सेट–ए की उत्तर कुंजी तथा प्रश्नपत्र बरामद हुए थे। उनके मोबाइल की जांच से परीक्षा के पहले उत्तर कुंजी लीक होने की आशंका भी जताई गयी थी। गिरफ्तार सिपाही ने यह स्वीकारा था कि भूगर्भ जल संस्थान मेरठ में कार्यरत उसके भाई अजय सिंह ने पेपर लीक कराया था‚ जिसमें कानपुर नगर निगम में राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार वर्मा भी शामिल था। अब एसटीएफ इस मामले में भी दोबारा पड़़ताल कर रही है। वहीं एक आईपीएस अधिकारी ने प्रयागराज में इस मामले की एफआईआर दर्ज किए जाने को अदालत में अर्जी भी दी है।

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े़ की जांच कर रही एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को कई जगहों पर ताबड़़तोड़़ छापे मार एक दर्जन से ज्यादा अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इनमें से ज्यादातर अभ्यर्थियों के नंबर 130 से ज्यादा आए थे जिसकी वजह से वह जांच एजेंसी के रड़ार पर हैं। खासतौर पर पूर्वाञ्चल में वाराणसी‚ जौनपुर‚ आजमगढ़ समेत कई जिलों में एसटीएफ गहन छानबीन कर रही है। वहीं प्रयागराज पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गये शिक्षक भर्ती के टॉपर और उससे जुड़े लोगों से भी एसटीएफ की पूछताछ जारी है। जांच के दायरे में वह कंपनी भी आ चुकी है‚ जिसे ओएमआर शीट की स्कैनिंग का काम सौंपा गया था। खास बात यह है कि एसटीएफ इस मामले में नकलचियों के गिरोहों के अलावा उन ठगों पर भी पैनी नजर रखे है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण कराने का झांसा देकर बेरोजगारों को ठगते हैं। अभ्यर्थियों से पूछताछ में सामने आया है कि मेरिट में शामिल करने के लिए 26 मई को कुछ लोगों को मोटी रकम दी गयी थी। इसके पांच दिन बाद मेरिट घोषित कर दी गयी। फिलहाल एसटीएफ इस प्रकरण में भर्ती परीक्षा से संबंधित अफसरों‚ पेपर छापने वाली प्रिंटिंग प्रेस व ओएमआर शीट की स्कैनिंग करने वाली दिल्ली की कंपनी की भूमिका की पड़़ताल में जुटी है। इसके अलावा जिन दागी केंद्रों को परीक्षा केंद्र बनाया गया था‚ वे सब एसटीएफ के राड़ार पर हैं। प्रयागराज पुलिस द्वारा इस बाबत दर्ज मुकदमे में तलाश किए जा रहे केएन पटेल के बारे में भी एसटीएफ ने सुरागसी शुरू कर दी है। पटेल पहले भी कई बार भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़़ा कर चुका है। ॥ लखनऊ में जनवरी में पकड़़ा गया था रैकेटःशिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान राजधानी में इसका एक रैकेट पकड़़ा गया था। विगत 6 जनवरी 2019 को एसटीएफ ने नेशनल इंटर कॉलेज के प्राचार्य उमाशंकर सिंह‚ थाना गोसाईगंज के सिपाही अरुण कुमार सिंह सहित 11 लोगों को पकड़़ा था जिनमें दो अभ्यर्थी भी थे। एसटीएफ को इनके पास से सेट–ए की उत्तर कुंजी तथा प्रश्नपत्र बरामद हुए थे। उनके मोबाइल की जांच से परीक्षा के पहले उत्तर कुंजी लीक होने की आशंका भी जताई गयी थी। गिरफ्तार सिपाही ने यह स्वीकारा था कि भूगर्भ जल संस्थान मेरठ में कार्यरत उसके भाई अजय सिंह ने पेपर लीक कराया था‚ जिसमें कानपुर नगर निगम में राजस्व निरीक्षक जितेंद्र कुमार वर्मा भी शामिल था। अब एसटीएफ इस मामले में भी दोबारा पड़़ताल कर रही है। वहीं एक आईपीएस अधिकारी ने प्रयागराज में इस मामले की एफआईआर दर्ज किए जाने को अदालत में अर्जी भी दी है।