प्रदूषण एनओसी के बिना ही कारोबार कर रहे हैं यूपी के 99 फीसदी होटल

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प्रदूषण एनओसी के बिना ही कारोबार कर रहे हैं यूपी के 99 फीसदी होटल

लखनऊ। चमचमाती हुई इमारतों में फाइव स्टार सुविधाओं के नाम पर ग्राहकों से हजारों रूपए ऐंठने वाले ब्रांडेड होटल नियमों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। इन होटलों में सरकारी नियमों को तक पर रखकर प्रतिदिन लाखों लीटर भूजल का दोहन होता है और लगभग उतने ही जल को अपशिष्ट रूप में बहाया जाता है। कानूनी रूप से होटल कारोबारियों को भूजल दोहन और अपशिष्ट जल को प्रवाहित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी होती है, जबकि उत्तर प्रदेश की होटल इंडस्ट्री में ऐसे गिने चुने होटल हैं जिन्होंने इस कानूनी तौर पर अनुमति ले रखी है।

सालों से गहरी नींद में सो रहे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब ऐसे होटलों को नोटिस भेजा है जो उसके अनापत्ति प्रमाण पत्र के बगैर ही भूजल के दोहन और अपशिष्ट जल को बहाने में लगे हैं। एक आरटीआई कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मिली जानकारी के मुताबिक सूबे में कुल 15 ऐसे होटल हैं, जिन्हें साल 2015 तक एनओसी दी गई है। इस सूचि में लखनऊ के मात्र दो होटल शामिल हैं, पहला होटल क्लार्क अवध और दूसरा होटल गेटवे।

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अब सवाल उठता है कि राजधानी में सालों से स्टेटस सिंबल बने ताज होटल ने आज तक एनओसी क्यों नहीं प्राप्त की या फिर लखनऊ में इस होटल की मोनॉपली को चुनौती देने के लिए होटल कारोबार में उतरे दर्जन भर देशी और विदेशी ब्रांड के अन्य होटलों के संचालकों ने भी एनओसी लेना जायज क्यों नहीं समझा।

आपको जानकार हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कितने होटल हैं, इस बात का सही आंकड़ा तक प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के पास नहीं है। मगर बोर्ड का कहना है कि उसने 218 होटलों को नोटिस थमाया है और अब बोर्ड एनजीटी में ऐसे होटलों के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रहा है।

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लखनऊ। चमचमाती हुई इमारतों में फाइव स्टार सुविधाओं के नाम पर ग्राहकों से हजारों रूपए ऐंठने वाले ब्रांडेड होटल नियमों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। इन होटलों में सरकारी नियमों को तक पर रखकर प्रतिदिन लाखों लीटर भूजल का दोहन होता है और लगभग उतने ही जल को अपशिष्ट रूप में बहाया जाता है। कानूनी रूप से होटल कारोबारियों को भूजल दोहन और अपशिष्ट जल को प्रवाहित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेनी होती है, जबकि…
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