इज्जत बचाने के लिए मां-बेटी चलती ट्रेन से कूदीं, अस्पताल में सुनाई आपबीती

इज्जत बचाने के लिए मां-बेटी चलती ट्रेन से कूदीं, अस्पताल में सुनाई आपबीती

कानपुर। ट्रेनों में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बद्सलूकी के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए रेल मंत्रालय ने ट्रेनों में गश्ती का प्रबंध किया है और शिकायत हेल्प लाइन भी जारी की है। इसके बावजूद अपराधियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं। शायद वे जानते हैं कि उन्हें रोकने की जिम्मेदारी जिन लोगों के हाथों में है वे अपना कर्तव्य के प्रति गंभीर नहीं है। जिसका परिणाम आए दिन अलग अलग खबरों के माध्यम से समाज के सामने आता है।

ऐसा ही वारदात रविवार को कानपुर में सामने आई जिसने रेलवे पुलिस और रेल प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। कानपुर के चंदारी इलाके में है जहां जोधपुर हावडा एक्सप्रेस से मां बेटी ने छलांग लाग दी। इस बात की सूचना जैसे ही रेलवे के अधिकारियों को लगी आनन फानन में मौके पर एंबुलेंस भेजकर दोनों को कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मां—बेटी को गंभीर चोटें आईं हैं, लेकिन मां की तबियत बेहतर बताई जा रही है।

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पीड़ित मां का कहना है कि वह अपनी बेटी के साथ दिल्ली जाने के लिए चालू टिकट लेकर जनरल बोगी में सवार हुई थी। यात्रा के दौरान कुछ मंचलों ने पहले उसकी बेटी के साथ छीटाकसी की और देखते देखते अश्लीलता पर उतर आए। जिसकी शिकायत उन्होंने ट्रेन पर मौजूद रेलवे पुलिस के जवानों से भी की, लेकिन पुलिस वालों ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायत करने के बाद मनचलों ने अपनी हदें उस समय पार कर दीं जब बेटी ट्रेन के शौचालय में गई। शौचालय के बाहर मौजूद मनचलों ने जबर्दस्ती करने के इरादे के साथ उसकी बेटी को दबोच लिया। पहले से घबराई बेटी ने मदद के लिए चीख पुकार मचाई तो वह दौड़कर मदद के लिए पहुंची, लेकिन उन बदमाशों के बीच खुद को बेबस पाकर दोनों ने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी।

बताया जा रहा है कि दो यात्रियों को ट्रेन से गिरता देख गार्ड ने इस बात की सूचना कंट्रोल रूम को दी। जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने मौके पर पहुंच कर दोनों को घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया है। रेलवे प्रशासन का कहना है कि पीड़ित मां बेटी की शिकायत के आधार पर जांच के आदेश जारी किए गए है। पीड़ितों से इस विषय में विस्तार से जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी और जो लोग भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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इस घटना को देखने के बाद ऐसा लगता है कि अगर समाज में कानून व्यवस्था को कायम रखने की जिम्मेदारी लेने वाले लोग थोड़ी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन कर लेते तो आज अस्पताल में भर्ती मां—बे​टी को चलती ट्रेन से छलांग लगाने की जरूरत न पड़ती। अगर उन मनचलों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई की जाती तो शायद अगली बार गलत काम करने से पहले वे सौ बार अंजाम की परवाह करते, लेकिन अफसोस की ऐसा नहीं हुआ।

यह घटना एक सवाल उन लोगों के लिए भी उठाती है जो उस ट्रेन में इन मां बेटी के साथ यात्रा तो कर रहे थे, लेकिन अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को निभाने से डर रहे थे। शायद मां बेटी के साथ हो रही जबर्दस्ती उन लोगों के भीतर सुरक्षा की भावना पैदा कर रही थी, लेकिन वे यह नहीं सोच पा रहे थे कि जो बदमाश आज जिन दो महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं कल को वे किसी और महिला के साथ भी ऐसा कर सकते हैं। शायद उनका अगला शिकार बनने वाली महिला उन्हीं में से किसी एक की बेटी या बहन भी हो सकती है। इसलिए हमारी अपील है कि अगर आपके आस पास भी कोई ऐसी घटना होती है तो आप को चाहिए कि वहां मौजूद सुरक्षा ​कर्मियों पर दबाव बनाकर कार्रवाई करवाएं, क्योंकि अपराधियों की सबसे बड़ी ताकत लोगों की चुप्पी ही होती है।

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