एक मां ऐसी भी, बेटा बोला- ‘जा तू भी दूसरी शादी कर ले’

नई दिल्ली। साल का हर दिन कुछ न कुछ खास होता है। कुछ ऐसा ही दिन आज का है, जिसे हम मदर्स डे के रूप में मनाते हैं। सोशल साइट पर ज़्यादातर लोग अपनी मां की फोटो या कोई विशेष संदेश शेयर करते हुए नजर आए, लेकिन कुछ ऐसी बदनसीब मां भी हैं, जिन्होने अपने बच्चों की जिंदगी संवारने में पूरी उम्र बिता दी, पर बदले में मिली जिल्लत भरी जिंदगी। एक ऐसी ही कहानी से हम आपको आज रूबरू कराने जा रहे हैं, जो किसी भी साधारण इंसान के दिल को झकझोर देगी।




ये मामला बिहार के पाटलिपुत्र में संचालित शांति कुटीर में रहने वाली 65 साल की शांति देवी का है। शांति देवी की बूढ़ी आँखों से आंसू छलक पड़े जब उन्होने बताना शुरू किया कि पति के मरने के बाद इतनी उम्र में उन्हे याद ही नहीं कि कब भरपेट खाना उन्हे नसीब हुआ। शांति बताती हैं कि पति की मौत के बाद उन्होने मजदूरी कर अपने दो बच्चों को पाल-पोष कर बड़ा किया। शादी भी करा दी, लेकिन हालत ये हो गए कि एक पहर का खाना भी मिलना नसीब नहीं है।


बेटा बोला दूसरी शादी कर लो–

शांति की आंखों से लगातार आंसू गिरे जा रहे थे, ये बताए हुए कि उनके लड़के ने कहा, “हम तुम्हें नहीं रख पाएंगे, जा तू भी दूसरी शादी कर ले।”
शांति ने बताया, क्या इस बुढ़ापे में अब मैं शादी करूंगी? क्या पता था, जिनकी आंखों की कभी किरकिरी निकालती थी, एक दिन उनकी आंखों की ही किरकिरी बन जाऊंगी। उनकी आंखों से निरंतर आंसू बहने लगे और ईश्वर से मौत की प्रार्थना करने लगीं।




शांति देवी लगभग दो वर्ष से समाज कल्याण विभाग की ओर से पाटलिपुत्र में संचालित शांति कुटीर में रह रही हैं। उनकी उम्र 65 वर्ष है। वह मूल रूप से बाढ़ की रहने वाली हैं। उनके दो बच्चे हैं। एक बेटा और एक बेटी, दोनों शादीशुदा हैं। बेटी की शादी मुजफ्फरपुर में दारोगा से हुई है। बेटे को सरकारी नौकरी नहीं है, पर प्राइवेट काम कर बेहतर जीवन जी रहा है।


पैर में है एग्जीमा की समस्या

शांति देवी के पैर में एग्जीमा की समस्या है। इसके चलते बेटे और बहू ने बोझ समझ घर से निकाल दिया। बेटे बहू ने मिलकर शांति देवी के घर को बेचकर ससुराल में ही बस गये। इसके बाद बेघर मां अपनी जान देने चली थी, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वह कुछ समय तक रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने लगी, उम्र होने के कारण वह बीमार भी रहने लगी। इसी क्रम में रेलवे पुलिस ने उसे समाज कल्याण विभाग की ओर से शांति कुटीर में भेज दिया, जहां वह दो वर्षों से रह रही हैं।

इन दो वर्षों में उन्हें लेने न तो उनका बेटा आया और न ही बेटी। शांति अपने जीवन से पूरी तरह से नाउम्मीद हो चुकी हैं।

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