‘साहित्य और शिक्षा का संगम’ थीम पर मोटिवेजर्स क्लब ने आयोजित किया कार्यक्रम

motivagers-club
‘साहित्य और शिक्षा का संगम’ थीम पर मोटिवेजर्स क्लब ने आयोजित किया कार्यक्रम

Motivagers Club Event

लखनऊ। सीखने की कोई उम्र नहीं होती, हम बचपन से सीखना शुरू करते हैं और हमें पूरे जीवन कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जैसे कि ज्ञान के दो पहलू होते हैं पहला शिक्षक और दूसरा साहित्य। वहीं दोनों को ध्यान में रखते हुए बुजुर्गों के लिए मोटिवेजर्स क्लब ने ‘एफेल कैफे’ में कार्यक्रम आयोजित किया। क्लब में आने वाले तमाम बुजुर्गों ने इवेंट की सभी एक्टिविटीज़ में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। मोटिवेजर्स क्लब हर माह के दूसरे रविवार को बुजुर्गों के लिए इवेंट कराता है।

कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई जिसमें इशिता चौहान ने ‘जय जय मां सरस्वती’, ‘हे शारदे मां’ गीत गाया जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी लोग अपने बचपन के स्कूली दिनों की यादों में खोये नज़र आए। जिसके बाद आस्था सिंह और प्रिशिता राठी ने क्विज़ और बेस्ट स्लोगन फॉर मोटिवेजर्स पर कॉमपटीशन करवाया जिसमें क्लब के मेंबर किशोर शाह, जी सी त्रिपाठी, एच सी खरे, गुरु पृसाद अौर विनीता टंडन ने सबसे ज्यादा सही सवालों के जवाब दिये जबकि बेस्ट स्लोगन फॉर मोटिवेजर्स जीसी त्रिपाठी और पी के बजाज़ ने दिया ।

मुख्य अतिथि के रूप में साहित्य पर मजबूत पकड़ बनाए रखने वाले लखनऊ के मशहूर कवि, लेखक व पत्रकार हफीज़ किदवई, मुकुल श्रीवास्तव और योगेश मिश्रा मौजूद रहे। इन्हे क्लब की ओर से सम्मानित किया गया जिसके बाद अथितियों ने साहित्य और शिक्षक का हमारे जीवन में क्या योगदान है तथा साहित्य का शिक्षा में कितना महत्त्व है इसपर अपनी बात रखी।

वही क्लब के फ़ाउंडर गौरव छाबड़ा ने आज की थीम को लेकर अपने विचार रखे और बताया कि साहित्य, लेखनीय, अनुभव कुछ ऐसे पहलू हैं जिसे एक दूसरे के सामने रखकर अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी या यूं कहें कि अपने व्यस्त जीवन से हटकर काफ़ी तरोताज़ा महसूस कर सकें।

लेखक व पत्रकार हफीज़ किदवई ने साझा किया अपना अनुभव

हर एक लेखक तभी कामयाब होता है जब उसे पढ़ने वाला समाज हो। समाज पढ़ने वाला तब बनेगा जब वह शिक्षित होगा। ऐसी शिक्षा जो नौकरी की भाग दौड़ तक ही सीमित न हो बल्कि वह अंधकार को छांटकर उजाले की ओर ले जाए। जो हमे विचारों को निखारे। आज साक्षरता दिवस पर हम सब जो पढ़े लिखे लोग हैं, तय करना होगा कि हम उन विचारों को उगाएँगे, हवा पानी देंगे जो आने वाली पीढ़ी को सुंदर आज़ाद माहौल देगा। हफ़ीज़ क़िदवई ने अपनी किताब ‘हैशटैग आशिक़ी’ का भी ज़िक्र किया और अपनी कहानी ‘मैं ट्यूटर था’ पढ़कर सुनाया।

इस दौयाना कार्यक्रम में मौजूद लखनऊ विश्वविद्यालय के हेड ऑफ डिपार्टमेंट मुकुल श्रीवास्तव ने मोटिवेजर्स क्लब की इस कोशिश को सराहा और सीनियर सिटीजंस को लेकर अपने जीवन के कई क़िस्सों को सबके साथ साझा किया।

मोटिवेजर्स क्लब की ओर से अटल बिहारी जी को श्रद्धांजली

मोटिवेजर्स क्लब की ओर से देश के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत अटल बिहारी को श्रद्धांजली दी गयी। अटल बिहारी जी को याद करते हुए क्लब की मेंबर रजनी राय अौर क्लब की वालेंटियर वंशिका अौर आयूषी ने अटल जी द्वारा लिखी कुछ कविताएं पढ़ी। दरअसल उन्होने काल के कपाट पर कभी न मिटने वाली ऐसी छाप छोड़ी है, जो दुनिया में हमेशा अटल बनी रहेगी।

काव्य कोश में दिखा बुजुर्गों का इन्टरेस्ट

काव्य कोश( कवितायें) में मोटिवेजर्स क्लब के काफी मेम्बर्स ने आगे आकर तमाम मशहूर कवियों की कविताए सुनाई तो कई ने खुद अपनी लिखी हुई कविता पढ़ वहां मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े कर दिए। उसी के बाद शुरू हुआ सवाल-जवाब का कारवां जिसमें साहित्य से जुड़े तमाम सवाल पूछे गए।

शिक्षकों को किया गया सम्मानित

क्लब में मौजूद शिक्षकों को मोटिवेजर्स की तरफ से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मानित करने के लिए वोलेंटियर ने हैंडमेड गिफ्ट जैसे रंगीन पेपर से बने फूल के गुलदस्ते और मोमेंटो दिया गया।

लखनऊ। सीखने की कोई उम्र नहीं होती, हम बचपन से सीखना शुरू करते हैं और हमें पूरे जीवन कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जैसे कि ज्ञान के दो पहलू होते हैं पहला शिक्षक और दूसरा साहित्य। वहीं दोनों को ध्यान में रखते हुए बुजुर्गों के लिए मोटिवेजर्स क्लब ने 'एफेल कैफे' में कार्यक्रम आयोजित किया। क्लब में आने वाले तमाम बुजुर्गों ने इवेंट की सभी एक्टिविटीज़ में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। मोटिवेजर्स क्लब हर माह के दूसरे रविवार…