MP: चौथी बार CM बने शिवराज सिंह चौहान ने हाशिल किया विधानसभा में विश्वास मत

shivraj singh
MP: चौथी बार CM बने शिवराज सिंह चौहान ने हाशिल किया विधानसभा में विश्वास मत

भोपाल: आखिरकार महीनो से मध्यप्रदेश में चल रहा सियासी संकट थम गया और बीती रात बीजेपी पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान के नेत्रत्व में सरकार बना ली। शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार सीएम पद की शपथ ली है। वहीं दूसरे दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में सर्वसम्मति से विश्वास प्रस्ताव भी हासिल कर लिया है। बता दें कि कांग्रेस का एक भी विधायक मतदान के समय विधानसभा में मौजूद नहीं था वहीं सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।

Mp Shivraj Singh Chauhan Became Cm For The Fourth Time :

भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीन बार शिवराज सिंह के हाथो में कमान सौंपी थी लेकिन 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को कुछ सीटों के अंतराल से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि कांग्रेस ने अपने दम पर ही सरकार बना ली थी लेकिन अन्दर ही अन्दर कांग्रेस पार्टी में बिखराव हो गया और फिर हाल ही में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस को भारी पड़ गया।

कांग्रेस के 22 विधायकों ने सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही बगावत शुरू कर दी और सभी ने एक साथ अपना इस्तीफा दे दिया। कई दिनो तक नाटक चलता रहा लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कमलनाथ सरकार को सभी विधायको के इस्तीफे मंजूर करने पडे। इसके बाद कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी। और फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ गया था।

बता दें कि 13 साल की उम्र में शिवराज संघ से जुड़े और अब तक भाजपा को मध्य प्रदेश में मजबूती देने में लगे हुए हैं। शिवराज सिंह चौहान 2003-2004 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा से विधायक बने। अगले ही साल वह पहली बार लोकसभा चुनाव भी जीते। वह पांच बार लगातार विधानसभा लोकसभा सीट से चुनाव जीते। इसके बाद वह 2005 से 2018 तक तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे। अब शिवराज चौथी बार एमपी के मुख्यमंत्री बने हैं।

भोपाल: आखिरकार महीनो से मध्यप्रदेश में चल रहा सियासी संकट थम गया और बीती रात बीजेपी पार्टी ने शिवराज सिंह चौहान के नेत्रत्व में सरकार बना ली। शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार सीएम पद की शपथ ली है। वहीं दूसरे दिन मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में सर्वसम्मति से विश्वास प्रस्ताव भी हासिल कर लिया है। बता दें कि कांग्रेस का एक भी विधायक मतदान के समय विधानसभा में मौजूद नहीं था वहीं सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। भारतीय जनता पार्टी ने लगातार तीन बार शिवराज सिंह के हाथो में कमान सौंपी थी लेकिन 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को कुछ सीटों के अंतराल से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि कांग्रेस ने अपने दम पर ही सरकार बना ली थी लेकिन अन्दर ही अन्दर कांग्रेस पार्टी में बिखराव हो गया और फिर हाल ही में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल होना कांग्रेस को भारी पड़ गया। कांग्रेस के 22 विधायकों ने सिंधिया के पार्टी छोड़ते ही बगावत शुरू कर दी और सभी ने एक साथ अपना इस्तीफा दे दिया। कई दिनो तक नाटक चलता रहा लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कमलनाथ सरकार को सभी विधायको के इस्तीफे मंजूर करने पडे। इसके बाद कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी। और फिर मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ गया था। बता दें कि 13 साल की उम्र में शिवराज संघ से जुड़े और अब तक भाजपा को मध्य प्रदेश में मजबूती देने में लगे हुए हैं। शिवराज सिंह चौहान 2003-2004 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। 1990 में पहली बार बुधनी विधानसभा से विधायक बने। अगले ही साल वह पहली बार लोकसभा चुनाव भी जीते। वह पांच बार लगातार विधानसभा लोकसभा सीट से चुनाव जीते। इसके बाद वह 2005 से 2018 तक तीन बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर काबिज रहे। अब शिवराज चौथी बार एमपी के मुख्यमंत्री बने हैं।