मुकेश बहादुर की गुंडई पर कानून का डंडा, गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज

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मुकेश बहादुर की गुंडई पर कानून का डंडा, गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज

लखनऊ। अपने रसूख के बल पर जालसाजी करने वाले हाईप्रोफाइल नटवरलाल मुकेश बहादुर सिंह पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस ही गया। ठगी की कवरेज करने वाले मीडिया संस्थान को धमकाने के मामले में गोमतीनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। माना जा रहा है कि पुलिस जल्द ही मुकेश के खिलाफ कार्रवाई करेगी।

Mukesh Bahadur Ki Gundai Par Kanon Ka Danda :

आपको बता दें कि शहर के नामचीन बिल्डर गंगा सागर चौहान ने मुकेश बहादुर सिंह निवासी अभिषेक उद्यान 2 रायबरेली रोड पर ठगी के गंभीर आरोप लगाए थे। इस सम्बंध में पर्दाफाश डाट कॉम ने खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने से बौखलाये मुकेश के गुर्गे पर्दाफाश डाट कॉम के आफिस के आसपास घूमने लगे। अनहोनी की आशंका से इसकी जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी को दी गई।

प्रकरण की गंभीरता देखते हुए श्रीअवस्थी ने लखनऊ पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद गोमतीनगर पुलिस ने मुकेश बहादुर सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह था पूरा मामला

आपको बता दें कि लखनऊ के रहने वाले बिल्डर और मेसर्स भूमि सागर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्ट गंगा सागर सिंह चौहान ने मुकेश बहादुर सिंह पर ठगी के गंभीर आरोप लगाए थे। गंगा सागर के मुताबिक करीब तीन साल पहले उनकी मुलाकात मुकेश बहादुर से हुई थी। मुकेश बहादुर खुद को ए एंड ए कंपनी का डायरेक्टर बताया है। गंगा सागर का आरोप है कि मुकेश बहादुर ने रायबरेली में एक कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रलोभन दिया और जमीन खरीदने के नाम पर कई किश्तों में कंपनी के अकाउंट से पैसे लिए, जिसके ट्रांजेक्सन की पूरी डिटेल उन उनके पास मौजूद है।
गंगा सागर के मुताबिक उन्होने मुकेश बहादुर को 16 करोड़ से ज्यादा रुपये कंपनी के अकाउंट से ट्रांसफर किए और जब उन्होने जमीन दिखाने और अपने नाम करने की बात कही तो मुकेश ने मिलना बंद कर दिया। आरोप है कि जब गंगा सागर ने अपने पैसे वापस मांगने का कई बार प्रयास किए गया तो उन्हे 50 लाख और ढाई करोड़ के चेक दिये गए जो बाउन्स हो गए। अपने साथ जालसाजी का शक होने पर गंगा सागर ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

रसूख के चलते बच रही थी पुलिस

मुकेश बहादुर सिंह ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर के साथ ही पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स का को-चेयरमैन भी है। सूबे की राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में मुकेश बहादुर का खासा दखल है। मुकेश बहादुर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का भी बेहद करीबी बताया जाता है। यही वजह थी कि अखिलेश यादव ने मुकेश को रायबरेली से विधान परिषद का सपा उम्मीदवार भी बनाया था। योगी सरकार में भी मुकेश का दखल इस कदर है कि वह खुलेआम आईएएस, आईपीएस और पीसीएस को जूते की नोक पर रखने की बात कहता है। यूपी सरकार के कई मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के साथ मुकेश अक्सर नजर आता है। सरकार ने बिना किसी खतरे के उसे छह सरकारी गनर मुहैया कराये हैं।

लखनऊ। अपने रसूख के बल पर जालसाजी करने वाले हाईप्रोफाइल नटवरलाल मुकेश बहादुर सिंह पर आखिरकार कानून का शिकंजा कस ही गया। ठगी की कवरेज करने वाले मीडिया संस्थान को धमकाने के मामले में गोमतीनगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। माना जा रहा है कि पुलिस जल्द ही मुकेश के खिलाफ कार्रवाई करेगी। आपको बता दें कि शहर के नामचीन बिल्डर गंगा सागर चौहान ने मुकेश बहादुर सिंह निवासी अभिषेक उद्यान 2 रायबरेली रोड पर ठगी के गंभीर आरोप लगाए थे। इस सम्बंध में पर्दाफाश डाट कॉम ने खबर प्रकाशित की थी। खबर प्रकाशित होने से बौखलाये मुकेश के गुर्गे पर्दाफाश डाट कॉम के आफिस के आसपास घूमने लगे। अनहोनी की आशंका से इसकी जानकारी अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी को दी गई। प्रकरण की गंभीरता देखते हुए श्रीअवस्थी ने लखनऊ पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद गोमतीनगर पुलिस ने मुकेश बहादुर सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह था पूरा मामला

आपको बता दें कि लखनऊ के रहने वाले बिल्डर और मेसर्स भूमि सागर इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राईवेट लिमिटेड के डायरेक्ट गंगा सागर सिंह चौहान ने मुकेश बहादुर सिंह पर ठगी के गंभीर आरोप लगाए थे। गंगा सागर के मुताबिक करीब तीन साल पहले उनकी मुलाकात मुकेश बहादुर से हुई थी। मुकेश बहादुर खुद को ए एंड ए कंपनी का डायरेक्टर बताया है। गंगा सागर का आरोप है कि मुकेश बहादुर ने रायबरेली में एक कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रलोभन दिया और जमीन खरीदने के नाम पर कई किश्तों में कंपनी के अकाउंट से पैसे लिए, जिसके ट्रांजेक्सन की पूरी डिटेल उन उनके पास मौजूद है। गंगा सागर के मुताबिक उन्होने मुकेश बहादुर को 16 करोड़ से ज्यादा रुपये कंपनी के अकाउंट से ट्रांसफर किए और जब उन्होने जमीन दिखाने और अपने नाम करने की बात कही तो मुकेश ने मिलना बंद कर दिया। आरोप है कि जब गंगा सागर ने अपने पैसे वापस मांगने का कई बार प्रयास किए गया तो उन्हे 50 लाख और ढाई करोड़ के चेक दिये गए जो बाउन्स हो गए। अपने साथ जालसाजी का शक होने पर गंगा सागर ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वहां पर उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई।

रसूख के चलते बच रही थी पुलिस

मुकेश बहादुर सिंह ए एंड ए कंपनी के डायरेक्टर के साथ ही पीएचडी चेम्बर ऑफ कॉमर्स का को-चेयरमैन भी है। सूबे की राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और मीडिया में मुकेश बहादुर का खासा दखल है। मुकेश बहादुर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का भी बेहद करीबी बताया जाता है। यही वजह थी कि अखिलेश यादव ने मुकेश को रायबरेली से विधान परिषद का सपा उम्मीदवार भी बनाया था। योगी सरकार में भी मुकेश का दखल इस कदर है कि वह खुलेआम आईएएस, आईपीएस और पीसीएस को जूते की नोक पर रखने की बात कहता है। यूपी सरकार के कई मंत्रियों और बड़े नौकरशाहों के साथ मुकेश अक्सर नजर आता है। सरकार ने बिना किसी खतरे के उसे छह सरकारी गनर मुहैया कराये हैं।