मुक्तिनाथ…जहां होती है मोक्ष की प्राप्ति

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मुक्तिनाथ...जहां होती है मोक्ष की प्राप्ति

महराजगंज : मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान(विष्णु) के लिए प्रसिद्ध है। शालिग्राम दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। पुराणिक कथाओं के अनुसार यह शाली ग्राम जी का मुखर बिंदु है।यह मुख्‍य रूप से मुक्तिनाथ एरिया के पास से प्रवाहित होने वाली काली गण्‍डकी नदी में पाया जाता है। जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र’ के नाम से जाना जाता हैं। हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार यह वह क्षेत्र है, जहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्‍त होता है।

Muktinath Temple Nepal :

मुक्तिनाथ बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए भी एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। इसी स्‍थान से होकर उत्‍तरी-पश्चिमी क्षेत्र के महान बौद्ध भिक्षु पद्मसंभव बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए तिब्‍बत गए थे। इस धाम का वर्णन विष्णु पुराण और गंडकी महात्या मैं भी है

स्वामी नारायण के अनुयायी जीवन मे एक बार जरूर आते है,कहा जाता है श्री स्वामी नारायण बालकाल मे यह 11 साल एक पैर पर खड़े होकर धयान लगाया था और ज्ञान प्राप्त किया था।

स्वामीनारायण का जीवन परिचय जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में, उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए, 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की।

इस यात्रा के दौरान, उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद, वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में, उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में, अपने गुरु के द्वारा, उनकी मृत्यु से पहले, उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया।

सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से, वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं । उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है।

नेपाल पर्यटन विभाग के सीईओ दीपक राज जोशी ने बताया पशुपति नाथ के बाद मुक्तिनाथ की यात्रा सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटक करते है।

महराजगंज : मुक्तिनाथ वैष्‍णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यह तीर्थस्‍थान शालिग्राम भगवान(विष्णु) के लिए प्रसिद्ध है। शालिग्राम दरअसल एक पवित्र पत्‍थर होता है जिसको हिंदू धर्म में पूजनीय माना जाता है। पुराणिक कथाओं के अनुसार यह शाली ग्राम जी का मुखर बिंदु है।यह मुख्‍य रूप से मुक्तिनाथ एरिया के पास से प्रवाहित होने वाली काली गण्‍डकी नदी में पाया जाता है। जिस क्षेत्र में मुक्तिनाथ स्थित हैं उसको मुक्तिक्षेत्र' के नाम से जाना जाता हैं। हिंदू धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार यह वह क्षेत्र है, जहां लोगों को मुक्ति या मोक्ष प्राप्‍त होता है। मुक्तिनाथ बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए भी एक महत्‍वपूर्ण स्‍थान है। इसी स्‍थान से होकर उत्‍तरी-पश्चिमी क्षेत्र के महान बौद्ध भिक्षु पद्मसंभव बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए तिब्‍बत गए थे। इस धाम का वर्णन विष्णु पुराण और गंडकी महात्या मैं भी है स्वामी नारायण के अनुयायी जीवन मे एक बार जरूर आते है,कहा जाता है श्री स्वामी नारायण बालकाल मे यह 11 साल एक पैर पर खड़े होकर धयान लगाया था और ज्ञान प्राप्त किया था। स्वामीनारायण का जीवन परिचय जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप में हुआ था। 1792 में, उन्होंने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए, 11 वर्ष की आयु में भारत भर में सात साल की तीर्थ यात्रा शुरू की। इस यात्रा के दौरान, उन्होंने कल्याणकारी गतिविधियां की और इस यात्रा के 9 वर्ष और 11 महीने के बाद, वह 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में, उन्हें अपने गुरु स्वामी रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हें साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया। 1802 में, अपने गुरु के द्वारा, उनकी मृत्यु से पहले, उन्हें उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया गया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजित की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से, वह स्वामीनारायण के रूप में जाने जाते हैं । उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप में जाना जाता है। नेपाल पर्यटन विभाग के सीईओ दीपक राज जोशी ने बताया पशुपति नाथ के बाद मुक्तिनाथ की यात्रा सबसे ज्यादा भारतीय पर्यटक करते है।