मुलायम-कुनबे का ‘जीव आश्रालय’, 1500 सौ करोड़ की 54 एकड़ जमीन पर ‘प्रत्यक्ष कब्जा’ 

लखनऊ। यूपी की सत्ता में पूरे पांच साल तक काबिज रहने वाली समाजवादी पार्टी में कार्यकाल के दौरान कई विवाद हुए, जिसका खामियाजा सपा को विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा। योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सबसे चर्चा का विषय मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव रहीं। अभी हाल ही में अपर्णा अपने पति व मुलायम सिंह के बेटे प्रतीक यादव के साथ अपनी संस्था ‘जीव आश्रालय’ पहुंची थी। कान्हा उपवन स्थित इस गौशाला के निरीक्षण के लिये उन्होने सीएम योगी आदित्यनाथ को बुलाया था। आपको बता दें कि ये गौशाला 54 एकड़ में फैली हुई है और इसकी कीमत 1500 करोड़ रुपये बताई जाती है। इस प्रकरण पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने कुछ बड़े खुलासे किए हैं।




बताते चलें कि आईएएस सूर्य प्रताप सपा सरकार के दौरान काफी चर्चित रहे थे। उन्होने सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था, जिसकी वजह से उन्हे अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ी थी, वहीं सरकार के संरक्षण के चलते कई बड़े नौकरशाह भी सूर्य प्रताप के पीछे पद गए थे।

सूर्य प्रताप सिंह ने अपनी फेसबुक वाल पर इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए लिखा है, ‘मुलायम के बेटे- बहू का कान्हा-उपवन: देखिए कैसे हथियाई गयी बेशक़ीमती 54 एकड़ सरकारी ज़मीन!’


सीएम योगी पहुंचे थे ‘जीव आश्रालय’—

आरोप है कि सीएम योगी को इस बारे में अभी तक जानकारी ही नहीं है कि जिस 54 एकड़ जमीन पर इस इस गौशाला को संचालित किया जा रहा है, वह नगर निगम की जमीन है और सपा सरकार की मेहरबानी है या यूं कहें कि सपा सरकार द्वारा किया गया कब्जा।

सूर्य प्रताप ने लिखा है, ‘नगर निगम ने इस ‘Animal Shelter’ का निर्माण लावारिस पशुओँ को रखने के किए किया था। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 7 अगस्त,2010 को इसका उद्घाटन किया था। अखिलेश सरकार ने बिना किसी विज्ञापन को निकाले यह Animal shelter मुलायम के बेटे-बहू के ‘जीव अश्रालय’ नामक NGO को 54 एकड़ ज़मीन व बिल्डिंग long-term lease पर आज़म ख़ान के निर्देश पर नगर विकास विभाग द्वारा दे दी।‘



सीएम योगी के पहुँचने से पहले लाई गयी थीं गायें——–

इस जगह पर कुछ लावारिस पशु रखे जाते हैं, परंतु यह कोई गोशाला नहीं है। जिस दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गए थे, उससे 4-5 दिन पूर्व कुछ गायों को लाकर रख दिया गया था। इस भूमि की क़ीमत रु.1500 करोड़ से अधिक है। इसके क़ब्ज़े को कभी न हटाया जा सके, शायद इसीलिए मुख्यमंत्री को भ्रमण कराया गया।