मुलायम ने दिखाया ‘अमर’प्रेम, दिया शिवपाल का साथ

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव सोमवार को पार्टी के झगड़े को लेकर आहत दिखाई दिए। उन्होंने एक तरफ जहां शिवपाल यादव को जनता का नेता बताया वहीं दूसरी ओर इशारों ही इशारों में अखिलेश को आलोचनाओं से सबक लेने की सलाह दे डाली।




सपा कार्यालय के भीतर हुई बैठक को संबोधित करते हुए मुलायम ने यह बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने अपना दर्द बयां किया। मुलायम ने कहा,”पार्टी को खड़ा करने में काफी पसीना बहाया है। लाठियां खाई हैं। आपातकाल के दौरान जेल गया हूं। आज ये लोग जो उछल रहे हैं, वे एक लाठी भी नही सह पाएंगे।” सपा मुखिया ने कहा कि आलोचनाओं से सबक लेना चाहिए। जिसकी सोच बड़ी नही होगी वह कभी बड़ा नेता नहीं बन सकता।

उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव ने जनता के बीच काफी काम किया है। वह सच्चे मायने में जनता के नेता हैं। उनको सही बात मालूम है। कुछ लोग आलोचनाओं से गुस्से में आ जाते हैं लेकिन उन्हें आलोचनाओं को स्वीकार करना चाहिए। बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल के विलय को लेकर भी वह शिवपाल के बचाव में दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी का परिवार एक सम्मानित परिवार रहा है। ऐसे लोगों को जोड़ने से फायदा होगा।

मुलायम ने कहा कि पार्टी के खिलाफ नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्हें बाहर किया जाएगा। शिवपाल के बाद मुलायम सिंह यादव भी अमर सिंह के समर्थन में आ गए। उन्होंने अखिलेश यादव को फटकार लगाते हुए अमर को अपना भाई बताया।

उधर, समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार को कहा कि पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को राज्य की बागडोर संभालनी चाहिए। शिवपाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “उन्हें (मुलायम सिंह) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालनी चाहिए।”




उन्होंने अखिलेश के नई पार्टी गठन की बात से इनकार करने के बाद कहा, “अखिलेश यादव ने मुझे बताया था कि वह नई पार्टी का गठन करेंगे।” शिवपाल ने कहा, “क्या पार्टी में मेरा कोई योगदान नहीं है? नेताजी (मुलायम सिंह) ने मेरे काम को सराहा है। मेरे अधीनस्थ विभाग ने अच्छा काम किया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन क्या हुआ? मुझे बाहर निकाल दिया गया।”

इससे पहले, मुलायम सिंह की मौजूदगी में बैठक को संबोधित करते हुए अखिलेश भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यदि नेताजी को लगता है कि मैं ठीक काम नहीं कर रहा हूं और मैं गलत हूं तो बेशक मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा।

अखिलेश ने कहा, “यदि नेताजी चाहते हैं कि मैं मुख्यमंत्री न रहूं तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं। लेकिन एक बात बता देना चाहता हूं कि आपके खिलाफ साजिश हो रही है और मैं उसे सफल नही होने दूंगा।” अखिलेश ने खुले तौर पर अमर सिंह का नाम लेते हुए कहा कि सारी फसाद की जड़ वही हैं। उन्होंने कहा,”जब मुझे प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया तो अमर सिंह आपके यहां तीन घंटें तक बैठे रहे। आप एक बार कहते तो मैं प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देता।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी मेरे पिता ही नही गुरु भी हैं। उन्होंने मुझे राजनीति सिखाई है। हमारे खिलाफ लोग साजिश करने में जुटे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि महाबैठक को संबोधित करते हुए अखिलेश का गला भर आया। इस बैठक में मुलायम के अलावा शिवपाल सिंह यादव सहित सभी विधायक, एमएलसी भी मौजूद हैं।

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