मुलायम के ‘अमर-प्रेम’ को लगा अखिलेश की नाराजगी का ग्रहण

लखनऊ। यूपी की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के मुखिया परिवार में बीते दिन हुआ घमासान शांत हो चुका है, पूरे परिवार ने आगरा—लखनऊ एक्सप्रेस वे के उद्घाटन समारोह में एक साथ उपस्थिति दर्ज करवाकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच परिवार में आॅल इज वेल होने का संदेश भी दे दिया है लेकिन इस पूरे कार्यक्रम में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के मुंह बोले भाई और शिवपाल के करीबी होने के साथ—साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अमर सिंह की गैरमौजूदगी से नई चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। ऐसे कयास लगाए जाने लगे हैं कि रामगोपाल यादव की वापसी के साथ मुलायम सिंह यादव ने अमर ​सिंह से दूरी बनाना शुरू कर दी है।




सूत्रों की माने तो अमर सिंह को 21 नंवबर को आयोजित एक्सप्रेस वे के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए निमंत्रण नहीं दिया गया था। मुलायमवादी कहलाने वाले अमर सिंह को इस कार्यक्रम का निमंत्रण न दिए जाने का फैसला मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का था, जिसे मुलायम सिंह यादव ने भी अपनी मूक सह​मति दी थी।

पार्टी के सूत्रों की माने तो नेता जी को परिवार की आंतरिक राजनीति शांत होती नजर आ रही है। यूपी चुनावों की राजनीति से गुजर रहा है ऐसे में समाजवादी पार्टी की आंतरिक कलह पार्टी को नुकसान पहुंचा रही थी। इसीलिए किसी भी ऐसे व्यक्ति को समारोह में नहीं बुलाया गया, जिन पर परिवार में फूट डालने की कोशिश के आरोप लगे हों।




पर्दाफाश से शिवपाल यादव के करीबी मित्र के रूप में पहचान रखने वाले एक नेता ने नाम ना प्रकाशित किए जाने की शर्त पर खुलासा किया है कि मुलायम सिंह यादव के परिवार में शांति बहाली के लिए शिवपाल यादव ने अपने स्वाभिमान को दांव पर लगा दिया है। शिवपाल यादव ने अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव को शांत रहने और अखिलेश यादव के हर फैसले पर अपनी सहमति देने का वचन दिया है। वह पार्टी और सरकार के किसी भी फैसले पर न तो अपनी प्रतिक्रया दे रहे हैं न ही कोई सुझाव दे रहे हैं।




शिवपाल पूरी तरह से बैकफुट पर जा चुके हैं। खबरें तो यहां तक हैं कि शिवपाल यादव 2017 के चुनावों में अपने ​निर्वाचन क्षेत्र के अलावा किसी भी जगह सक्रिय भी नजर नहीं आएंगे। इस चुनाव में सर्वेसर्वा की भूमिका में उनके भतीजे सीएम अखिलेश यादव ही नजर आएंगे।