क्या बिहार में लालू और यूपी में अखिलेश की राजनीति का तोड़ बनेंगे मुलायम

लखनऊ। देश की राजनीति तेजी से बदल रही है। विपक्ष के कई बड़े नेता सत्ता पक्ष के साथ खड़े होने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। हाल ही में हुए राष्ट्रपति चुनाव में यह तस्वीर और ज्यादा स्पष्ट हो गई। विपक्ष के कई दिग्गजों ने खुले तौर पर एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को अपना समर्थन दिया। इनमें एक नाम रहा यूपी के धुरंधर मुलायम सिंह यादव का जिन्होंने अपने बेटे के फैसले के खिलाफ जाकर अपना समर्थन कोविंद को दिया।

अब खबरें आ रहीं हैं कि बीजेपी मुलामय सिंह यादव को बिहार का राज्यपाल बनाने जा रही है। बिहार के पूर्व राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनने के साथ दिए इस्तीफा के बाद से यह कुर्सी खाली है। ऐसे में एनडीए सरकार पर इस कुर्सी के लिए एक ऐसा चेहरा ढूंढ़ने की चुनौती है, जिसे बिहार की राजनीति के हिसाब से फिट माना जाए। एक ऐसा चेहरा जो बिहार में महागठबंधन वाली सरकार के फैसलों को केन्द्र सरकार के हिसाब से प्रभावित कर सके और कोई उंगली केन्द्र की ओर न उठे। इस दृष्टिकोण से मुलायम सिंह यादव एक फिट ​चेहरा हैं। जिसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह में सहमति की स्थिति भी बनती दिख रही है।

मुलायम सिंह यादव की वर्तमान राजनैतिक हैसियत की बात करें तो समाजवाद की राजनीति कर शीर्ष तक पहुंचे इस नेता के हाथ इन दिनों बिलकुल खाली हैं। जिस तरह से उनके बेटे अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी सुप्रीमो की कुर्सी से उतार कर पार्टी का संरक्षक बना दिया उसे मुलायम की सक्रीय राजनीति का अंत कहा गया।

यूपी में अखिलेश तो बिहार में लालू की राजनीति होगी प्रभावित —

मुलायम सिंह यादव को भले ही उनके बेटे अखिलेश यादव ने राजनीति के दंगल का बूढ़ा पहलवान समझ लिया हो लेकिन बीजेपी इस बूढ़े पहलवान पर अपना दांव लगाती दिख रही है। मुलायम को पार्टी में हासिए पर धकेले जाने से कई पिछड़े और मुस्लिम नेता अखिलेश यादव से नाराज हैं, लेकिन मजबूरी उन्हें सपा के साथ बनाए हुए है। ऐसे में मुलामय को बिहार का राज्यपाल बना दिया जाता है तो मुलायम समर्थक इसे उनके सम्मान से जोड़कर देखेंगे और जातिवादी राजनीति में बीजेपी अपने एक कमजोर पहलू को मजबूत कर सकेगी।

वहीं दूसरी ओर बिहार में यादवों की राजनीति करने वाले लालू प्रसाद यादव के खिलाफ बीजेपी राज्यपाल के रूप में मुलायम को स्थापित कर देगी जो यादव वोटबैंक में सेंधमारी करने में बीजेपी मदद करेगा। मुलायम और लालू के बीच की रिश्तेदारी लालू पर नकेल कसने का काम करेगी। चूंकि दोनों समधी हैं इसलिए लालू बतौर राज्यपाल मुलायम के फैसलों पर बारबार उंगली उठाकर केंद्र सरकार पर निशाना नहीं सधेंगे।

शिवपाल की रहेगी अहम भूमिका —

मुलायम सिंह यादव के नीचे रहकर अपनी अलग राजनीतिक हैसियत बनाने वाले शिवपाल यादव के लिए यह एक अच्छा मौका होगा। लंबे समय से शिवपाल और बीजेपी के बीच रिश्तों की चर्चा होती रही है। यह रिश्ते कैसे है और इनके पीछे का कारण क्या है यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि नेता जी के राज्यपाल बनने के साथ ये रिश्ते खुलकर सामने आ सकते हैं। यूपी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की भीतरी राजनीति के चलते भतीजे अखिलेश यादव के हाथों कई बार अपमानित हो चुके चाचा शिवपाल यादव अगर भविष्य में भगवा राजनीति करते नजर आएं तो यह कोई बड़ी बात नहीं होगी।