मुन्ना बजरंगी की मर्डर मिस्ट्री योगी सरकार और न्याय व्यवस्था पर सवाल

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मुन्ना बजरंगी की मर्डर मिस्ट्री योगी सरकार और न्याय व्यवस्था पर सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की हाई सिक्योरिटी जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या यूपी के गली चौबारों से लेकर सत्ता गलियारों तक सुर्खियों में बनी हुई है। आम लोगों की बात करें तो वह इस घटना को एक कुख्यात अपराधी की हत्या के रूप में भले ही देख रहे हैं, लेकिन जेल के भीतर दस गोलियां मारे जाने की घटना किसी साजिश के रूप में देखी जा रही है।जिसमें कुछ सियासतदाओं की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।

कानून के जानकारों की माने तो अपराध और अपराधिकयों को नियंत्रित करने का काम पुलिस का होता है, लेकिन उसे सजा देने का काम देश की अदालतें करतीं हैं। जब कोई अपराधी अदालत के समक्ष पेश हो जाता है तो उसकी सुरक्षा की गारंटी सरकार लेती है। वही सरकार जिसके अधिकार क्षेत्र में जेलें काम करतीं हैं। ऐसे में जेल के भीतर न्यायिक अभिरक्षा में मौजूद किसी व्यक्ति को मौत के घाट उतारा जाना, अदालती प्रक्रिया और सरकार के इकबाल पर ढेरों सवालियां निशान खड़े करता है।

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जेलों में अपराधियों के बीच झगड़े होना आम बात है। कभी वार्चस्व को लेकर तो कभी अपने को बड़ा माफिया साबित करने के लिए ऐसी घटनाएं होती रहतीं हैं। ऐसी ही घटनाओं के चलते अदालतों ने जेलों में सिक्योरिटी मानकों को कड़ा करते हुए, संगठित अपराध में सक्रिय अपराधियों को हाई सिक्योंरिटी सेल्स में रखने का नया कायदा बनाया था। जेल की सुरक्षा व्यवस्था और जेल के भीतर से अपराधी की सक्रियता को ध्यान में रखते हुए समय समय पर ऐसे कैदियों को दूसरी जेलों में भेज दिया जाता है।

यहां मामला बिलकुल अलग है। मुन्ना बजरंगी को पेशी पर लाया गया था, जहां उसकी हत्या कर दी गई। अदालत में ले जाने के लिए लाए गए किसी अपराधी की हत्या होना न्याय व्यवस्था पर भी कई तरह के सवाल खड़े करता है।

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मुन्ना बजरंगी की मौत का सियासी विश्लेषण भी जारी—

इस घटना को लेकर यूपी की सियासी चौपालों में कई तरह के चर्चे हैं। कहा तो ये तक जा रहा है कि सारा उपक्रम पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी की कमर तोड़ने का है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मुख्तार अंसारी के बीच बार्चस्व को लेकर लंबे समय तक तनातनी रही है। मुन्ना बजरंगी, मुख्तार का शूटर रहा है और उसका सबसे विश्वासपात्र भी था। मुन्ना के मारे जाने से मुख्तार भी हिल गया है, ऐसी खबरें आ रहीं हैं कि बांदा जेल में बंद मुख्तार ने मुन्ना बजरंगी की हत्या की खबर मिलने के बाद दो दिनों से अपनी बैरक से बाहर कदम तक नहीं रखा है।

पूर्वांचल की सियासत को समझने के लिए मुख्तार अंसारी के कद को पढ़ना जरूरी है।मुख्तार मूल रूप से मऊ जिले का रहने वाला है, लेकिन उसका सियासी पकड़ गाजीपुर और वाराणसी तक देखने को मिली है। विशेषकर मुस्लिमों संप्रदाय के वोटरों के बीच उसे किसी रॉबिनहुड के रूप में देखा जाता है। यही वजह रही थी कि जब नरेन्द्र मोदी ने 2014 के चुनाव में वाराणसी से चुनाव लड़ने की तैयारी की तो उन्हें टक्कर देने के लिए मुख्तार अंसारी ने भी पर्चा भर दिया।

वहीं दूसरी चर्चा ये है कि पूर्वांचल के कई बहुबलीयों की गुटबाजी के चलते मुन्ना बजरंगी की हत्या करवाई गई है। मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने भी बाहुबली धनंजय सिंह पर बहुबली ब्रजेश सिंह के साथ मिलकर अपने पति की हत्या की साजिश रचने के आरोप जड़े हैं। वहीं गाजीपुर से सांसद मनोज सिन्हा का नाम भी मुन्ना बजरंगी के करीबियों ने लिया है।

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योगी सरकार के लिए भी चुनौती बनेगी यह हत्या—

यूपी की राजनीति और अपराध जगत को समझने वालों की माने मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या एक बड़ा संकट बन सकती है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हत्याओं का नया दौर शुरू हो सकता है। मुन्ना बजरंगी का गैंग पूर्वांचल के अलावा उत्तराखंड और दिल्ली तक सक्रिय है। उसके गुर्गे बदला लेने की नियत और मुन्ना बजरंगी के उत्तराधिकार के लिए खुद को साबित करने के लिए दूसरे गैंग के सदस्यों को अपना निशाना बना सकते हैं। जिससे यूपी की कानून व्यवस्था प्रभावित होना तय है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की हाई सिक्योरिटी जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या यूपी के गली चौबारों से लेकर सत्ता गलियारों तक सुर्खियों में बनी हुई है। आम लोगों की बात करें तो वह इस घटना को एक कुख्यात अपराधी की हत्या के रूप में भले ही देख रहे हैं, लेकिन जेल के भीतर दस गोलियां मारे जाने की घटना किसी साजिश के रूप में देखी जा रही है।जिसमें कुछ सियासतदाओं की भूमिका पर सवाल उठ…
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