मुस्लिम पत्रकार ने ‘जय श्री राम’ बोलकर बचाया अपना परिवार

नई दिल्ली। भीड़ का इंसाफ एक सामाजिक बुराई के रूप में फैल रहा है। जो सोच भीड़ जुटा ले वहां उसी सोच का कानून बन जाए तो सोचिए दुनिया के हर कोने का रंग कैसा होगा? शायद लाल। कहीं केसरिया पट्टे वाले इंसाफ करेंगे तो कहीं अल्लाह हु अकबर की हुंकार भरने वाले। ऐसे में नइंसाफी होगी तो सिर्फ उन लोगो के साथ जो मानते हैं कि एक सोच को दूसरे पर थोपना गलत है और हर सोच को एक दायरे में सम्मान मिलना चाहिए।

28 जून 2017 को एक वाक्या बिहार में सामने आया है। जहां दिल्ली से बिहार के रहीमाबाद जा रहे एक वरिष्ठ पत्रकार मुनने भारती का सामना जय श्री राम के नारे लगा रही एक केसरिया गमछाधारी भीड़ से हो गया। भारती उस समय समस्तीपुर नेश्नल हाईवे के मारगन चौक पर जाम में ट्रकों के बीच फंसे थे। भारती ने गलती से एक आम राहगीर की तरह भगवाधारी एक व्यक्ति से जाम का कारण क्या पूछा कि भीड़ में शामिल लोगों ने उनकी गाड़ी की खिड़की से अंदर देखा और नारेबाजी तेज कर दी। गाड़ी के भीतर उनकी मां, पिता और पत्नी मौजूद थे। स्वभावश भारती की पत्नी हिजाब पहने थी और पिता ने दाढ़ी रखी हुई थी।

मुनने ने इस घटना का जिक्र अपने फेसबुक बॅाल पर करते हुए लिखा है, “जब तक समझ पाता दो लोगों ने कार के शीशे के अंदर सर घुसाकर कहा बोलो जय श्री राम वरना कार फूँक देंगे, मैं दहशत मे हो गया, वैसे मैं सभी मज़हबों का बहुत सम्मान करता हूँ मै दिल से राम जी का सम्मान भी करता हूँ, उनकी जय करने मे मुझे कोई एतराज़ भी नही होता, लकिन जिस दहशत मे वह मुझे जय श्री राम कहलाना चाहते थे मुझे अच्छा नही लगा लेकिन दहशत मे मुझे जय श्री राम कहकर अपने परिवार को बचाकर वापस भागकर जान बचानी पड़ी।”

स्थिति से निकलने के बाद के अपने प्रयासों का जिक्र करते हुए मुनने ने लिखा, “कुछ दूर जाने के बाद मैने ट्विटर पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को टैग करते हुएे ट्वीट किया, जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार आैर राजद विघायक अखतरूल इस्लाम शाहीन को फोन करके मामले की जानकारी दी तथा अनुरोध किया कि तत्काल मामले में पुलिस मुस्तैदी के साथ सक्रिय हो ताकि कोई अप्रिय घटना ना घटे। बहरहाल माँ को बहुत बीमार मामा से मिलाने के लिए किसी तरह रास्ता बदल कर मैं अपने ननिहाल रहीमाबाद पहुँचा। वापसी जल्द दिल्ली की होने वाली है, लेकिन नीतिश कुमार के राज मे तांडव समझ में नहीं आया, किसी को नुक़सान ना हो, लेकिन इसके बाद आज भी मेरे दिल में राम जी को प्रति आस्था कम नहीं हुई।”

मुनने भारती के साथ हुई घटना किसी भी स्तर से सामान्य नहीं कही जा सकती। आखिर अपने ही देश में कोई अपना डर के जिये तो इसका अर्थ क्या निकाला जाए? क्योंकि हमारी संस्कृति और सभ्यता दोनों ऐसा करने को प्रेरित नहीं करतीं। जिन लोगों ने मुनने भारती के सामने जय श्री राम का नारा लगाने की रखी उन्हें एकबार उनकी फेसबुक वॉल पर लिखी वो लाइन जरूर पढ़ लेनी चाहिए जिसमें वह कहते हैं कि इस घटना के बाद भी उनके दिल में राम जी के प्रति आस्था कम नहीं हुई।