मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भाजपा नेताओं के केस होंगे वापस

मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भाजपा नेताओं के केस होंगे वापस!
योगी सरकार में अपराधियों के हौसले पस्त, यूपी पुलिस का मनोबल बढ़ा: यूपी भाजपा

लखनऊ। सूबे की योगी सरकार साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में आरोपी भाजपा नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने का मन बना चुकी है। इस संदर्भ में शासन से एक पत्र लिखकर करीब 9 आपराधिक मामलों के संदर्भ में केस वापसी की संभावना पर विचार मांगा गया है। बता दें कि बीते साल दिसंबर माह में सीएम योगी आदित्यनाथ पर दर्ज केस वापस लेने का आदेश जारी हुआ था। अब मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों पर दर्ज केस वापस लेने की तैयारी की चर्चा तेज हो गयी है।

Muzaffarnagar Riots Yogi Adityanath Government Withdrawing 9 Cases Bjp Leaders :

दरअसल, मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी को पांच जनवरी को एक पत्र भेजा गया। पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव राज सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है। पत्र में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का विचार भी मांगा गया है। बताते चलें कि मुजफ्फरनगर दंगों के आरोप में मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, सांसद भारतेंदु सिंह, विधायक उमेश मलिक और पार्टी नेता साध्वी प्राची के खिलाफ केस दर्ज हैं।

क्या था मुजफ्फरनगर दंगा-

मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में अगस्त-सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए थे। यह मामला गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। इस मामले में स्थानीय कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। कवाल गांव में कथित तौर पर एक युवती से छेड़छाड़ के बाद विवाद शुरू हुआ था. इसके बाद युवती के ममेरे भाईयों ने एक युवक को पीट-पीटकर मार डाला था।

लखनऊ। सूबे की योगी सरकार साल 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों में आरोपी भाजपा नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने का मन बना चुकी है। इस संदर्भ में शासन से एक पत्र लिखकर करीब 9 आपराधिक मामलों के संदर्भ में केस वापसी की संभावना पर विचार मांगा गया है। बता दें कि बीते साल दिसंबर माह में सीएम योगी आदित्यनाथ पर दर्ज केस वापस लेने का आदेश जारी हुआ था। अब मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों पर दर्ज केस वापस लेने की तैयारी की चर्चा तेज हो गयी है।दरअसल, मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी जीएस प्रियदर्शी को पांच जनवरी को एक पत्र भेजा गया। पत्र में उत्तर प्रदेश के न्याय विभाग में विशेष सचिव राज सिंह ने 13 बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इनमें जनहित में मामलों को वापस लिया जाना भी शामिल है। पत्र में मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का विचार भी मांगा गया है। बताते चलें कि मुजफ्फरनगर दंगों के आरोप में मंत्री सुरेश राणा, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बाल्यान, सांसद भारतेंदु सिंह, विधायक उमेश मलिक और पार्टी नेता साध्वी प्राची के खिलाफ केस दर्ज हैं। क्या था मुजफ्फरनगर दंगा-मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में अगस्त-सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हुए थे। यह मामला गोरखपुर के पीपीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था। इस मामले में स्थानीय कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। कवाल गांव में कथित तौर पर एक युवती से छेड़छाड़ के बाद विवाद शुरू हुआ था. इसके बाद युवती के ममेरे भाईयों ने एक युवक को पीट-पीटकर मार डाला था।