शारदा चिटफंड घोटाला: ED के समन पर SC ने लगाई रोक, नलिनी चिदंबरम को राहत

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शारदा चिटफंड घोटाला: ED के समन पर SC ने लगाई रोक, नलिनी चिदंबरम को राहत

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करने से मना किया। न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने ईडी से जवाब मांगते हुए मद्रास उच्च न्यायालय की पीठ द्वारा 10 जुलाई को दिए गए आदेश पर रोक भी लगा दी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नलिनी को जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए समन को निष्प्रभावी करने से मना कर दिया था।

Nalini Chidambaram Relief From Supreme Court In Sharda Chitfund Case :

नलिनी ने उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। इससे पहले, उच्च न्यायालय की एक एकल पीठ ने भी ईडी के समन के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। ईडी ने उन्हें कथित धनशोधन घोटाला मामले की जांच में गवाह के तौर पर पेश होने का निर्देश दिया था। धनशोधन के इस मामले में कई प्रमुख राजनेता संलिप्त हैं।

एजेंसी ने सात सितंबर, 2016 को नलिनी को समन जारी किया था, क्योंकि उनके नाम का जिक्र शारदा घोटाले के मास्टरमाइंड सुदीप्त सेन के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अप्रैल 2013 में लिखे पत्र में किया गया था।

दरअसल, नलिनी चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा था कि जांच के लिए महिलाओं को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत उसके निवास स्थान से बाहर नहीं बुलाया जा सकता है। लेकिन, हाईकोर्ट ने उनकी ये दलील अस्वीकार कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी छूट अनिवार्य नहीं है। ये धारा किसी भी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन इस मामले में ये छूट नहीं दी जा सकती।

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को करोड़ों रुपये के शारदा चिटफंड घोटाले में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की पत्नी नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करने से मना किया। न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने ईडी से जवाब मांगते हुए मद्रास उच्च न्यायालय की पीठ द्वारा 10 जुलाई को दिए गए आदेश पर रोक भी लगा दी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नलिनी को जांच एजेंसी द्वारा भेजे गए समन को निष्प्रभावी करने से मना कर दिया था।नलिनी ने उस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। इससे पहले, उच्च न्यायालय की एक एकल पीठ ने भी ईडी के समन के खिलाफ उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। ईडी ने उन्हें कथित धनशोधन घोटाला मामले की जांच में गवाह के तौर पर पेश होने का निर्देश दिया था। धनशोधन के इस मामले में कई प्रमुख राजनेता संलिप्त हैं।एजेंसी ने सात सितंबर, 2016 को नलिनी को समन जारी किया था, क्योंकि उनके नाम का जिक्र शारदा घोटाले के मास्टरमाइंड सुदीप्त सेन के केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अप्रैल 2013 में लिखे पत्र में किया गया था।दरअसल, नलिनी चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा था कि जांच के लिए महिलाओं को सीआरपीसी की धारा 160 के तहत उसके निवास स्थान से बाहर नहीं बुलाया जा सकता है। लेकिन, हाईकोर्ट ने उनकी ये दलील अस्वीकार कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसी छूट अनिवार्य नहीं है। ये धारा किसी भी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन इस मामले में ये छूट नहीं दी जा सकती।