गणतन्त्र दिवस पर राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से नवाजे जाएंगे ये 18 बच्चे

नई दिल्ली। आज हम आपको उन बहादुर बच्चों के बारे में बताएंगे जिंहोने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाई। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार-2017 के लिए जिन 18 बच्चों के नाम चुने गए हैं, उनमें 11 लड़के और 7 लड़कियां शामिल हैं। तीन बच्चों को उनके अप्रतिम साहस के लिए मरणोपरांत राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा।

ये बहादुर बच्चे आगामी 26 जनवरी को होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर इन्हें वीरता पुरस्कार भी प्रदान करेंगे।

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  • कर्नाटक की 14 वर्षीय नेत्रवती एम चव्हाण ने डूब रहे 2 बच्चों की जान बचाने की कोशिश के दौरान अपनी जान गंवा दी थी। इनकाे मरणोपरांत गीता चोपड़ा पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उसने 16 वर्षीय मुथु को बचा लिया, लेकिन 10 वर्षीय गणेश को बचाने के दौरान वह अपनी जान गंवा बैठी।
  • मिजोरम के 17 वर्षीय एफ लालछंदमा ने नदी में डूब रहे अपनी दोस्त को बचाने की खातिर खुद की जान गंवा दी। ललछंदमा के पिता का कहना है कि उन्हें बेटे को खोने का दुख नहीं। उनके बेटे ने वहीं किया जो परिवार ने उसे सिखाया था।
  • मणिपुर से 15 वर्षीय लौकरापाम राजेश्वरी चानू को भी मरणोपरांत सम्मानित किया जाएगा। लोकरकपाम ने एक जीर्ण पुल से इंफाल नदी में गिर रही मां और उसके बच्चे को बचाया था। इस बचाव प्रयास में राजेश्वरी खुद नदी की तेज धारा में समा गई। राजेश्वरी की जगह वीरता पुरस्कार लेने जाने वाले उसके पिता का कहना है कि क्रोधित गांववालों ने ‘अरुंग पुल’ को जला डाला पर सरकार ने अबतक नया पुल नहीं बनाया है।
  • जुए और सट्टेबाजी का अवैध धंधा करने वालों को पकडऩे में उत्तर प्रदेश पुलिस की मदद की थी। 18 वर्षीय नाजिया काे इस साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिए जाएंगे। इसने धमकियों के बावजूद बदमाशों से संघर्ष करने और दशकों के आतंक एवं शोषण काे खत्म करने के लिए सबसे प्रतिष्ठित भारत पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
  • अमृतसर के 17 वर्षीय करनबीर सिंह काे इस साल राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिए जाएंगे। करनबीर को प्रतिष्ठत संजय चोपड़ा अवार्ड दिया जा रहा है। इसने पुल तोड़कर नाले में जा गिरी स्कूली बस में फंसे 15 बच्चों की जान बचाई थी, जबकि वे खुद भी इसी बस में था और वह घायल हो चुका था, लेकिन उसने दूसरे बच्चों को पानी से भरी बस से निकलने में मदद की थी।
  • 6 साल की ममता दलाई भले ही उम्र में सबसे छोटी हो, लेकिन उसके साहस और हौसले को आज देश सलाम कर रहा है। अपनी बड़ी बहन को बचाने के लिए 6 साल की यह मासूम अकेले 5 फीट के मगरमच्छ से भिड़ गई। ममता को बापू गयाधनी अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
  • मेघालय के 14 वर्षीय बेटश्वाजॉन ने आग में घिरे छोटे भाई को बचाने के लिए बापू गयाधनी अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
  • केरल के 13 वर्षीय सेबस्टियन विन्सेट को ट्रेन की चपेट में आने वाले दोस्त को बचाने के लिए बापू गयाधनी अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
  • गुजरात की 16 वर्षीय समृद्धि शर्मा ने घर में घुस आए बदमाश का बहादुरी से मुकाबला किया। इस दौरान बदमाश ने छूरा मार समृद्धि को घायल भी कर गिया। इसके बावजूद बहादुर बिटिया बदमाश को भगाने में कामयाब हो गई।
  • छत्तीसगढ़ के रायपुर की 16 वर्षीय लक्ष्मी यादव ने खुद के यौन शोषण के प्रयास को विफल किया था।
  • उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल इलाके के 16 वर्षीय पंकज सेमवाल ने तेंदुए से अपनी मां की जान बचाई।

इसके अलावा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार पाने वाले अन्य बच्चों में मनशा (13 साल), चिंगई वांग्सा, शेंगपॉन, योकनेई (सभी नगालैंड), जोनुन्तुलंगा (16 साल, मिजोरम), एजाज अब्दुल रउफ (17 साल, महाराष्ट्र) और पंकज कुमार महंत (ओडिशा) शामिल हैं।

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