जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने इस्तीफा दिया

agrwal
जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने इस्तीफा दिया

नई दिल्ली। कर्ज में डूबी हुई एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज संकट में अब नया मोड़ आ गया है. कंपनी के चेयरमैन नरेश गोयल ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है. नरेश गोयल से चेयरमैन का पद भी छिन जाएगा। कर्जदाताओं के साथ रेजोल्यूशन प्लान के लिए सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया।

Naresh Goyal Quits From Jet Airways :

जेट एयरवेज पर 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए उसे नकदी की जरूरत है। जेट को कर्ज देने वाले बैंकों ने पिछले हफ्ते संकेत दिए थे कि जेट के मैनेजमेंट में बदलाव होने पर वो एयरलाइन में और नकदी लगा सकते हैं।

जेट ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से बयान में कहा, ‘भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में जेट के कर्जदाता डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिये कंपनी में 1,500 करोड़ रुपये डालेंगे।’ जेट ने यह भी कहा है कि कर्जदाताओं के नेतृत्व में एक अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो कंपनी के रोजाना के कामकाज और कैश फ्लो का प्रबंधन करेगी। 

जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने कंपनी के बोर्ड और प्रबंधन को अपने नियंत्रण में ले लिया है और 1.14 करोड़ शेयर जारी किए जा रहे हैं। कर्जदाता कंपनी के लिए एक नया रणनीतिक पार्टनर ढूंढने को लेकर जल्द ही एक ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि कर्जदाताओं के पास अब जेट की आधे से थोड़ी अधिक हिस्सेदारी होगा, जबकि गोयल की हिस्सेदारी 50.1 फीसदी की आधी रह जाएगी।  

आर्थिक संकट में कैसे फंसी जेट एयरवेज ?

बीते कुछ सालों में दूसरी एयरलाइन से प्रतिस्पर्धा में जेट ने किराए कम किए। लुभावने ऑफर पेश किए जबकि उतना मुनाफा नहीं हो रहा था। ब्रेंट क्रूड की कीमत में पिछले साल भारी उछाल आया। इसलिए, जेट का हवाई खर्च बढ़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया भी पिछले साल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसलिए, एयरलाइन का विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ गया। इन वजहों से जेट को 2018 की तीन तिमाही (जनवरी-मार्च, अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर) में कुल 3,620 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

गोयल ने 25 साल पहले तैयार की थी जेट एयरवेज

नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल ने फुल सर्विस एयरलाइन जेट एयरवेज की स्थापना 25 साल पहले 1993 में की थी। एतिहाद एयरवेज की जेट में 24% की हिस्सेदारी है। उसने 2013 में जेट में शेयर खरीदे थे। उस वक्त भी जेट एयरवेज आर्थिक संकट का सामना कर रही थी। एतिहाद से निवेश से उसे कर्ज से उबरने में मदद मिली थी। इस बार एतिहाद ने निवेश बढ़ाने से इनकार कर दिया। 

नई दिल्ली। कर्ज में डूबी हुई एयरलाइन कंपनी जेट एयरवेज संकट में अब नया मोड़ आ गया है. कंपनी के चेयरमैन नरेश गोयल ने अपने पद से इस्‍तीफा दे दिया है. नरेश गोयल से चेयरमैन का पद भी छिन जाएगा। कर्जदाताओं के साथ रेजोल्यूशन प्लान के लिए सोमवार को हुई बोर्ड बैठक में यह फैसला लिया गया।

जेट एयरवेज पर 8000 करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज है। एयरलाइन को दिवालिया होने से बचाने के लिए उसे नकदी की जरूरत है। जेट को कर्ज देने वाले बैंकों ने पिछले हफ्ते संकेत दिए थे कि जेट के मैनेजमेंट में बदलाव होने पर वो एयरलाइन में और नकदी लगा सकते हैं।

जेट ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज से बयान में कहा, 'भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व में जेट के कर्जदाता डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिये कंपनी में 1,500 करोड़ रुपये डालेंगे।' जेट ने यह भी कहा है कि कर्जदाताओं के नेतृत्व में एक अंतरिम मैनेजमेंट कमेटी का गठन कर दिया गया है, जो कंपनी के रोजाना के कामकाज और कैश फ्लो का प्रबंधन करेगी। 

जेट एयरवेज के कर्जदाताओं ने कंपनी के बोर्ड और प्रबंधन को अपने नियंत्रण में ले लिया है और 1.14 करोड़ शेयर जारी किए जा रहे हैं। कर्जदाता कंपनी के लिए एक नया रणनीतिक पार्टनर ढूंढने को लेकर जल्द ही एक ऑक्शन की प्रक्रिया शुरू करेंगे। मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि कर्जदाताओं के पास अब जेट की आधे से थोड़ी अधिक हिस्सेदारी होगा, जबकि गोयल की हिस्सेदारी 50.1 फीसदी की आधी रह जाएगी।  

आर्थिक संकट में कैसे फंसी जेट एयरवेज ?

बीते कुछ सालों में दूसरी एयरलाइन से प्रतिस्पर्धा में जेट ने किराए कम किए। लुभावने ऑफर पेश किए जबकि उतना मुनाफा नहीं हो रहा था। ब्रेंट क्रूड की कीमत में पिछले साल भारी उछाल आया। इसलिए, जेट का हवाई खर्च बढ़ा। डॉलर के मुकाबले रुपया भी पिछले साल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसलिए, एयरलाइन का विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ गया। इन वजहों से जेट को 2018 की तीन तिमाही (जनवरी-मार्च, अप्रैल-जून, जुलाई-सितंबर) में कुल 3,620 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

गोयल ने 25 साल पहले तैयार की थी जेट एयरवेज

नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल ने फुल सर्विस एयरलाइन जेट एयरवेज की स्थापना 25 साल पहले 1993 में की थी। एतिहाद एयरवेज की जेट में 24% की हिस्सेदारी है। उसने 2013 में जेट में शेयर खरीदे थे। उस वक्त भी जेट एयरवेज आर्थिक संकट का सामना कर रही थी। एतिहाद से निवेश से उसे कर्ज से उबरने में मदद मिली थी। इस बार एतिहाद ने निवेश बढ़ाने से इनकार कर दिया।