मायावती ने मुसलमानों को गद्दार कहा और गाली दी: नसीमुद्दीन

लखनऊ। बसपा से निकाले जा चुके नसीमुद्दीन सि​द्दीकी ने गुरुवार को की अपनी प्रेस कांफ्रेन्स अपने ऊपर लगे आरोपों की सफाई देने से ज्यादा पार्टी सुप्रीमो मायावती और उनके करीबियों पर जमकर निशाना साधा। नसीमुद्दीन ने कहा कि जिस तरह से मुझे बुलाकर बेज्जत किया गया उसे वह बयां नहीं कर सकते। मायावती ने अपनी हार के लिए मुसलमानों को जिम्मेदार करार देते हुए सारे मुसलमानों को गद्दार और दाढ़ी वाले मुसलमानों के लिए गाली का प्रयोग किया।




नसीमुद्दीन ने कहा कि कुछ दिन पहले ही मायावती ने उन्हें बुलाया था। उनसे पूछा गया कि आखिर मुसलमानों ने बसपा को वोट क्यों नहीं दिया? जिसके जवाब में नसीमुद्दीन ने मायवती को बताया कि कांग्रेस और सपा के गठबंधन का असर मुस्लिम वोटरों पर पड़ा जिस वजह से बसपा को मिलने वाले वोटों में कुछ कमी आई। ये बात सुनकर मायावती भड़क गईं और सपा और कांग्रेस के साथ पूर्व में किए अपने गठबंधन का हवाला देते हुए कहने लगीं कि हमें तो कभी गठबंधन में मुस्लिम वोटों का फायदा नहीं मिला तो नुकसान की बात कैसे मान ली जाए। इसके बाद मायावती ने मु​सलमानों को गद्दार और उनके पास आने वाले दाढ़ी वाले मुसलमानों को गाली दे डाली।



नसीमुद्दीन का कहना है कि उन्होंने पार्टी का मुस्लिम नेता होने के बावजूद कभी किसी मौलाना को मायावती से नहीं मिलवाया। ​जितने भी मौलाना पार्टी कार्यालय गए या मायावती से मिले सभी को सतीश चन्द्र मिश्रा लाए थे। जिसके बाद मायावती के तेवर कुछ कम हुए लेकिन उन्होंने पा​सी, धोबी और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को धोखेबाज कहना शुरू कर दिया।



नसीमुद्दीन कहते हैं कि जब मायावती ने ये सब कहा तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि यह वोटर का अधिकार है कि वह वोट किसे देता है। हम केवल कह सकते हैं अपनी बात लोगों के सामने रख सकते हैं। अगर वह वा​स्तविकता में हार के कारणों को जानना चाहती हैं। तो वह उसे भी स्पष्ट कर सकते हैं। मायावती के पूछे जाने पर नसीमुद्दीन ने उन्हें बताया कि आपका लोगों से न मिलना। पार्टी के कार्यकर्ताओं से दूरी बनाकर रखना। चुनाव के दौरान आपकी मात्र 55 जनसभाओं का होना। जनसभाओं में पार्टी के प्रत्याशियों का नाम तक न लेना ऐसे कई कारण हैं। जिनकी वजह से पार्टी अपने वोटर तक अपनी बात सही से नहीं पहुंचा पाई। जिसके बाद मायावती ने भड़कते हुए जवाब दिया कि तो वह क्या चाहते हैं? क्या वह अपनी जान देदें।

नसीमुद्दीन ने बताया कि जब मायावती ने मुसलमानों और मौलानाओं को गाली दी तो उन्होंने अपनी कौम का हवाला देते हुए विरोध भी दर्ज करवाया। एकबार उनके मन में पार्टी छोड़ने की बात भी आई लेकिन वह बतौर कार्यकर्ता अपने संघर्ष को याद रखते हुए ऐसा नहीं कर सके।