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राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2019: बच्चों के पोषण में आ रही कमी, अब सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के साथ मिलेगा सुबह का नाश्ता

National Education Policy 2019 Students Can Get Breakfast Like Mid Day Meal

By आस्था सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं और उनके अभिवावकों के लिए एक बेहद अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल बच्चों में पोषण की बढ़ती कमी को देखते हुए मिड-डे मील योजना की तर्ज पर ही अब सुबह के पौष्टिक नाश्ते की योजना भी जल्द शुरू हो सकती है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। वहीं, अब नई शिक्षा नीति के मसौदे में भी सुबह के पौष्टिक नासते की गुजारिश की गई है।

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मिली जानकारी के मुताबिक जल्द ही यानि आने वाले दिनों में 12 लाख प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में जहां मध्याह्न भोजन योजना चल रही है वहां बच्चों के लिए सुबह के नाश्ते की योजना भी शुरू हो सकती है। जिसका सीधा लाभ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 12 करोड़ बच्चों को मिलेगा। दरअसल, बीते दो दिन पहले ही इसरो के पूर्व चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने नई सरकार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा सौंपा है। जिसमें प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए तमाम बदलावों की सिफारिश की गई है।

विकसित दिमाग के लिए पौष्टिक नाश्ता है जरूरी…

समिति का कहना है कि अगर बच्चों को सुबह पौष्टिक नाश्ता मिलता है तो ऐसे में उनके सीखने और समझने की शक्ति में काफी सुधार होगा, इसलिए मध्याह्न भोजन योजना के साथ ही बच्चों को स्कूलों में सुबह का पौष्टिक नाश्ता भी दिया जाना चाहिए।

सुबह के नाश्ते में मिल सकती है ये चीजें

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सुबह के नाश्ते में बच्चों के लिए दूध व फल उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।

इन चीजों की सुधार के लिए मिले हैं सुझाव-

  • तीन से छह साल के बीच की शिक्षा प्रणाली को विनियमित किया जाए तथा उसके लिए मानक और पाठ्यक्रम तय किया जाए।
  • नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का दायरा तीन वर्ष से 18 वर्ष तक के बच्चों के लिए किया जाए जो अभी 6-14 वर्ष का है।
  • शिक्षकों के प्रशिक्षण में सुधार किया जाए। खासकर प्राइमरी पूर्व शिक्षा का प्रशिक्षण उन्हें प्रदान किया जाए ताकि बच्चे पहली कक्षा तक पहुंचने तक पूर्ण रुप से औपचारिक शिक्षा को तैयार हो सकें
  • पांचवी तक की कक्षाओं में भाषा एवं गणित पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाए। भाषा और गणित सप्ताहों और मेलों का आयोजन किया जाए।
  • महिला शिक्षकों की नियुक्ति की जाए तथा मातृभाषा में शिक्षण को बढ़ावा दिया जाए।
  • मसौदे में कहा गया है कि शिक्षकों की चयन प्रक्रिया गलत होने के कारण विषय के शिक्षकों की भारी कमी है। हिन्दी का शिक्षक स्कूलों में गणित पढ़ा रहा है तथा विज्ञान का शिक्षक इतिहास पढ़ा रहा है।

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