गौरी लंकेश की हत्या के पीछे कहीं नक्सलियों का हाथ तो नहीं, जाने क्यों…

बेंगलुरु। महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या को 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस-प्रशासन धूल फांक रही है। हत्या के पीछे की गुत्थी सुलझने के बजाय उलझती ही चली जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों पर भी जमकर कायसबाजी चल रही है। इस मामले में जितनी मुंह उतनी बातें सुनने को मिल रही हैं। किसी का मानना है कि हिंदुवादी व संघ के खिलाफ कलम चलाना ही इस महिला पत्रकार के मौत का कारण बना। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि इस महिला पत्रकार के टारगेट पर कुछ रसूखदार नेता थे और उनका पर्दाफाश करने जा रही थी जिस वजह से हत्या कर इस आवाज़ को ही बंद कर दिया गया। बताते चले कि यह महिला पत्रकार धारा के विपरीत चल कर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती थी। खैर जो भी हो लेकिन हत्या के पीछे की असली वजह का सामने आना अभी भी बाकी है।

इस बीच, एक खुलासा ऐसा हुआ है, जिसके बाद आशंका जताई जा रही है कि कहीं लंकेश की हत्या के पीछे नक्सलियों का हाथ तो नहीं। लंकेश के भाई इंद्रजीत ने एक टीवी चैनल पर खुलासा किया है कि उनकी बहन को नक्सलियों से धमकी मिल रही थी। यह बात उन्होंने अपने परिवार से भी छुपाए रखी। जानकारी के मुताबिक, लंकेश उस लोगों में शामिल थीं, जो नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने की कोशिश कर रही थीं। उन्होंने कुछ नक्सलियों को पुलिस के सामने सरेंडर भी करवाया था। इसके बाद से उन्हें धमकियां मिलना शुरू हो गई थीं। ये धमकियां पत्रों और ईमेल के जरिए दी जा रही थीं।

सीएम बोले- हमे भी नहीं बताया

हत्याकांड की जांच में जुटी पुलिस भी अब नक्सलियों वाले एंगल से भी जांच में जुट गई है। यह जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि हाल ही में लंकेश उनसे मिली थीं और दोनों के बीच दो घंटे तक बात हुई थी, लेकिन तब भी महिला पत्रकार ने किसी तरह की धमकियों का जिक्र नहीं किया था।

सीसीटीवी फुटेज से भी नहीं हुआ स्पष्ट

पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही हैं, जिनमें दिखाई दे रहा है कि हेलमेट पहन कर आए बाइक सवारों ने लंकेश पर गोलियां जलाईं। हालांकि पुलिस को अब तक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है।

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