प्रकृति हमारी आराध्य है, प्रकृति हमारा आभूषण- मोदी

narendra modi
प्रकृति हमारी आराध्य है, प्रकृति हमारा आभूषण- मोदी

नई दिल्‍ली। अपना 69वां जन्‍मदिन मना रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज गुजरात में हैं। पीएम ने नमामि देवी नर्मदे महोत्सव में सरदार सरोवर बांध पर मां नर्मदा की पूजा करके जन्‍मदिन मनाया। पीएम ने नर्मदा जिले के केवड़िया में सरदार सरोवर बांध तथा स्टैचू ऑफ यूनिटी के पास चल रहीं विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी किया। इसके बाद प्रधानमंत्री केवड़िया में बांध स्थल पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं।

Nature Is Our Adorable Nature Is Our Jewel Modi :

नमामि देवी नर्मदे महोत्सव में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “आज के दिन मां नर्मदा के दर्शन मिलना, पूजा-अर्चना करना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है”। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारे लिए आराध्य है, प्रकृति हमारा आभूषण है। पर्यावरण को संरक्षित करते हुए कैसे विकास किया जा सकता है, इसका जीवंत उदाहरण केवड़िया में देखने को मिल रहा है।

पीएम ने कहा कि एक तरफ सरदार सरोवर बांध है, बिजली बनाने के यंत्र हैं तो दूसरी तरफ एकता नर्सरी, बटर-फ्लाई गार्डन जैसी इको-टूरिज्म से जुड़ी बहुत ही सुंदर व्यवस्थाएं हैं। इन सबके बीच सरदार पटेल जी की भव्य प्रतिमा हमें आशीर्वाद देती नजर आती है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज ही निर्माण और सृजन के देव विश्वकर्मा जी की जयंती भी है। नए भारत के निर्माण के जिस संकल्प को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसमें भगवान विश्वकर्मा जैसी सृजनशीलता और बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की इच्छाशक्ति बहुत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो सरदार सरोवर बाँध और सरदार साहब की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, दोनों ही उस इच्छाशक्ति, उस संकल्पशक्ति के प्रतीक हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि उनकी प्रेरणा से हम नए भारत से जुड़े हर संकल्प को सिद्ध करेंगे, हर लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। हमने पहली बार सरदार सरोवर बाँध को पूरा भरा देखा है। एक समय था जब 122 मीटर के लक्ष्य तक पहुंचना ही बड़ी बात थी। लेकिन आज 5 वर्ष के भीतर-भीतर 138 मीटर तक सरदार सरोवर का भर जाना, अविस्मरणीय है। पीएम ने ​कहा कि केवड़िया में आज जितना उत्साह है, उतना ही पूरे गुजरात में है। आज तालाबों, झीलों, नदियों की साफ-सफाई का काम किया जा रहा है।

पीएम ने कहा कि आपने जब मुझे गुजरात का दायित्व दिया, तब हमारे सामने दोहरी चुनौती थी। सिंचाई के लिए, पीने के लिए, बिजली के लिए, डैम के काम को तेज करना था, दूसरी तरफ नर्मदा कैनाल के नेटवर्क को और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ाना था। लेकिन गुजरात के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और आज सिंचाई की योजनाओं का एक व्यापक नेटवर्क गुजरात में खड़ा हो गया है। बीते 17-18 सालों में लगभग दोगुनी जमीन को सिंचाई के दायरे में लाया गया है। माइक्रो इरिगेशन का दायरा साल 2001 में सिर्फ 14 हज़ार हेक्टेयर था और 8 हज़ार किसान परिवारों को ही इसका लाभ मिल पा रहा था। आज 19 लाख हेक्टेयर जमीन माइक्रो इरीगेशन के दायरे में है और करीब 12 लाख किसान परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है।

पीएम ने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद के शोध में सामने आया है कि माइक्रो इरिगेशन के कारण ही गुजरात में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई है, 25 प्रतिशत तक फर्टिलाइजर का उपयोग कम हुआ, 40 प्रतिशत तक लेबर कॉस्ट कम हुई है। वहीं नल से जल का दायरा भी बीते दो दशकों में करीब 3 गुना बढ़ा है। साल 2001 में गुजरात के सिर्फ 26 प्रतिशत घरों में नल से जल आता था। आज आप सभी के प्रयासों का असर है, गुजरात की योजनाओं का प्रभाव है कि राज्य के 78 (अठहत्तर) प्रतिशत घरों में नल से पानी आता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं गुजरात सरकार को, पहले आनंदीबेन की अगुवाई में और अब रुपाणी जी के नेतृत्व में, हर घर को, हर खेत को जल से जोड़ने के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। सिंचाई की सुविधा मिलने के पहले किसान सिर्फ पारंपरिक फसलें ही उगाते थे। लेकिन सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद नकदी फसलों की पैदावार शुरु हुई, हॉर्टिकल्चर की तरफ झुकाव बढ़ा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के किसानों, व्यापारियों और दूसरे नागरिकों के लिए पानी के माध्यम से ट्रांसपोर्ट की भी एक व्यापक व्यवस्था तैयार की जा रही है। घोघा-दहेज रो-रो फेरी सेवा की शुरुआत तो मैंने खुद की थी। मुझे बताया गया है कि अब तक इस फेरी सुविधा का सवा तीन लाख से ज्यादा यात्री उपयोग कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन सरदार पटेल और भारत की एकता के लिए किए गए उनके प्रयासों का स्वर्णिम पृष्ठ है। आज हैदराबाद मुक्ति दिवस भी है। आज के ही दिन 1948 में हैदराबाद का विलय भारत में हुआ था। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सरदार के सपने को आज देश साकार होते हुए देख रहा है।

पीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग बीते 70 साल से भेदभाव का सामना कर रहे थे। इसका दुष्परिणाम, हिंसा और अलगाव के रूप में, अधूरी आशाओं और आकांक्षाओं के रूप में पूरे देश ने भुगता है।

उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू कश्मीर के, लद्दाख और कारगिल के लाखों साथियों के सक्रिय सहयोग से हम विकास और विश्वास की नई धारा बहाने में सफल होंगे।

नई दिल्‍ली। अपना 69वां जन्‍मदिन मना रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज गुजरात में हैं। पीएम ने नमामि देवी नर्मदे महोत्सव में सरदार सरोवर बांध पर मां नर्मदा की पूजा करके जन्‍मदिन मनाया। पीएम ने नर्मदा जिले के केवड़िया में सरदार सरोवर बांध तथा स्टैचू ऑफ यूनिटी के पास चल रहीं विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी किया। इसके बाद प्रधानमंत्री केवड़िया में बांध स्थल पर आयोजित एक जनसभा को संबोधित कर रहे हैं। नमामि देवी नर्मदे महोत्सव में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “आज के दिन मां नर्मदा के दर्शन मिलना, पूजा-अर्चना करना, मेरे लिए सौभाग्य की बात है”। उन्होंने कहा कि प्रकृति हमारे लिए आराध्य है, प्रकृति हमारा आभूषण है। पर्यावरण को संरक्षित करते हुए कैसे विकास किया जा सकता है, इसका जीवंत उदाहरण केवड़िया में देखने को मिल रहा है। पीएम ने कहा कि एक तरफ सरदार सरोवर बांध है, बिजली बनाने के यंत्र हैं तो दूसरी तरफ एकता नर्सरी, बटर-फ्लाई गार्डन जैसी इको-टूरिज्म से जुड़ी बहुत ही सुंदर व्यवस्थाएं हैं। इन सबके बीच सरदार पटेल जी की भव्य प्रतिमा हमें आशीर्वाद देती नजर आती है। पीएम मोदी ने कहा कि आज ही निर्माण और सृजन के देव विश्वकर्मा जी की जयंती भी है। नए भारत के निर्माण के जिस संकल्प को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसमें भगवान विश्वकर्मा जैसी सृजनशीलता और बड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने की इच्छाशक्ति बहुत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो सरदार सरोवर बाँध और सरदार साहब की दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, दोनों ही उस इच्छाशक्ति, उस संकल्पशक्ति के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे विश्वास है कि उनकी प्रेरणा से हम नए भारत से जुड़े हर संकल्प को सिद्ध करेंगे, हर लक्ष्य को प्राप्त करेंगे। हमने पहली बार सरदार सरोवर बाँध को पूरा भरा देखा है। एक समय था जब 122 मीटर के लक्ष्य तक पहुंचना ही बड़ी बात थी। लेकिन आज 5 वर्ष के भीतर-भीतर 138 मीटर तक सरदार सरोवर का भर जाना, अविस्मरणीय है। पीएम ने ​कहा कि केवड़िया में आज जितना उत्साह है, उतना ही पूरे गुजरात में है। आज तालाबों, झीलों, नदियों की साफ-सफाई का काम किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि आपने जब मुझे गुजरात का दायित्व दिया, तब हमारे सामने दोहरी चुनौती थी। सिंचाई के लिए, पीने के लिए, बिजली के लिए, डैम के काम को तेज करना था, दूसरी तरफ नर्मदा कैनाल के नेटवर्क को और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ाना था। लेकिन गुजरात के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और आज सिंचाई की योजनाओं का एक व्यापक नेटवर्क गुजरात में खड़ा हो गया है। बीते 17-18 सालों में लगभग दोगुनी जमीन को सिंचाई के दायरे में लाया गया है। माइक्रो इरिगेशन का दायरा साल 2001 में सिर्फ 14 हज़ार हेक्टेयर था और 8 हज़ार किसान परिवारों को ही इसका लाभ मिल पा रहा था। आज 19 लाख हेक्टेयर जमीन माइक्रो इरीगेशन के दायरे में है और करीब 12 लाख किसान परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। पीएम ने कहा कि आईआईएम अहमदाबाद के शोध में सामने आया है कि माइक्रो इरिगेशन के कारण ही गुजरात में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई है, 25 प्रतिशत तक फर्टिलाइजर का उपयोग कम हुआ, 40 प्रतिशत तक लेबर कॉस्ट कम हुई है। वहीं नल से जल का दायरा भी बीते दो दशकों में करीब 3 गुना बढ़ा है। साल 2001 में गुजरात के सिर्फ 26 प्रतिशत घरों में नल से जल आता था। आज आप सभी के प्रयासों का असर है, गुजरात की योजनाओं का प्रभाव है कि राज्य के 78 (अठहत्तर) प्रतिशत घरों में नल से पानी आता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं गुजरात सरकार को, पहले आनंदीबेन की अगुवाई में और अब रुपाणी जी के नेतृत्व में, हर घर को, हर खेत को जल से जोड़ने के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। सिंचाई की सुविधा मिलने के पहले किसान सिर्फ पारंपरिक फसलें ही उगाते थे। लेकिन सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद नकदी फसलों की पैदावार शुरु हुई, हॉर्टिकल्चर की तरफ झुकाव बढ़ा। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के किसानों, व्यापारियों और दूसरे नागरिकों के लिए पानी के माध्यम से ट्रांसपोर्ट की भी एक व्यापक व्यवस्था तैयार की जा रही है। घोघा-दहेज रो-रो फेरी सेवा की शुरुआत तो मैंने खुद की थी। मुझे बताया गया है कि अब तक इस फेरी सुविधा का सवा तीन लाख से ज्यादा यात्री उपयोग कर चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह दिन सरदार पटेल और भारत की एकता के लिए किए गए उनके प्रयासों का स्वर्णिम पृष्ठ है। आज हैदराबाद मुक्ति दिवस भी है। आज के ही दिन 1948 में हैदराबाद का विलय भारत में हुआ था। एक भारत, श्रेष्ठ भारत के सरदार के सपने को आज देश साकार होते हुए देख रहा है। पीएम ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोग बीते 70 साल से भेदभाव का सामना कर रहे थे। इसका दुष्परिणाम, हिंसा और अलगाव के रूप में, अधूरी आशाओं और आकांक्षाओं के रूप में पूरे देश ने भुगता है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि जम्मू कश्मीर के, लद्दाख और कारगिल के लाखों साथियों के सक्रिय सहयोग से हम विकास और विश्वास की नई धारा बहाने में सफल होंगे।