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नवरात्रि 2019: नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की आराधना

Navratri 2019 Maa Brahmacharini Pujan Vidhi

By आस्था सिंह 
Updated Date

लखनऊ। आज चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन है और इस दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधि विधान है। माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप उनके नाम अनुसार ही तपस्विनी है। देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों और सिद्धों को अकाट्य फल देने वाला है। आज हम आपको माँ ब्रह्मचारिणी की पूजन विधि और इनके नाम से जुड़ी खुछ खास बाते बताने जा रहे हैं।

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कैसे पड़ा माँ ब्रह्मचारिणी का नाम

मां दुर्गा के नौ रूपों में मां ब्रह्मचारिणी का भी नाम आता है। मां ब्रह्मचारिणी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इसी कारण ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। कहा जाता है कि ब्रह्मचारिणी देवी, ज्ञान, वैराग्य, और ध्यान की देवी हैं। इनकी पूजा से विद्या के साथ साथ ताप, त्याग, और वैराग्य की प्राप्ति होती है। जब मानसपुत्रों से सृष्टि का विस्तार नहीं हो पाया था तो ब्रह्मा की यही शक्ति स्कंदमाता के रूप में आयी। स्त्री को इसी कारण सृष्टि का कारक माना जाता है। माँ ब्रह्मचारिणी की कृपा से मनुष्य को सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

माँ ब्रह्मचारिणी की पूजन विधि-

  • सर्वप्रथम हमने जिन देवी-देवताओ एवं गणों व योगिनियों को कलश में आमत्रित किया है उनकी फूल, अक्षत, रोली, चंदन, से पूजा करते हैं।
  • उन्हें दूध, दही,शक्कर, घी, व शहद से स्नान करायें व देवी को जो कुछ भी प्रसाद अर्पित कर रहे हैं उसमें से एक अंश इन्हें भी अर्पण करते हैं।  
  • प्रसाद के पश्चात आचमन और फिर पान, सुपारी भेंट कर इनकी प्रदक्षिणा करते हैं।  
  • उसके पश्चात घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करते हैं।
  • कलश देवता की पूजा के पश्चात इसी प्रकार नवग्रह, दशदिक्पाल, नगर देवता, ग्राम देवता, की पूजा करते हैं।
  • इनकी पूजा के पश्चात मॉ ब्रह्मचारिणी की करते हैं।
  • माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय अपने हाथों में एक पुष्प लेकर माँ भगवती की ऊपर लिखे मंत्र के साथ प्रार्थना करते हैं।
  • अब माँ को पंचामृत स्नान करते हैं और फिर भांति भांति से फूल, अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें देवी को अरूहूल का फूल या लाल रंग का एक विशेष फूल और कमल की माला पहनाये क्योंकि माँ को काफी पसंद है।
  • अंत में इस मंत्र के साथ “आवाहनं न जानामि न जानामि वसर्जनं, पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वरी..माँ ब्रम्ह्चारिणी से क्षमा प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए।

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