नवरात्रि 2019: कल है अष्टमी, भूलकर भी न करें ये गलतियां

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लखनऊ। मां दुर्गा की पूजा उपासना के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है और कन्या पूजन भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अष्टमी को कन्या पूजन पर विशेष लाभ होता है। माना जाता है कि जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें अष्टमी को कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। बता दें कि इस बार नवरात्रि अष्टमी या दुर्गा अष्टमी 6 अक्टूबर को है।

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अष्टमी के दिन भूल से भी न करें ये काम

  • अष्टमी के पूजा का नवरात्रि में बहुत महत्व है लेकिन शुभ मुहूर्त निकलने के बाद पूजा न करें।
  • संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। संधि काल के समय 108 दीपक जलाए जाते हैं, अष्टमी के दिन संधि काल में ही दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  • विष्णु पुराण के अनुसार, अष्टमी पर पूजा के बाद दिन में नहीं सोना चाहिए।
  • दुर्गा चालीसा, मंत्र या सप्तशती के पाठ के समय किसी दूसरे से बात न करने लग जाएं, ऐसा करने से आपकी पूजा का फल नकारात्मक शक्तियां ले जाती हैं।
  • अखंड ज्योति जला रहे हैं तो घर को खाली छोड़कर कहीं न जाएं।
  • हवन कर रहेंं है तो ध्यान रखें की इसकी सामग्री कुंड से बाहर न जाए।
  • अष्टमी के दिन अगर व्रत नहीं भी कर रहे हैं तो सुबह-सुबह स्नान कर मां दुर्गा की पूजा करें।
    इस दिन नाखून न काटें।
  • अष्टमी के दिन फलाहार हमेशा एक ही जगह पर बैठकर ग्रहण करना चाहिए।
  • अष्टमी के दिन तम्बाकू खाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है।
लखनऊ। मां दुर्गा की पूजा उपासना के नौ दिवसीय पर्व नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों मां दुर्गा के अलग-अलग नौ रूपों की पूजा की जाती है और कन्या पूजन भी किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अष्टमी को कन्या पूजन पर विशेष लाभ होता है। माना जाता है कि जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें अष्टमी को कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। बता दें कि इस बार नवरात्रि अष्टमी या दुर्गा अष्टमी 6 अक्टूबर को है। अष्टमी के दिन भूल से भी न करें ये काम
  • अष्टमी के पूजा का नवरात्रि में बहुत महत्व है लेकिन शुभ मुहूर्त निकलने के बाद पूजा न करें।
  • संधि काल का समय दुर्गा पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। संधि काल के समय 108 दीपक जलाए जाते हैं, अष्टमी के दिन संधि काल में ही दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
  • विष्णु पुराण के अनुसार, अष्टमी पर पूजा के बाद दिन में नहीं सोना चाहिए।
  • दुर्गा चालीसा, मंत्र या सप्तशती के पाठ के समय किसी दूसरे से बात न करने लग जाएं, ऐसा करने से आपकी पूजा का फल नकारात्मक शक्तियां ले जाती हैं।
  • अखंड ज्योति जला रहे हैं तो घर को खाली छोड़कर कहीं न जाएं।
  • हवन कर रहेंं है तो ध्यान रखें की इसकी सामग्री कुंड से बाहर न जाए।
  • अष्टमी के दिन अगर व्रत नहीं भी कर रहे हैं तो सुबह-सुबह स्नान कर मां दुर्गा की पूजा करें। इस दिन नाखून न काटें।
  • अष्टमी के दिन फलाहार हमेशा एक ही जगह पर बैठकर ग्रहण करना चाहिए।
  • अष्टमी के दिन तम्बाकू खाने और शारीरिक संबंध बनाने से भी व्रत का फल नहीं मिलता है।