पनामा लीक में बेटों और बेटी के फंसने के बाद पीएम नवाज ने दिखाए तेवर, नहीं देंगे इस्तीफा

नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के दोनों बेटों और बेटी के खिलाफ पनामा पेपर लीक मामले में पुख्ता सुबूत मिलने के बाद पाकिस्तान में सियासी संकट उभरता दिख रहा है। छह सदस्यीय संयुक्त जांच दल (जेआईटी) ने इस मामले में तैयार की गई रिपोर्ट को अदालत के सामने पेश कर दिया है। अपने ऊपर बढ़ते हुए दबाव के बीच शरीफ ने अपना आस्ट्रेलिया दौरा रद्द करते हुए गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल की आकस्मिक बैठक बुलाई। बैठक में अपने मंत्रिमंडल को विश्वास में लेने के बाद शरीफ ने किसी भी दबाव में इस्तीफा देने से इंकार करते हुए जेआईटी की रिर्पोट को झूठ का पुलिंदा करार दिया है।

मिली जानकारी के मुताबिक अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ उनके बेटे हसन और हुसैन शरीफ और बेटी मरियम शरीफ के खिलाफ पकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही कानून के तहत भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है। इस रिपोर्ट में शामिल कुछ साक्ष्यों के पाकिस्तानी मीडिया के माध्यम से लीक होने के बाद नवाज शरीफ पर इस्तीफे का दबाव बनाया जा रहा है।

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माना जा रहा है कि अगर अदालत ने जेआईटी की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई की तो उस दशा में नवाज शरीफ को अपना पद छोड़ना पड़ेगा या अदालत उन्हें बतौर प्रधानमंत्री मिले अधिकारों अप्रभावी कर देगी। सियासी संकट की स्थिति में सत्ता पाकिस्तानी सेना के हाथ में होगी।

नवाज शरीफ के हटने से भारत को होगा नुकसान—

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​अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकारों की माने तो नवाज शरीफ का पद से हटना भारत के लिए कई मायनों में नुकसान देय होगा। सत्ता सेना के हाथों में जाने की स्थिति में पाकिस्तान की ओर से भारत में होने वाला आतंकी घुसपैठ बढ़ जाएगा। भारत में पहले से मौजूद पाकिस्तान पोषित आतंकियों की सक्रियता बढ़ेगी। ​जिसके उदाहरण के रूप में हम जनरल परवेश मुशर्रफ के कार्यकाल को ले सकते हैं।

नवाज शरीफ को होगा फायदा —

पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति पर नजर रखने वाले भारतीय पत्रकारों की माने तो नवाज शरीफ को भ्रष्टाचार के मामले में फंसने के बाद अगर कुर्सी छोड़नी पड़ी तो उन्हें जनता के बीच सहानुभूति मिलेगी। शरीफ अभी भी पाकिस्तान में लोकप्रिय है और सत्ता सेना के हाथ में आने से शरीफ की पार्टी को मजबूती मिलेगी।

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पाकिस्तानी मीडिया में चर्चा है कि अगर परिस्थितिवश नवाज शरीफ को इस्तीफा देना भी पड़ा तो वे अपने भाई को उत्तराधिकारी घोषित कर सकते हैं। इसे लेकर गुरुवार को बुलाई मंत्रिमंडल की आकस्मिक बैठक में नवाज शरीफ ने अपने सहयोगियों को विश्वास में ले लिया है।