जेपी इंफ्राटेक का निकला दिवाला, कर्ज चुकाने के लिए मिला 9 महीने का समय

जेपी इंफ्राटेक का निकला दिवाला, कर्ज चुकाने के लिए मिला 9 महीने का समय

इलाहाबाद। पिछले पांच सालों से बुरे दौर से गुजर रहे जेपी समूह की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं। कर्ज में डूबी जेपी समूह की बड़ी कंपनी जेपी इंफ्राटेक (Jaypee Infratech) को दिवालिया कंपनियों की श्रेणी में डाल दिया गया है। जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ यह कार्रवाई आईडीबीआई बैंक की ओर से नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की इलाहाबाद ब्रांच के समक्ष दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के बाद की गई है। अदालत के फैसले के बाद जेपी इंफ्राटेक के अलग—अलग प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाले ग्राहकों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं।

मिली जानकारी के मुताबिक एनसीएलटी ने जेपी इंफ्राटेक के डॉयरेक्टर्स को कर्जा चुकाने के लिए 270 दिनों यानी नौ महीनों का समय दिया है। इस दौरान कंपनी के डॉयरेक्टर्स निलंबित रहेंगे। कंपनी की संपत्तियों की कीमतों का आंकलन करने के लिए 7 सरकारी अकाउंट एजेंसियों में से किसी एक कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इन्हीं अकाउंट एजेंसियों के ही किसी अधिकारी को कंपनी का डायरेक्टर नियुक्त किया जाएगा। जिसे कं​पनियों की संपत्तियों का मूल्यांकन कर यह नीलामी की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना होगा।

बताया जा रहा है कि जेपी इंफ्राटेक पर 8,365 करोड़ का कर्जा है। जिसमें सबसे ज्यादा रकम आईडीबीआई बैंक से ली गई है। अदालत ने जेपी इंफ्राटेक को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 270 दिनों में अगर कंपनी की हालत नहीं सुधरी तो अंतिम विकल्प के रूप में कंपनी की संपत्तियों की नीलामी करके बैंकों के कर्ज को बसूल किया जाएगा।

जेपी इंफ्राटेक वर्तमान केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ही 32,000 फ्लैट्स बना रही है। इसके अलावा कंपनी के कुछ हाउसिंग प्रोजेक्टस अलीगढ़ और आगरा में भी चल रहे हैं। इन तमाम परियोजनाओं में हजारों ग्राहकों ने बुकिंग करवा रखी है। अगर कंपनी की संपत्तियां नीलाम होती हैं तो परिस्थिति में कंपनी के ग्राहकों का क्या होगा यह अहम सवाल उठ खड़ा हुआ है।

आपको बता दें कि जेपी इंफ्राटेक के डॉयरेक्ट मनोज गौड हैं। जेपी इंफ्राटेक का 71.64 प्रतिशत स्वामित्व जेपी एसोसिएट्स के पास है। मनोज गौड़ जेपी ग्रुप के संस्थापक जय प्रकाश गौड़ के बेटे हैं।