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NCRB का खुलासा महिलाओं के खिलाफ अपराध में यूपी सबसे आगे

Ncrb Reveals Up In Crime Against Women

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: भारत में महिलाओं पर होने वाले शारीरिक और मानसिक शोषण के हत्या और बलात्कार जैसे मामलों में किसी एक स्थान, व्यक्ति, संगठन, क्षेत्र, जाति, धर्म और संस्कृति विशेष को दोष देना ठीक नहीं होगा। हर देशवासी को दलगत, जातिगत, क्षेत्रगत, धार्मिक और सामाजिक बोध की संकुचित भावना से ऊपर उठ कर राष्ट्रहित में यह स्वीकार करना होगा कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में हम और हमारा समाज घोर असंवेदनशीलता का शिकार हो चुके हैं। इसकी वजह से आज देश का कोई भी राज्य ऐसा नहीं रह गया है जहां महिलायें और बच्चियां खुद को सुरक्षित समझ सकें।

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ये बात हम और आप नहीं भारत सरकार का वह संस्थान कह रहा है जिसे सरकार ने देश भर में होने वाले तरह तरह के अपराधों का रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी सौंपी है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो नामक इस संस्थान ने विगत मंगलवार 6 अक्टूबर को जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में यह साफ़ तौर पर कहा है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों में हम न केवल आगे हैं बल्कि तकलीफदेह बात यह भी है कि हमारे देश में हर सोलहवें मिनट में एक महिला बलात्कार जैसे हादसे का शिकार होती है। बात जब महिलाओं पर होने वाले अपराधों की हो तो एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट यह खुलासा भी करती है कि इस मामले में उत्तर प्रदेश अव्वल प्रदेश है।

महिलाओं पर होने वाले अपराधों के मामले में सरकारी एजेंसी की रिपोर्ट की पुष्टि इस तरह के समाचारों से भी होती है जिनमें यह पढ़ने को मिलता है। मसलन-बिहार के जहानाबाद में लड़की से होती रही छेड़छाड़, वो चीखती रही लेकिन बचाने कोई नहीं आया। इंदौर में मॉडल की स्कर्ट खींचने के मामले में दो गिरफ्तार, कठुआ रेप केस के आरोपी ने जुर्म कुबूला बताया क्यों की बच्ची की हत्या, कन्नौज में महिला के कथित यौन उत्पीडन का विडियो वायरल, मुंबई ने पुलिसवालों पर लगाया थाने में रेप करने का आरोप। सेक्स के बदले डिग्री देती थी महिला प्रोफेसर हुई गिरफ्तार और कोलकाता में मॉडल से बलात्कार और ब्लैकमेल के आरोप में एक्टर-फोटोग्राफर अनिकेत गिरफ्तार।

महिलाओं पर होने वाले अपराधों के ये समाचार एनसीआरबी के उस तथ्य की पुष्टि करते हैं जिसमें कहा गया है कि देश का कोई राज्य ऐसा नहीं रह गया है जहां महिलायें सुरक्षित हों। इस बाबत ये घटना प्रधान समाचार भी देश के हर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते दिखाई देते हैं। ये समाचार बिहार से शुरू होकर कश्मीर उत्तर प्रदेश, बंगाल उत्तर प्रदेश और मुंबई होते हुए सुदूर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य की महिला विरोधी हलचलों से अवगत करा देते हैं। इन अपराधों के लिए किसी व्यक्ति या सरकार को दोष देने के बजाय हमको उस मानसिकता को दोष देना चाहिए जो ऐसा काम करने को मजबूर करती है।

अपराध कोई भी हो और किसी भी तरह का हो उसके लिए सरकार को दो कारणों से दोषी माना जा सकता है। एक तो इसलिए कि राज्य की क़ानून व्यवस्था की स्थिति चुस्त न होने की वजह से ऐसे अपराध होते हैं, दूसरा दोष सरकारों का तब होता है जब अपराध हो जाने के बाद अपराधियों को सजा दिलाने के काम में सरकार द्वारा किसी तरह की लीपापोती की जाती है और अपराधियों को समय से और उचित दंड नहीं मिल पाता। जहां तक क़ानून बनाने का सवाल है आजादी से पहले भी और आजादी के बाद भी हर सरकार ने अपनी तरफ से यह कोशिश अवश्य की कि देश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए सख्त से सख्त क़ानून हों।

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आज से आठ साल पहले दिल्ली में हुए निर्भया काण्ड के बाद तो और भी सख्त क़ानून बनाए गए लेकिन चिंता की बात यह भी है इसके बावजूद महिलाओं के खिलाफ होने वाले आपराधों का सिलसिला रुकने के बजाय और बढ़ा ही है। इन परिस्थितियों में तकलीफदेह बात यह होती है जब सरकार का कोई प्रतिनिधि इस सत्य को स्वीकार करने और उसके अनुरूप सख्त से सख्त कारवाई का एलान करने के बाद यह कहे कि, बलात्कार की एक-दो घटनाओं को लेकर बात का बतंगड़ न बनाए। मालूम हो केन्द्रीय मंत्री संतोष गंगवार को पिछले दिनों उनकी इस तरह की टिपण्णी के लिए पूरे देश में आलोचना का शिकार होना पड़ा था।

सरकार से उपलब्ध आंकड़े यह भी बताते हैं कि 2018 की तुलना में, 2019 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में काफी वृद्धि हुई है। 2019 में, भारत में हर दिन औसतन 88 बलात्कार के मामले सामने आये। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में देश में महिलाओं के खिलाफ कुल 4,05,861 अपराध हुए जो 2018 के मुकाबले 7.3 प्रतिशत ज्यादा हैं इनमें सबसे ज्यादा 30.9 प्रतिशत मामले पति या संबंधियों द्वारा अत्याचार के थे, वहीं रेप करने के इरादे से हमला करने के मामलों की हिस्सेदारी 21.8 प्रतिशत रही। 17.9 प्रतिशत मामले अपहरण के और 7.9 प्रतिशत मामले रेप के थे।

रिपोर्ट के मुताबिक़ एक लाख की आबादी के लिहाज से भी महिलाओं पर होने वाले अपराध बढ़े हैं। आंकड़ों की भाषा में बात करें तो कह सकते हैं कि प्रति एक लाख महिलाओं पर अपराध की दर में भी वृद्धि हुई है। 2018 में यहां हर एक लाख में से 58.8 महिलाएं किसी न किसी तरह के अपराध का शिकार हुईं, वहीं 2019 में ये आंकड़ा बढ़कर 62.4 हो गया। राज्यों और शहरों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ सबसे ज्यादा 59,853 अपराध हुए जो पूरे देश में हुए ऐसे अपराधों का 14.7 प्रतिशत हैं। उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान (41,550) और महाराष्ट्र (37,144) में महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध हुए।

प्रति एक लाख महिलाओं पर अपराध के मामले में असम सबसे आगे रहा। वहीं शहरों में ऐसे 12,902 अपराधों के साथ दिल्ली सबसे आगे रही। 6,519 मामलों के साथ मुंबई दूसरे स्थान पर रही। 2019 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 4,05,861 मामले दर्ज किए गए, पिछले साल की तुलना में अपराध की यह दर 7.3 प्रतिशत बढ़ी।

बेहद भयावह स्थिति यह है कि इस देश में हर दिन हर 16 मिनट में एक महिला के साथ बलात्कार होता है 2019 में, देश में हर दिन 88 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे और बलात्कार के कुल 32,033 मामलों में से 11 प्रतिशत दलित समुदाय उत्तर प्रदेश और राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। 2019 में, राजस्थान में 5,997 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 1313 नाबालिग लड़कियां थीं और यूपी में 3,065 मामले थे।

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