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NEET 2020 टॉपर आकांक्षा सिंह का एम्स की बुकलेट पढ़ने के बाद बदली लाइफ, लिया था ये संकल्प

By आराधना शर्मा 
Updated Date

नई दिल्ली: NEET 2020 परीक्षा का रिजल्ट घोषित हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने NEET 2020 परीक्षा में टॉप किया है और उनके  720 में से 720 नंबर आए हैं, यानी परफेक्ट स्कोर, और साथ ही साथ ओडिसा के शोएब आफताब ने पूरे 720 में से 720 नंबर हासिल किया हैं। उनकी पूरी भारत में पहली रैंक है।

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आपको बता दें, उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले की बेटी आकांक्षा सिंह ने नीट-2020 में देश में दूसरा स्थान हासिल कर न सिर्फ जिले का बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। आकांक्षा का कहना है कि वह न्यूरो सर्जन बनकर पूर्वांचल के पिछड़े इलाकों में सेवा करना चाहती हैं।

ऐसे तय की गई रैंकिंग

आपको बता दें, आकांक्षा की ऑल इंडिया रैंक 2 है। NTA के मुताबिक टाई ब्रैक होने के कारण उन्होंने उम्र के बीच का अंतर देखा और इसी आधार पर शोएब को ऑल इंडिया रैंक 1 दी गई है। टी स्निकिता, विनीत शर्मा और अमृशा खैतान ने NEET 2020 में 715 नंबर प्राप्त किए हैं और उम्र के बीच के अंतर वाले कारण से ही इन्हें ऑल इंडिया रैंक 3,4,5 और 6 दी गई है, जबकि इन सभी के नंबर एक जितने ही हैं।

अधिकारी ने कहा, ‘‘समान अंक होने पर पहले रसायन विज्ञान और फिर जीव विज्ञान के अंकों से तुलना की जाती है। अगर दोनों विषयों में समान अंक होते हैं तो परीक्षा में गलत उत्तर पर विचार किया जाता है। यहां पर भी फैसला नहीं होने पर उम्र को आधार बनाया जाता है।”

आकांक्षा ने 2 साल नहीं रखा पास मोबाइल

पढ़ाई को समय के दायरे में कभी नहीं बांधने वाली आकांक्षा ने दो साल तक मोबाइल अपने पास नहीं रखा। सोशल मीडिया से आज भी दूर हैं। यही नहीं दिल्ली में रहकर पढ़ाई की और त्योहार में मां से भी मिलने नहीं आईं। उनकी इसी तपस्या ने एक ऐसा मुकाम हासिल कराया जिस पर परिवार और रिश्तेदार ही नहीं, पूरे देश को नाज है।

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शुक्रवार को परीक्षा का परिणाम आने के बाद आकांक्षा अपने माता-पिता और नाना के साथ आकाश इंस्टीट्यूट आईं। उन्होंने कहा कि निर्धारित विषय को तब तक पढ़ना चाहिए जब तक उसका गहनतम ज्ञान न हो जाए। उन्होंने इसी रणनीति के साथ पढ़ाई की और सफलता के इस मुकाम को हासिल कर सकीं। उन्होंने बताया कि कक्षा आठ तक की पढ़ाई के दौरान उनकी इच्छा आईएएस अफसर बनने की थी, लेकिन दोस्तों की सलाह और एम्स की एक बुकलेट ने उनके लक्ष्य को बदल दिया। जिसके बाद उन्होंने डॉक्टर बनने की ठान ली।

कक्षा नौ में पापा ने आकाश इंस्टीट्यूट में प्रवेश करा दिया। इंस्टीट्यूट की देखरेख में पहले गोरखपुर बाद में दिल्ली में पढ़ाई की। जिसके चलते सफलता मिली। लक्ष्य हासिल करने में कोचिंग संस्थानों की भूमिका के सवाल पर आकांक्षा ने कहा कि आज नीट की पूरी पढ़ाई एनसीईआरटी की किताबों पर आधारित है। ऐसे में यदि पूरी गंभीरता के साथ सेल्फ स्टडी की जाए तो भी बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कोचिंग संस्थान से पढ़ाई को आसानी से दिशा मिल जाती है। वह एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद न्यूरो सर्जरी में ही उच्च डिग्री हासिल करना चाहती हैं।

 

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