नकारात्मक सोच को खुद पर हावी होने से ऐसे रोकें, वरना ज़िंदगी में आगे नहीं बढ़ सकेंगे….

neagative thinking
नकारात्मक सोच को खुद पर हावी होने से ऐसे रोकें, वरना ज़िंदगी में आगे नहीं बढ़ सकेंगे....

लखनऊ। ज़िंदगी में इंसान उन हालातों में अक्सर हार जाता है, जब वो कोशिश करना ही छोड़ देता है। इसके लिए हमें ज़रूरत है एक सकारात्मक सोच की, जो हमारे भविष्य में कोई रोक ना ला सके। आजकल इंसान छोटी-छोटी नाकामियों की वजह से आगे जीने और बढ़ने की आस ही छोड़ देता है फिर वो इंसान अपने आसपास नकारात्मक सोच को पैदा करता है और उसी नकारात्मक सोच को अपने आसपास पास के माहौल में फैला देता है।

Negative Thinking Will Be Prevented From Being Dominated By Itself Or Else It Will Be Ruined Your Life :

अगर उस इंसान के आसपास कोई अच्छी चीज़ या अच्छा काम होगा तो वो उसे भी नकारात्मक सोच के साथ ही देखेगा। आज हम इस नकारात्मक सोच से जुड़ी एक कहानी आपको बताएंगे जो सचमुच में अगर हम अपनी सोच में नकारात्मक बातों को डाल लें तो फिर हम चाहकर भी उस नकारात्मक सोच से नहीं निकल सकते। इससे पहले कि नकारात्मक सोच आप पर हावी हो जाए आप इस कहानी से जरूर प्रेरणा लें। जिसमें शोधकर्ताओं ने शोध कर इस बात को साबित किया है की हमारी नकारात्मक सोच हमारे दिमाग पर किस तरह से असर करती है।

इस कहानी में एक शार्क की नकारात्मक सोच को बताया गया है जिसमें वो ये मान लेती है कि अब वो हार चुकी है और अब वो आगे कुछ नहीं कर सकती जिसकी वजह से वो आगे कुछ नहीं कर पाती। बायोलॉजिस्ट रिसर्च ने प्रयोग के दौरान एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता रहा।

बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा बदलाव किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार्क ने प्रयास नहीं छोड़ा और हमला करती रही। मगर जब उसे अपनी कोशिशों में नकामयाबी दिखाई दी तो उसने छोटी मछलियों पर हमला करना ही छोड़ दिया।

जब शार्क ने कई दिनों तक छोटी मछलियों पर हमला नहीं किया तो बायोलॉजिस्ट ने कुछ दिन बाद फाइबर की स्लाइड को वहां से हटा दिया। लेकिन यह क्या, स्लाइड हटाने के बाद भी शार्क को इससे कोई फर्क हीं नहीं पड़ा। उसने मछलियों पर हमला नहीं किया। उसने यह मान लिया था कि एक दीवार है, जिसे वह पार नहीं कर सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उन सभी मछलियों को शार्क से कोई खतरा भी नहीं था।

इस रिसर्च से ये साफ साबित हो गया की कोशिश ना करने पर हम किस तरह से उन लोगों के बीच आम से हो जाते जिनसे हम अलग हुआ करते थे, शार्क जैसी खतरनाक मछलियों से जब छोटी मछलियों को खतरा नहीं दिखाई दिया तो वो उनके बीच ही रहने लगी। इसी तरह ज़िंदगी में हम लोगों से काफी अलग होते हैं लेकिन हमारी नकारात्मक सोच की वजह से हम उस भीड़ में छुप जाते हैं जहां हमें कोई देख नहीं पाता और हम खास होकर भी आम बन जाते हैं। याद रखे खुद के साथ एक बुरा हादसा हो जाने पर खुद को उस हादसे में शामिल ना करें बल्कि आगे बढ़े और बढ़ते रहे, मौका मिलते ही आप दुनिया को बता दें कि आप कितने खास हैं।

लखनऊ। ज़िंदगी में इंसान उन हालातों में अक्सर हार जाता है, जब वो कोशिश करना ही छोड़ देता है। इसके लिए हमें ज़रूरत है एक सकारात्मक सोच की, जो हमारे भविष्य में कोई रोक ना ला सके। आजकल इंसान छोटी-छोटी नाकामियों की वजह से आगे जीने और बढ़ने की आस ही छोड़ देता है फिर वो इंसान अपने आसपास नकारात्मक सोच को पैदा करता है और उसी नकारात्मक सोच को अपने आसपास पास के माहौल में फैला देता है।

अगर उस इंसान के आसपास कोई अच्छी चीज़ या अच्छा काम होगा तो वो उसे भी नकारात्मक सोच के साथ ही देखेगा। आज हम इस नकारात्मक सोच से जुड़ी एक कहानी आपको बताएंगे जो सचमुच में अगर हम अपनी सोच में नकारात्मक बातों को डाल लें तो फिर हम चाहकर भी उस नकारात्मक सोच से नहीं निकल सकते। इससे पहले कि नकारात्मक सोच आप पर हावी हो जाए आप इस कहानी से जरूर प्रेरणा लें। जिसमें शोधकर्ताओं ने शोध कर इस बात को साबित किया है की हमारी नकारात्मक सोच हमारे दिमाग पर किस तरह से असर करती है।

इस कहानी में एक शार्क की नकारात्मक सोच को बताया गया है जिसमें वो ये मान लेती है कि अब वो हार चुकी है और अब वो आगे कुछ नहीं कर सकती जिसकी वजह से वो आगे कुछ नहीं कर पाती। बायोलॉजिस्ट रिसर्च ने प्रयोग के दौरान एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता रहा।

बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा बदलाव किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार्क ने प्रयास नहीं छोड़ा और हमला करती रही। मगर जब उसे अपनी कोशिशों में नकामयाबी दिखाई दी तो उसने छोटी मछलियों पर हमला करना ही छोड़ दिया।

जब शार्क ने कई दिनों तक छोटी मछलियों पर हमला नहीं किया तो बायोलॉजिस्ट ने कुछ दिन बाद फाइबर की स्लाइड को वहां से हटा दिया। लेकिन यह क्या, स्लाइड हटाने के बाद भी शार्क को इससे कोई फर्क हीं नहीं पड़ा। उसने मछलियों पर हमला नहीं किया। उसने यह मान लिया था कि एक दीवार है, जिसे वह पार नहीं कर सकती। उसने प्रयास करना ही छोड़ दिया अब छोटी मछलियां आराम से उसी टैंक में तैर रहीं थी और उन सभी मछलियों को शार्क से कोई खतरा भी नहीं था।

इस रिसर्च से ये साफ साबित हो गया की कोशिश ना करने पर हम किस तरह से उन लोगों के बीच आम से हो जाते जिनसे हम अलग हुआ करते थे, शार्क जैसी खतरनाक मछलियों से जब छोटी मछलियों को खतरा नहीं दिखाई दिया तो वो उनके बीच ही रहने लगी। इसी तरह ज़िंदगी में हम लोगों से काफी अलग होते हैं लेकिन हमारी नकारात्मक सोच की वजह से हम उस भीड़ में छुप जाते हैं जहां हमें कोई देख नहीं पाता और हम खास होकर भी आम बन जाते हैं। याद रखे खुद के साथ एक बुरा हादसा हो जाने पर खुद को उस हादसे में शामिल ना करें बल्कि आगे बढ़े और बढ़ते रहे, मौका मिलते ही आप दुनिया को बता दें कि आप कितने खास हैं।