लापरवाही: ठंड में नौनिहालों का हाल बेहाल, सरकार नहीं बांट सकी स्वेटर

लखनऊ। प्रदेश के प्राथमिक विद्यालायों में पढ़ने वाले 1.53 करोड़ बच्चों को सरकार के लापरवाह रवैये की वजह से ठंड में ठिठुरना पड़ेगा। हालांकि प्रदेश सरकार ने 30 नवम्बर तक बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में स्वेटर बांटने का निर्देश दिया था लेकिन इस निर्देश में कितना दम था इसके बारे में Pardaphash.com ने पहले ही बता दिया था। मंत्री-अफसर समेत शिक्षा विभाग का जो रवैया था उससे यह नौबत आनी तय थी। योजना अनुसार स्वेटर नवंबर में ही बांटना था लेकिन दिसंबर का एक सप्ताह बीत चुका है और टेंडर अभी तक पूरा नहीं हो सका। भले ही अफसर व मंत्री योजना पूरा होने का दावा कर रहें हो जमीन पर ये सभी दावे खोखली नज़र आ रही है।

ये है पूरा मामला
दरअसल, प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सत्र की शुरुआत में ही यूनिफ़ार्म, स्कूल बैग व किताबें दी जाती हैं लेकिन इस बार योगी सरकार ने फैसला किया कि इसके साथ जूता-मोजा व ठंड से बचने के लिए स्वेटर भी वितरित किया जाएगा। इसकी घोषणा जुलाई में ही हो गयी थी लेकिन स्वेटर खरीद की प्रशासकीय और वित्तीय अनुमति में ही तीन महीने लग गए। 3 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में स्वेटर व जूता-मोजा खरीद को मंजूरी भी मिल गयी। इस दौरान दावा किया गया था कि नवंबर यानि ठंड की शुरुआत में ही बच्चों को ये सब बाँट दिया जाएगा। लेकिन दिसंबर का पहला सप्ताह बीत जाने के बाद तक ये सुविधाएं बच्चों को नहीं मिल पाई हैं। हालात ये हैं कि ठंड में बच्चे बिना स्वेटर के स्कूल जा रहे हैं। वहीं, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी इस मामले में अजनान बने हुए है। अधिकारियों का कहना है कि- स्वेटर कब तक बांटा जाएगा, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

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इस वजह से आई ये नौबत
विभागीय अधिकारियों की माने तो सरकार ने तय किया गवर्नमेंट ई-मार्केट के जरिये स्वेटरों की खरीद की जाएगी। इसके लिए अक्टूबर के आखिर में प्रक्रिया शुरू हुई। 1.53 करोड़ स्वेटर एक साथ मुहैया करवाने के नाम पर पोर्टल ने पहले ही हाथ खड़े कर दिये थे। इसी बीच निकाय चुनाव की आचार संहिता के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग की मंजूरी के बिना स्वेटर खरीदने के टेंडर पर रोक लगा दी गई। विभाग की ओर से मंजूरी मांगने पर आयोग ने 18 नवम्बर को स्वीकृति जारी की। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने 30 नवम्बर तक बेसिक स्कूलों में स्वेटर बांटने का निर्देश जारी किया था। लेकिन अभी तक स्वेटर बांटने का काम शुरू नहीं हो पाया है। इस वजह से बच्चे अपने घरों के स्वेटर पहनकर स्कूल जा रहे हैं। वहीं, जिन बच्चों के पैरेंट्स के पास स्वेटर खरीदने के पैसे नहीं है। उनके बच्चे बिना स्वेटर ही स्कूल जा रहें हैं।

क्या कहती हैं अनुपमा जयसवाल
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जयसवाल से भी स्वेटर समय पर न बट पाने का कारण पूछा गया तो उनका कहना हैं कि पोर्टल के कारण विलंब हो गया लेकिन हम प्रयासरत हैं कि यह सुविधा जल ही बच्चों तक पहुँचें। हम सभी विकल्पों पर काम कर रहें हैं और जल्द ही सघन अभियान चला कर बच्चों को स्वेटर बांटा जाएगा।

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