भारत के साथ खड़ा हुआ नेपाल, नहीं जाएगा पाकिस्तान

नई दिल्ली। पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर अलग—थलग करने की कोशिशों में भारत को एक बड़ी सफलता मिली है। सार्क देशों के सदस्य नेपाल ने भी पाकिस्तान में अगले महीने होने जा रहे दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने से मना कर​ दिया है। जिसके बाद पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सार्क शिखर सम्मेलन के निरस्त होने की पूरी संभावना प्रवल होती मानी जा रही है।




सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प दहल कमल ‘प्रचंड’ ने बुधवार को एक बैठक कर अपने सहयोगियों से विचार विमर्श कर भारत के साथ सार्क सम्मेलन का बहिष्कार करने का फैसला लिया है। अब श्रीलंका और मालदीव दो मात्र ऐसे देश बचे हैं जिन्होंने सार्क सम्मेलन को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है जबकि भूटान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान पहले से भारत के समर्थन में सार्क का बहिष्कार कर चुके हैं।

वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से सार्क सदस्य देशों से सम्मेलन में शामिल होने की अपील की जा रही है। लेकिन ऐसी उम्मीदें कम ही नजर आ रहीं हैं कि कोई देश भारत का साथ छोड़कर पाकिस्तान के साथ खड़ा हो।




अतंरराष्ट्रीय संबन्धों के जानकारों की माने तो अगर पाकिस्तान में प्रस्तावित सार्क सम्मेलन के निरस्त होने के बाद वैश्विक जगत में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाएगा। सार्क केवल दक्षिण ​एशिया के आठ देशों का मंच है, ऐसे में अगर पाकिस्तान को सार्क देशों ने अलग छोड़ दिया तो उसे अन्य मंचों पर भी फजीहत का सामना करना पड़ सकती है। जो भविष्य में भारत की कूटनीतिक विजय के रूप में देखी जाएगी। अब तक भारत आतंकवाद के मुद्दे पर केवल मुखर होता रहा है लेकिन यह पहला मौका है कि दुनिया भर के देश भारत के साथ खड़े होकर पाकिस्तान की सरकार से इस मुद्दे पर बड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। अब तक पाकिस्तान का सबसे बड़ा समर्थक कहा जाने वाला अमेरिका भी पाक सरकार को कई चेतावनियां दे चुका है।