नेपाल भी भारत के समर्थन में कर सकता है सार्क का बहिष्कार

नई दिल्ली। भारत ने आतंकवाद के विरोध में पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घेरने की कोशिशों को धार देना शुरू कर दी है। जिसका पहला असर पाकिस्तान में आयोजित होने जा रहे सार्क सम्मेलन में देखने को मिलेगा। हाल ही में उरी में हुए आतंकी हमले के विरोध में भारत द्वारा सार्क सम्मेलन का बहिष्कार किए जाने के बाद भारत के समर्थन में तीन अन्य सदस्य देशों ने सम्मेलन का बहिष्कार कर दिया है। उम्मीद की जा रही है इस क्रम में नेपाल का नाम भी जल्द जुड़ सकता है। इसके बाद भारत, श्रीलंका और मालदीव को भी अपने पक्ष में लाने का प्रयास करेगा।




​सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प दहल कमल ने बुधवार को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इस बैठक में सार्क सम्मेलन में भारत के पक्ष में खड़े होने को लेकर चर्चा की जानी है। ऐसा कहा जा रहा है कि भारत सरकार ने नेपाल सरकार से आतंकवाद के विरोध में समर्थन मांगा है।

नेपाल और भारत के कारोबारी संबधों और नेपाल की भारत पर निर्भरता को देखकर ये कहा जा सकता है कि नेपाल भी सार्क सम्मेलन का बहिष्कार कर सकता है। लेकिन भारत के इस प्रयास को नेपाल में चीनी के प्रभाव से असफलता भी मिल सकती है।

इंडो नेपाल रिलेशन के जानकारों की माने तो, नेपाल कभी भी ऐसी गलती नहीं करेगा कि वह भारत के विरोध में पाकिस्तान के साथ खड़ा हो। पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने के बाद भले ही चीन ने नेपाल में पुनर्वसन के कार्यों में अहम भूमिका निभाई हो लेकिन भारत भी कहीं पीछे नहीं रहा। भारत के प्रयासों के बावजूद काठमांडू और नई दिल्ली के बीच एक छोटी तकरार की खबरें आईं थी। ऐसी खबरों पर भी पिछले दिनों ही नेपाल के प्रधानमंत्री के भारत दौरे के दौरान विराम लग गया।




आपको बता दें कि अब तक भूटान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान सार्क सम्मेलन के बहिष्कार की घोषणा कर चुके हैं। भारत को उम्मीद है कि आने वाले समय में वह सार्क सदस्य छह अन्य देशों को अपने पक्ष में लेकर पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहली पटखनी देने में कामयाब रहेगा।