शेषफरेंदा गोली कांड: नेपाल पुलिस ने कुछ ऐसे रची एनकाउंटर की कहानी

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शेषफरेंदा गोली कांड: नेपाल पुलिस ने कुछ ऐसे रची एनकाउंटर की कहानी

महराजगंज: सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेखफरेंदा गांव के पास बृहस्पतिवार की अपराह्न नेपाल पुलिस की गोली ने दिलीप उर्फ दिल्ली नामक युवक की जान ले ली। दिलीप के पिता झीनक को उठ़ा ले गई। फिर नेपाल पुलिस ने इस घटना को मुठ़भेड़ दिखाया। कहा कि हथियार बंद भारतीय बदमाशों से सामना हुआ। आत्मरक्षा में फायरिंग हुई। नेपाल पुलिस की यह कहानी कितनी सही है?

Nepal Police Ke Encounter Ki Kahani :

घटना के प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों की मानें, तो। बृहस्पतिवार की पूर्वाह्न करीब 2:30 बजे झीनक धोबी गांव के चौराहे पर मौजूद था। उसका फोन घनघनाया। फोन करने वाले नेपाली पुलिसकर्मी थे। उसे गांव के पश्चिम नोमेंस लैंड किनारे बुलाया गया। जहां किसी बात को लेकर झीनक का नेपाल पुलिस कर्मियों से झगड़ा हो गया। पुलिसकर्मी संख्या में दो थे। झीनक के हाथों को बांध दिया। मारपीट की। यह घटना पास मौजूद भैंस चराने गए ग्रामीणों ने देखी। चरवाहे भी मौके पर पहुंचे। बात गांव में फैल गई। ग्रामीण जुटने लगे।

झीनक का पुत्र दिलीप उर्फ दिल्ली भी मौके पर पहुंचा। वह पुलिसकर्मियों से आपने पिता को छुड़ाने के लिए बहस करने लगा। ग्रामीण भी झीनक को छुड़ाने के लिए आक्रोशित हो गए। इस बीच सादे वर्दी में आए दोनों पुलिस कर्मियों में से एक ने पिस्टल निकाली और हवाई फायरिंग किया। जिससे ग्रामीण दहशत से पीछ़े हट गए। लेकिन दिलीप अपने पिता को छुड़ाने के लिए नेपाली पुलिस कर्मियों से उलझ गया। जिस पर नेपाली पुलिस वालों ने उसे सटाकार गोली मार दी। दिलीप लहुलुहान हो वहीं गिर गया। फिर नेपाली पुलिस बंधक बनाए गए झीनक को अपने साथ ले गए।

नेपाल पुलिस के जाने के बाद ग्रामीण फिर मौके पर पहुंचे। घायल दिलीप को इलाज के लिए नौतनवा लाया गया। जहां चिकित्सक ने उसे महराजगंज रेफर किया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। सोनौली पुलिस रात में गांव पहुंची। शव को कब्जे में लिया।

नेपाल पुलिस की कहानी घटना को बदमाशों से मुठ़भेड़ बता रही है। तीन पुलिसकर्मियों को घायल भी बता रही है। पुलिस की यह कहानी ग्रामीणों के बयान से काफी दिगर है।

ग्रामीणों की माने तो झीनक की उन नेपाली पुलिस वालों से जान-पहचान थी। जो अक्सर गांव के आसपास आते थे और झीनक से मुलाकात भी करते थे। फिर बृहस्पतिवार को ऐसा क्या हुआ कि उन्हीं जान पहचान वाले नेपाली पुलिसकर्मियों ने झीनक को बंधक बना लिया?

बता दें कि कुछ माह पूर्व उसी क्षेत्र में नेपाल पुलिस ने सुनील साहनी नामक युवक का इनकाउंटर किया था। इसके पूर्व सोनौली कोतवाली क्षेत्र के कैथवलिया उर्फ बरगदही गांव के पास नेपाल पुलिस एक अन्य भगवानपुर निवासी व्यक्ति को बंधक बना नेपाल ले जाने की कोशिश की थी। लेकिन मौके पर पहुंची खनुआ चौकी पुलिस ने उसे काफी मशक्कत के बाद नेपाली पुलिसकर्मियों के चंगुल से छुडाया था। सादे वर्दी में घुमने वाले कथित नेपाल पुलिस कर्मी अब सरहदी क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन रहे हैं।

रिपोर्ट-विजय चौरसिया

महराजगंज: सोनौली कोतवाली क्षेत्र के शेखफरेंदा गांव के पास बृहस्पतिवार की अपराह्न नेपाल पुलिस की गोली ने दिलीप उर्फ दिल्ली नामक युवक की जान ले ली। दिलीप के पिता झीनक को उठ़ा ले गई। फिर नेपाल पुलिस ने इस घटना को मुठ़भेड़ दिखाया। कहा कि हथियार बंद भारतीय बदमाशों से सामना हुआ। आत्मरक्षा में फायरिंग हुई। नेपाल पुलिस की यह कहानी कितनी सही है? घटना के प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों की मानें, तो। बृहस्पतिवार की पूर्वाह्न करीब 2:30 बजे झीनक धोबी गांव के चौराहे पर मौजूद था। उसका फोन घनघनाया। फोन करने वाले नेपाली पुलिसकर्मी थे। उसे गांव के पश्चिम नोमेंस लैंड किनारे बुलाया गया। जहां किसी बात को लेकर झीनक का नेपाल पुलिस कर्मियों से झगड़ा हो गया। पुलिसकर्मी संख्या में दो थे। झीनक के हाथों को बांध दिया। मारपीट की। यह घटना पास मौजूद भैंस चराने गए ग्रामीणों ने देखी। चरवाहे भी मौके पर पहुंचे। बात गांव में फैल गई। ग्रामीण जुटने लगे। झीनक का पुत्र दिलीप उर्फ दिल्ली भी मौके पर पहुंचा। वह पुलिसकर्मियों से आपने पिता को छुड़ाने के लिए बहस करने लगा। ग्रामीण भी झीनक को छुड़ाने के लिए आक्रोशित हो गए। इस बीच सादे वर्दी में आए दोनों पुलिस कर्मियों में से एक ने पिस्टल निकाली और हवाई फायरिंग किया। जिससे ग्रामीण दहशत से पीछ़े हट गए। लेकिन दिलीप अपने पिता को छुड़ाने के लिए नेपाली पुलिस कर्मियों से उलझ गया। जिस पर नेपाली पुलिस वालों ने उसे सटाकार गोली मार दी। दिलीप लहुलुहान हो वहीं गिर गया। फिर नेपाली पुलिस बंधक बनाए गए झीनक को अपने साथ ले गए। नेपाल पुलिस के जाने के बाद ग्रामीण फिर मौके पर पहुंचे। घायल दिलीप को इलाज के लिए नौतनवा लाया गया। जहां चिकित्सक ने उसे महराजगंज रेफर किया। लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। सोनौली पुलिस रात में गांव पहुंची। शव को कब्जे में लिया। नेपाल पुलिस की कहानी घटना को बदमाशों से मुठ़भेड़ बता रही है। तीन पुलिसकर्मियों को घायल भी बता रही है। पुलिस की यह कहानी ग्रामीणों के बयान से काफी दिगर है। ग्रामीणों की माने तो झीनक की उन नेपाली पुलिस वालों से जान-पहचान थी। जो अक्सर गांव के आसपास आते थे और झीनक से मुलाकात भी करते थे। फिर बृहस्पतिवार को ऐसा क्या हुआ कि उन्हीं जान पहचान वाले नेपाली पुलिसकर्मियों ने झीनक को बंधक बना लिया? बता दें कि कुछ माह पूर्व उसी क्षेत्र में नेपाल पुलिस ने सुनील साहनी नामक युवक का इनकाउंटर किया था। इसके पूर्व सोनौली कोतवाली क्षेत्र के कैथवलिया उर्फ बरगदही गांव के पास नेपाल पुलिस एक अन्य भगवानपुर निवासी व्यक्ति को बंधक बना नेपाल ले जाने की कोशिश की थी। लेकिन मौके पर पहुंची खनुआ चौकी पुलिस ने उसे काफी मशक्कत के बाद नेपाली पुलिसकर्मियों के चंगुल से छुडाया था। सादे वर्दी में घुमने वाले कथित नेपाल पुलिस कर्मी अब सरहदी क्षेत्र में दहशत का पर्याय बन रहे हैं। रिपोर्ट-विजय चौरसिया