खबर का असर: 25 करोड़ की फर्जी एफडीआर मामले में डीके सिंह ने दिए जांच के आदेश

लखनऊ। लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों की मिलीभगत से अखिलेश सरकार में आगरा की सलोनी तेल कंपनी के मालिक शिवप्रकाश राठौर के भाई देवेन्द्र को दिए गए 1200 करोड़ के टेंडरों के मामले में विभागध्यक्ष डीके सिंह ने जांच के आदेश कर दिये है। पर्दाफाश ने खुलाशा किया था​ कि पिछली सरकार के कार्यकाल में सीएम अखिलेश यादव के करीबी रहे शिवप्रकाश राठौर के भाई की कंपनी आरपी इंफ्रावेंचर को पीडब्लूडी विभाग में 1200 करोड़ से ज्यादा के ठेके दिए गए। इन ठेकों को देने में न सिर्फ टेंडर कानूनों की अनदेखी की गई बल्कि कंपनी को एडवांस पेमेंट करने के लिए 25 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारन्टी भी स्वीकार की गई। इस पूरे मामले में यूपी सेतु निर्माण निगम के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक राजन मित्तल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जिस समय आरपी इंफ्रावेंचर को ठेके मिले उस समय मित्तल आगरा प्रान्त के चीफ इंजीनियर हुआ करते ​थे।

मिली जानकारी के मुताबिक पीडब्लूडी विभाग के एनसी वीके सिंह ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए पूरे मामले की जांच करवाकर दोषी अधिकारियों को निलंबित करने और कंपनी के मालिकों शामिल देवेन्द्र राठौर, संतोष शर्मा और राकेश गर्ग के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकरण की जांच के लिए चीफ इंजीनियर आजमगढ़ और आगरा को निर्देश दिए गए हैं।

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बताया गया है कि 18 मई से 29 मई के बीच विभाग ने प्रदेश भर में चल रहे ठेकों के लिए जमा करवाई गई एफडीआर और बैंक गारंटियों का सत्यापन करवाया गया था। जिसमें आरपी इंफ्रावेंचर की ओर से जमा करवाए गए 24.5 करोड़ के एफडीआर शामिल नहीं थे। इन एफडीआर के सत्यापन की जिम्मेदारी मथुरा प्रांतीय खंड की एक्सीएन की थी, जिन्हें सत्यापित नहीं करवाया जा सका था।

पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बेहद करीबी हैं राठौर बंधु—

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सलोनी ब्रांड सरसों तेल बनाने वाली कंपनी के मालिक शिव प्रकाश राठौर और अखिलेश यादव के बीच की दोस्ती किसी से छुपी नहीं है। शिव प्रकाश राठौर के परिवार में होने वाले मांगलिक कार्यक्रमों में सीएम रहते अखिलेश यादव की उपस्थिति दर्ज करवाना इस बात का पक्का प्रमाण है। अपने आगरा दौरों के समय अखिलेश यादव शिव प्रकाश राठौर से जरूर मिला करते थे।

ऐसा कहा जाता है कि अखिलेश यादव से अपने रिश्तों की बदौलत शिव प्रकाश राठौर और उसके भाई देवेन्द्र ने आगरा के भीतर हजारों करोंड़ की विवादित जमीनों के सौदे किए। मजबूत अार्थिक स्थिति के चलते राठौर बंधुओं ने जमीन के बाद ठेकेदारी के क्षेत्र में भी हाथ आजमाने की कोशिश की लेकिन आगरा में पहले से ऐसे ठेकेदार मौजूद थे जिनकी ​मजबूत पकड़ शिवपाल यादव तक थी। इस वजह से राठौर बंधू ठेकेदारी के क्षेत्र में समय रहते नहीं उतर सके। अपनी सरकार के अंतिम दिनों में जब ​अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव को सत्ता से बेदखल किया तो इस मौके का पूरा फायदा राठौर बंधुओं को मिला और उन्होने रातोंरात एक कंपनी खड़ी कर 1200 करोड़ के ठेके हथिया लिए।

केवल छोटे अधिकारियों में पर ही गिर सकती है गाज—

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जिस फर्जीवाडे की जांच के आदेश विभागध्यक्ष डीके सिंह ने किया है, उसमें बड़ी भूमिका सेतु निर्माण निगम के वर्तमान प्रबंध निदेशक राजन मित्तल की भी है। जिस दौर में आरपी इंफ्रावेंचर को ये ठेके दिए गए उस समय मित्तल पीडब्लूडी आगरा प्रांत के चीफ इंजीनियर हुआ करते थे। यह फर्जीवाड़ा ऐसे समय में सामने आया है जब राजन मित्तल विभागीय मंत्री केशव प्रसाद मौर्य की गुड लिस्ट शामिल हैं, तो यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह जांच निष्पक्ष होगी? क्या मित्तल को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों पर पूरा ठीकरा एक्ससीएन जैसे अधिकारियों पर कार्रवाई तक ही तो सीमित नहीं रह जाएगा?