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उत्तराखंड के नए सीएम पुष्कर सिंह धामी का लखनऊ से है गहरा नाता, जानें इनका पूरा इतिहास

भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को खटीमा के विधायक उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी को चुन लिया है। बता दें कि पुष्कर सिंह धामी का जन्म पिथौरागढ़ के टुंडी गांव में हुआ। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा हासिल की है। यहां से उन्होंने मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध के मास्टर डिग्री ली है।

By संतोष सिंह 
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देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को खटीमा के विधायक उत्तराखंड का नया मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी को चुन लिया है। बता दें कि पुष्कर सिंह धामी का जन्म पिथौरागढ़ के टुंडी गांव में हुआ। इन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से अपनी उच्च शिक्षा हासिल की है। यहां से उन्होंने मानव संसाधन प्रबंधन और औद्योगिक संबंध के मास्टर डिग्री ली है।

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देहरादून में हुई विधानमंडल दल की बैठक में उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया है। पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने पुष्कर धामी के नाम का अनुमोदन किया। इसके बाद मुख्यमंत्री के रूप में धामी का नाम फाइनल हो गया। सीएम के रेस में प्रदेश के बड़े बड़े सियासी सुरमाओं धन सिंह रावत, सतपाल महाराज, रमेश पोखरियाल निशंक, बिशुन सिंह चुफाल जैसे दिग्गजों सीएम की रेस में आगे चल रहे थे। ऐसे में इन सबको दरकिनार करते हुए बीजेपी ने विधान मंडल की बैठक में खटीमा से विधायक पुष्कर सिंह धामी के नाम पर मुहर लगा दी है।

बता दें कि लखनऊ विश्वविद्यालय में धामी छात्र समस्याओं को उठाने के लिए जाने जाते थे। 1990 से 1999 तक वह एबीवीपी के विभिन्न पदों पर रहे हैं। उनके खाते में लखनऊ में एबीवीपी के राष्ट्रीय सम्मेलन के संयोजक और संचालक होने की उपलब्धि दर्ज है। पुष्कर सिंह धामी यूपी में एबीवीपी के प्रदेश महामंत्री भी रह चुके हैं।

पुष्कर सिंह धामी सैनिक पुत्र होने के नाते राष्ट्रीयता, सेवा भाव एवं देशभक्ति को ही उन्होंने धर्म के रूप में अपनाया है। आर्थिक अभाव में जीवन यापन कर सरकारी स्कूलों से प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की है। तीन बहनों के बीच अकेला पुत्र होने के नाते परिवार के प्रति जिम्मेदारियां हमेशा बनी रहीं।

बता दें कि उनके कुशल नेतृत्व क्षमता, संघर्षशीलता एवं अदम्य साहस के कारण दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए सन 2002 से 2008 तक छह वर्षों तक लगातार पूरे प्रदेश में जगह-जगह भ्रमण कर युवा बेरोजगारों को संगठित करके अनेकों विशाल रैलियां एवं सम्मेलन आयोजित किये।

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धामी के संघर्षों के परिणामस्वरूप तत्कालीन प्रदेश सरकार से स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत आरक्षण राज्य के उद्योगों में दिलाने में सफलता प्राप्त की। इसी क्रम में 2005 में प्रदेश के युवाओं को जोड़कर विधान सभा का घेराव हेतु एक ऐतिहासिक रैली आयोजित की, जिसे युवा शक्ति प्रदर्शन के रूप में उदाहरण स्वरूप आज भी याद किया जाता है।

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