यूपी जल निगम के कारण NGT ने लगाया योगी सरकार पर इतने करोड़ का जुर्माना

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यूपी जल निगम के कारण NGT ने लगाया योगी सरकार पर इतने करोड़ का जुर्माना

लखनऊ। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कानपुर के रनिया और राखी मंडी इलाके में गंगा में जहरीले क्रोमियम युक्त सीवेज डिस्चार्ज की जांच करने में विफल रहने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। इसके साथ ही एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने के लिए 22 टेनरियों पर 280 करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी जिम्मेदार माना और उस पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। 

Ngt Imposes Fine Of 10 Crores On Yogi Government Due To Up Jalnigam :

अधिकरण ने कहा कि इस समस्या का निराकरण पिछले 43 वर्षों से नहीं किया गया है और इसके चलते भूजल दूषित हो गया है, जिससे आसपास के निवासियों की सेहत और जीवन प्रभावित हो रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 280.01 करोड़ रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। खंडपीठ ने कहा, “सच्चाई यह है कि इस समस्या का निराकरण पिछले 43 सालों से नहीं किया गया और इसके चलते भूजल दूषित हो गया, जिससे आसपास के निवासियों की सेहत और जीवन प्रभावित हो रहा है। क्षतिपूर्ति का आकलन 2019 में ही किया गया, हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि क्या वास्तविक वसूली की संभावना है?” 

उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की पिछली उदासीनता के लिए कोई सफाई नहीं दी जा सकती।” एनजीटी ने कहा कि इस असफलता के लिए राज्य सरकार उक्त राशि एक विशेष खाते में जमा कराए, जिसका इस्तेमाल पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए किया जाएगा। अधिकरण ने यूपीपीसीबी और उत्तर प्रदेश जल निगम को भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है और दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिकरण ने कहा कि ये राशि एक महीने के भीतर जमा कराई जाए।(यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स.कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है।

लखनऊ। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कानपुर के रनिया और राखी मंडी इलाके में गंगा में जहरीले क्रोमियम युक्त सीवेज डिस्चार्ज की जांच करने में विफल रहने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई है। इसके साथ ही एनजीटी ने प्रदूषण फैलाने के लिए 22 टेनरियों पर 280 करोड़ रूपये का जुर्माना लगाया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी जिम्मेदार माना और उस पर 10 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।  अधिकरण ने कहा कि इस समस्या का निराकरण पिछले 43 वर्षों से नहीं किया गया है और इसके चलते भूजल दूषित हो गया है, जिससे आसपास के निवासियों की सेहत और जीवन प्रभावित हो रहा है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 280.01 करोड़ रुपये की पर्यावरण क्षतिपूर्ति का आकलन किया है। खंडपीठ ने कहा, "सच्चाई यह है कि इस समस्या का निराकरण पिछले 43 सालों से नहीं किया गया और इसके चलते भूजल दूषित हो गया, जिससे आसपास के निवासियों की सेहत और जीवन प्रभावित हो रहा है। क्षतिपूर्ति का आकलन 2019 में ही किया गया, हालांकि ये स्पष्ट नहीं है कि क्या वास्तविक वसूली की संभावना है?"  उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की पिछली उदासीनता के लिए कोई सफाई नहीं दी जा सकती।” एनजीटी ने कहा कि इस असफलता के लिए राज्य सरकार उक्त राशि एक विशेष खाते में जमा कराए, जिसका इस्तेमाल पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए किया जाएगा। अधिकरण ने यूपीपीसीबी और उत्तर प्रदेश जल निगम को भी लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है और दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अधिकरण ने कहा कि ये राशि एक महीने के भीतर जमा कराई जाए।(यह आर्टिकल एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड हुआ है। इसे नवभारतटाइम्स.कॉम की टीम ने एडिट नहीं किया है।