भारत में बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर को रोकने की मांग

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भारत में बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर को रोकने की मांग

नई दिल्ली। एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस्कॉन द्वारा यमुना तट पर बनाए जा रहे चंद्रोदय मंदिर से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और इसका क्षेत्र के भूजल स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बैंच ने इस्कॉन और सीजीडब्ल्यूए को नोटिस जारी करते हुए 31 जुलाई से पहले जवाब मांगा है।

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भारत में बन रहे दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर को रोकने की मांग

पर्यावरण कार्यकर्ता मणिकेश चतुर्वेदी द्वारा दायर याचिका में मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए निर्देश देने की अपील की गई। याचिकाकर्ता के अनुसार, निर्माण पूरा होने पर मंदिर की ऊंचाई करीब 700 फुट रहेगी और इसका निर्माण क्षेत्र पांच लाख 40 हजार वर्ग फुट होगा, जिससे पर्यावरण को नुकसान होगा। अभी दुनिया की सबसे ऊंची धार्मिक इमारत मिस्र के पिरामिड हैं, जिनमें 128.8 मीटर ऊंचा पिरामिड है। वहीं वेटिकन का सेंट पीटर बैसेलिका 128.6 मीटर ऊंचा है।

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सबसे बड़े मंदिर की क्‍या है खासियत

* मंदिर के निर्माण पर 300 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा।
* इस्‍कॉन बेंगलुरु द्वारा दुनिया के सबसे महंगे मंदिर का निर्माण मथुरा में किया जाएगा।
* मंदिर की ऊंचाई 7 सौ फीट होगी और इसका निर्माण 5,40,000 वर्ग फीट में किया जाएगा।
* शानदार मंदिर के लिए सशक्‍त जंगल का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
* यह मंदिर 26 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा।
* इसमें ब्रज के 12 जंगलाेें का निर्माण होगा, जिसमें सुंदर वनस्‍पतियां, झीलें और झरने शामिल होंगे।
* मंदिर का कुल क्षेत्रफल 62 एकड़ होगा, जिसमें 12 एकड़ पार्किंग और हेलीपैड के लिए होगा।

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नई दिल्ली। एनजीटी की दाखिल की गई एक याचिका में इस्‍कॉन के नेतृत्‍व में मथुरा में बनने वाले चंद्रोदय मंदिर का निर्माण रोकने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस्कॉन द्वारा यमुना तट पर बनाए जा रहे चंद्रोदय मंदिर से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और इसका क्षेत्र के भूजल स्तर पर भी प्रभाव पड़ेगा। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली बैंच ने इस्कॉन और सीजीडब्ल्यूए को नोटिस जारी करते हुए 31…
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