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…निकोटीन विभिन्न घातक बीमारियों का भी मूल कारण है

हमारे देश में सदियों से तंबाकू का प्रयोग बड़े स्तर पर हो रहा है। हालांकि पहले अनपढ़ता और जागरूकता की कमी के कारण तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी का अभाव था, लेकिन आज जब पूरी दुनिया को पता चल गया है कि धूम्रपान कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारियों का मूल कारण है, फिर भी लोग धड़ल्ले से इस ज़हर का प्रयोग कर मौत को गले लगा रहे हैं।

By शिव मौर्या 
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हमारे देश में सदियों से तंबाकू का प्रयोग बड़े स्तर पर हो रहा है। हालांकि पहले अनपढ़ता और जागरूकता की कमी के कारण तंबाकू के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी का अभाव था, लेकिन आज जब पूरी दुनिया को पता चल गया है कि धूम्रपान कैंसर जैसी प्राणघातक बीमारियों का मूल कारण है, फिर भी लोग धड़ल्ले से इस ज़हर का प्रयोग कर मौत को गले लगा रहे हैं। हमारे देश में हरेक दिन लगभग 2800 से ज्यादा लोगों की मौत का कारण तंबाकू का सेवन है, दुनिया में हरेक एक घंटे में लगभग 600 व्यक्तियों की मौत का कारण भी तंबाकू ही है। तंबाकू से खासकर धूम्रपान से, विभिन्न प्रकार के विषाक्त पदार्थ पैदा होते हैं, जिनमें से निकोटीन सबसे प्रमुख एंव खतरनाक है। निकोटीन एक बहुत ही घातक जहर है, जो मनुष्य को नशे की लत में फंसाने का काम करता है। ये निकोटीन विभिन्न घातक बीमारियों का भी मूल कारण है। निकोटीन तंत्रिका तंत्र और खासकर फेफड़ों को खत्म कर देता है। निकोटीन व्यक्ति के उच्च रक्तचाप का भी कारण बनता है, इसके अलावा धूम्रपान गले और मुंह के कैंसर, खतरनाक पेट की बीमारियों, फेफड़ों के कैंसर, अस्थमा, आंखों के रोग, नपुंसकता और बहुत सी खतरनाक बीमारियों का मूल कारण है।

बड़ी ही शर्मनाक बात है कि धुआंरहित तंबाकू उत्पादों से होने वाली बीमारियों में हमारी विश्व में 70% की हिस्सेदारी है। पान मसाला, जर्दा, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का आदि के साथ-साथ, एक नए प्रकार का तंबाकू इन दिनों विभिन्न फ्लेवर्ड स्वरूप में बहुत लोकप्रिय हो गया है, जिसे कूल-लिप या तकिए के नाम से जाना जाता है, यह तंबाकू तो और भी ज्यादा खतरनाक है। हमारे पंजाब के युवा इस नए प्रचलित तंबाकू के जबरदस्त संपर्क में हैं। हम गांव में वॉलीबॉल खेलते हैं, जब भी वालीबॉल दूर झाड़ियों के पीछे चला जाता तो हमारे दो युवा साथियों में बाॅल लेकर आने की होड़ लग जाती, संदेहास्पद लगा तो एक दिन मैं पीछे गया, मेरे युवा साथी वहां अपने होठों के नीचे तकिए (कूल-लिप) की अदला-बदली में व्यस्त थे, वह तो शर्मिंदा हुए और इसे फिर से इस्तेमाल करने से तौबा भी की लेकिन हमारे कुछेक पंजाबी गायकों, गीतकारों और श्रोताओं का बौद्धिक स्तर तो देखें, हमने कूल-लिप जैसे गंदे नशे की महिमा में गीत तक निकाल दिये।

कुछ समय पहले यार्क विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक, पिछले सात साल में धुआंरहित तंबाकू से मौतों की संख्या में तीन गुना बढ़ोत्तरी हुई है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
तंबाकू, नामुराद और खतरनाक बीमारियों का प्रमुख कारण है, प्रत्येक 100 कैंसर रोगियों में से लगभग 30 तंबाकू के सेवन से ही प्रभावित होते हैं, हालांकि निष्क्रिय धूम्रपान करने वालों की संख्या भी बहुत अधिक है, जो खुद दूसरों द्वारा किये धूम्रपान की चपेट में आ जाते हैं। महिलाओं के लिए तो तंबाकू और भी खतरनाक है, उपरोक्त सभी बीमारियों के साथ-साथ, तंबाकू हमारी बहनों में बांझपन, गर्भाशय के कैंसर, बार-बार गर्भपात और कई अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है। हमारे देश में तंबाकू उत्पादों पर अंकुश लगाने हेतु, सरकार ने 2003 में तंबाकू नियंत्रण अधिनियम बनाया, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को तंबाकू उत्पाद बेचने, सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू से संबंधित किसी भी चीज का विज्ञापन करना, शिक्षण संस्थानों 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचना आदि को कानूनी अपराध घोषित किया गया है।

लेकिन यह हमारे देश की त्रासदी है जहां कई तंबाकू कंपनियां और दुकानदार अपने संकीर्ण व्यावसायिक हितों से इन कानूनों का खुलेआम उल्लंघन करते हैं। वहीं सरकार भी राजस्व की तलाश में तंबाकू जैसे जहर पर प्रतिबंध नहीं लगा रही हैं, जबकि तंबाकू जनित बीमारियों पर सरकार का खर्च इस राजस्व से कहीं ज्यादा है, फिर भी देशवासियों के स्वास्थ्य से शरेआम खिलवाड़ किया जाता है। तंबाकू का किसी भी तरह से प्रयोग करना, वास्तव में मौत को ही निमंत्रण देना है, लेकिन यह इतनी बुरा व्यसन है कि इसके आदी लोग चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पाते । गांवों में विशेषकर मारवाड़ी-राजस्थानी गाँवों में, सार्वजानिक स्थानों और चौपाल में इकट्ठे होकर हुक्का पीना आम है, जो संक्रामक रोगों, खासकर टीबी के फैलने का एक प्रमुख कारण है। बहुत ही शर्मनाक बात है कि इस क्षेत्र-समुदाय विशेष में किसी की मौत होने पर, शोक में 12 दिन तक बैठने के दौरान या आम सत्संग-धार्मिक आयोजनों में थालियों में बीड़ियां रखकर, सभी को यह ज़हर शरेआम परोसा जाता है।

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बीड़ी, सिगरेट और हुक्का के आदी लोगों को लगातार खांसी होती है, जो किसी भी दवा से प्राय ठीक नहीं होती, याद रखिए हुक्का पीना आपकी चौधर की नहीं बल्कि आपके मानसिक खोखलेपन की शरेआम नुमाइश है। विशेष रूप से बीड़ी के शौकीनों को तो इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि बीड़ी आमतौर पर गंदी बस्तियों में, बिना उचित स्वच्छता नियमों के बनाई जाती है, इतना ही नहीं, बीड़ी बनाने वाले भाई-बहनें कभी-कभार तो उस धागे को जो बीड़ी को किनारे से बांधने के लिए उपयोग किया जाता है, अपनी लार का उपयोग कर चिपका देते हैं, जो संक्रामक रोगों के फैलाव का कारण बनता है।

प्रारंभ में तो तंबाकू का उपयोग शौक के रूप में ही किया जाता है, परंतु यह शौक कब व्यसन में बदल जाता है, पता ही नहीं चलता। तंबाकू उत्पादों का प्रयोग हमारी बीमारी से लड़ने की क्षमता को कमजोर करता है, कोरोना जैसी महामारी में बढ़ते जोखिम में भी इसका बड़ा योगदान है। धूम्रपान के दुष्परिणामों से बचने के लिए, इस मीठे ज़हर को तुरंत छोड़ देना ही बेहतर है। आप सोचिए हर साल दुनिया में 80 लाख से ज्यादा लोग, इस ज़हर के कारण काल का ग्रास बन रहे हैं। धूम्रपान छोड़ना एक बड़ी उपलब्धि है, तो आइए हम सभी संकल्प लें कि स्वस्थ समाज के निर्माण हेतु हम किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पादों का उपयोग या व्यवसाय कभी नहीं करेंगे। मुझे उम्मीद है कि हमारी सरकारें भी इस जहर के उत्पादन को पूरे देश में प्रतिबंधित करने के पवित्र कार्य को अंजाम देंगी ताकि देश भर में धूम्रपान से फैलने वाली बीमारियों के कहर को कम किया जा सके।

 

                                  अशोक सोनी, स्वतंत्र स्तंभकार

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