तीन तलाक के बाद SC पहुंचा बहुविवाह अौर हलाला, जवाब तलब

तीन तलाक के बाद SC में पहुंचा बहुविवाह अौर हलाला का मामला, कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब
तीन तलाक के बाद SC में पहुंचा बहुविवाह अौर हलाला का मामला, कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब

नई दिल्ली। मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर केन्द्र सरकार व अन्य पक्षों जवाब मांगा है। साथ ही तीन जजों की पीठ ने मामले मे नोटिस जारी करते हुए मामला संविधान पीठ को भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट एक बार में तीन तलाक को पहले ही अवैध घोषित कर रद्द कर चुका है।

एक याचिकाकर्ता की ओर पेश वरिष्ठ वकील मोहन परासरण ने अदालत से कहा कि 2017 में तीन तलाक को असंवैधानिक ठहराने के न्यायालय के फैसले के बाद ये दो मुद्दे रह गए थे और इसका हल नहीं निकला था। एक मुस्लिम पति को एक से ज्यादा पति रखने का अधिकार है। निकाह हलाला के अंतर्गत, अगर तीन तलाक दी गई मुस्लिम महिला अपने पति के पास वापस जाना चाहती है, तो उसे एक अन्य मर्द से शादी करनी होगी, फिर उसे तलाक देना होगा और उसके बाद ही वह अपने पहले पति से शादी कर सकती है।

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याचिकाकर्ता की मांग – असंवैधानिक करार दिया जाए ‘निकाह हलाला’

इससे पहले भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय और तीन तलाक केस में याचिकाकर्ता सायरा बानो ने 5 मार्च को एक जनहित याचिका दायर की थी जिसमें बहुविवाह और हलाला को असंवैधानिक करार देने की मांग की थी। इसके अलावा, जनहित याचिका में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के तहत ‘निकाह हलाला’ को बलात्कार, और बहुविवाह को आईपीसी की धारा 494 और 498 के तहत अपराध घोषित कर असंवैधानिक करार दिया जाए।

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क्या होता है हलाला

निकाह हलाला मुस्लिम समाज की एक प्रथा है। इसमें यदि पति अपनी पत्नी को तलाक दे देता है और वो बाद में फिर से उससे शादी करना चाहे तो इसके लिए महिला को किसी अन्य पुरुष से शादी करनी होगी। इस दौरान अपने दूसरे निकाह से बने पति से शारीरिक संबंध बनाने होंगे। जब दूसरा पति उसे तलाक दे, तब जाकर वह पहले पति से फिर से निकाह कर सकती है।

बहुविवाह

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मुस्लिम को कानून के तहत एक से ज्यादा शादी करने की छूट है। इसकी बदौलत मुस्लिम व्यक्ति चाहे तो एक से ज्यादा पत्नी रख सकता है।

नई दिल्ली। मुस्लिमों में प्रचलित बहुविवाह और निकाह हलाला को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर केन्द्र सरकार व अन्य पक्षों जवाब मांगा है। साथ ही तीन जजों की पीठ ने मामले मे नोटिस जारी करते हुए मामला संविधान पीठ को भेज दिया है। सुप्रीम कोर्ट एक बार में तीन तलाक को पहले ही अवैध घोषित कर रद्द कर चुका है। एक याचिकाकर्ता की ओर पेश वरिष्ठ वकील मोहन परासरण ने अदालत…
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