स्वदेशी क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ का हुआ सफल परीक्षण, जद में होगा पूरा पाक

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स्वदेशी क्रूज मिसाइल 'निर्भय' का हुआ सफल परीक्षण, जद में होगा पूरा पाक

नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को निर्भय सब-सोनिक क्रूज मिसाइल का सफलापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर किया गया है, मिसाइल से 1000 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधा जा सकता है।  

Nirbhay Cruise Missile Was Successfully Test Know Specialty :

इससे पहले भी इस मिसाइल के कई सफल परीक्षणों का आयोजन किया जा चुका है। जल्द ही इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस मिसाइल को भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने पूरी तरह से भारत में निर्मित निर्भय मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। पिछली बार भारत ने इस मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से नवंबर, 2017 में किया था। हालांकि इससे पहले 2016 में किया गया टेस्ट नाकाम रहा था क्योंकि मिसाइल अपने लक्ष्य से भटक गई थी और हवा में ही इसमें विस्फोट हो गया था।

इससे पहले भी इसके दो टेस्ट असफल हो चुके थे। इस साल फरवरी में संस्था के अधिकारियों ने आशा जताई थी कि आगे के परीक्षणों में मिसाइल सफल रहेगी और प्रोडक्शन स्टैंडर्ड को पाने में कामयाब रहेगी। इस दौरान इन अधिकारियों ने अगले दो से तीन साल के अंदर इस मिसाइल के ऐसे रूप को डेवलप करने की बात भी कही थी, जिसे हवा से लॉन्च किया जा सकेगा। 

 इसलिए बड़ी है यह उपलब्धि

चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखकर भारत ने एक लंबी दूरी की सब सोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की सोची लेकिन हमें मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) की वजह इस रेंज से ज्यादा की मिसाइल को विकसित करने के लिए कोई विदेशी सहयोगी नहीं मिलने वाला था। जिसके बाद डीआरडीओ ने इस मिसाइल को अकेले विकसित करने का फैसला किया।

क्या है मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम

मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) एक अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण समझौता है जो ऐसी मिसाइल तकनीकी को एक दूसरे को देने से रोकता है जिसकी रेंज 300 किलोमीटर और उसके वारहेड ले जाने की क्षमता 500 किलोग्राम हो। इसे साल 1987 में जी-7 के सदस्य देशों द्वारा स्थापित किया गया था। भारत साल 2016 में इस क्लब का मेंबर बना। इसी वजह से भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित  ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का रेंज 300 किलोमीटर तक ही रखा गया।

यह कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है बल्कि सदस्य देशों के बीच एक अनौपचारिक राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहते हैं। यह किसी भी सदस्य देश के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।

नई दिल्ली। भारत ने सोमवार को निर्भय सब-सोनिक क्रूज मिसाइल का सफलापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट पर किया गया है, मिसाइल से 1000 किलोमीटर दूरी तक निशाना साधा जा सकता है।  

इससे पहले भी इस मिसाइल के कई सफल परीक्षणों का आयोजन किया जा चुका है। जल्द ही इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस मिसाइल को भारत की रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (डीआरडीओ) ने विकसित किया है।

डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने पूरी तरह से भारत में निर्मित निर्भय मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। पिछली बार भारत ने इस मिसाइल का सफल परीक्षण ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से नवंबर, 2017 में किया था। हालांकि इससे पहले 2016 में किया गया टेस्ट नाकाम रहा था क्योंकि मिसाइल अपने लक्ष्य से भटक गई थी और हवा में ही इसमें विस्फोट हो गया था।

इससे पहले भी इसके दो टेस्ट असफल हो चुके थे। इस साल फरवरी में संस्था के अधिकारियों ने आशा जताई थी कि आगे के परीक्षणों में मिसाइल सफल रहेगी और प्रोडक्शन स्टैंडर्ड को पाने में कामयाब रहेगी। इस दौरान इन अधिकारियों ने अगले दो से तीन साल के अंदर इस मिसाइल के ऐसे रूप को डेवलप करने की बात भी कही थी, जिसे हवा से लॉन्च किया जा सकेगा। 

 इसलिए बड़ी है यह उपलब्धि

चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे को देखकर भारत ने एक लंबी दूरी की सब सोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की सोची लेकिन हमें मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) की वजह इस रेंज से ज्यादा की मिसाइल को विकसित करने के लिए कोई विदेशी सहयोगी नहीं मिलने वाला था। जिसके बाद डीआरडीओ ने इस मिसाइल को अकेले विकसित करने का फैसला किया।

क्या है मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम

मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) एक अंतर्राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण समझौता है जो ऐसी मिसाइल तकनीकी को एक दूसरे को देने से रोकता है जिसकी रेंज 300 किलोमीटर और उसके वारहेड ले जाने की क्षमता 500 किलोग्राम हो। इसे साल 1987 में जी-7 के सदस्य देशों द्वारा स्थापित किया गया था। भारत साल 2016 में इस क्लब का मेंबर बना। इसी वजह से भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित  ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का रेंज 300 किलोमीटर तक ही रखा गया।

यह कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है बल्कि सदस्य देशों के बीच एक अनौपचारिक राजनीतिक समझ है जो मिसाइलों और मिसाइल प्रौद्योगिकी के प्रसार को सीमित करना चाहते हैं। यह किसी भी सदस्य देश के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है।