निर्भया केस: SC में 11 फरवरी को होगी दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने की सुनवाई

Nirbhaya's mother
7 साल बाद निर्भया को मिला न्याय, दरिंदो को दी गई फांसी, निर्भया की मां बोली आज है निर्भया दिवस

नई दिल्ली। निर्भया केस के दोषियों का दो बार डेथ वारेंट जारी हुआ लेकिन दोनो बार कानून दाव पेंच के चलते फांसी टल गयी। इसी बात को लेकर केन्द्र सरकार ने दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी। अब सुप्रीम कोर्ट केंद्र की याचिका पर 11 फरवरी को सुनवाई करेगा। आपको बता दें कि हर बार चारों दोषियों की तरफ से अलग अलग याचिका डाल दी जाती है जिसकी वजह से सभी की फांसी टल जाती है।

Nirbhaya Case Sc To Hear Separate Hanging Of Convicts On February 11 :

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए चारों दोषियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि हाईकोर्ट का सात दिन का समय 11 फरवरी को खत्म हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 11 फरवरी को दो बजे सुनवाई करेगा। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को कानून का सवाल तय करना है। हाईकोर्ट से हमें आंशिक राहत मिली है। तीन दोषियों के सारे विकल्प पूरे हो चुके हैं। पवन गुप्ता ने क्यूरेटिव और दया याचिका नहीं लगाई है।

उन्होने कहा कि अक्षय, विनय और पवन ने निचली अदालत में अर्जी दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि सभी दोषियों को एक साथ ही फांसी हो सकती है अलग अलग नहीं। सवाल ये है कि क्या एक दोषी के सोचे समझे तरीके से देरी करने से उन दोषियों को भी फायदा हो जो अपने सारे उपचार पूरे कर चुके हैं। पवन के पास उपाय बचा है दया याचिका के तौर पर। क्या केवल एक दोषी के लिए सभी दोषियों को राहत दी जा सकती है? साथ ही तुषार मेहता ने कहा कि निचली अदालत ने गलत तरीके से प्रिजन रूल को अप्लाई किया, जिसके खिलाफ हम हाईकोर्ट में सफल हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा हाईकोर्ट ने कितना समय दिया है? तो कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने उपाय पूरे करने के लिए एक हफ्ता दिया है। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि किसी भी दोषी को अपने उपचार लेने के लिए विवश नहीं किया जा सकता, अगर वो उपाय नहीं करना चाहता तो नहीं करना चाहता। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। हम समाज के प्रति जवाबदेह हैं।

नई दिल्ली। निर्भया केस के दोषियों का दो बार डेथ वारेंट जारी हुआ लेकिन दोनो बार कानून दाव पेंच के चलते फांसी टल गयी। इसी बात को लेकर केन्द्र सरकार ने दोषियों को अलग-अलग फांसी दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाल दी। अब सुप्रीम कोर्ट केंद्र की याचिका पर 11 फरवरी को सुनवाई करेगा। आपको बता दें कि हर बार चारों दोषियों की तरफ से अलग अलग याचिका डाल दी जाती है जिसकी वजह से सभी की फांसी टल जाती है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए चारों दोषियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कि हाईकोर्ट का सात दिन का समय 11 फरवरी को खत्म हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 11 फरवरी को दो बजे सुनवाई करेगा। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अदालत को कानून का सवाल तय करना है। हाईकोर्ट से हमें आंशिक राहत मिली है। तीन दोषियों के सारे विकल्प पूरे हो चुके हैं। पवन गुप्ता ने क्यूरेटिव और दया याचिका नहीं लगाई है। उन्होने कहा कि अक्षय, विनय और पवन ने निचली अदालत में अर्जी दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि सभी दोषियों को एक साथ ही फांसी हो सकती है अलग अलग नहीं। सवाल ये है कि क्या एक दोषी के सोचे समझे तरीके से देरी करने से उन दोषियों को भी फायदा हो जो अपने सारे उपचार पूरे कर चुके हैं। पवन के पास उपाय बचा है दया याचिका के तौर पर। क्या केवल एक दोषी के लिए सभी दोषियों को राहत दी जा सकती है? साथ ही तुषार मेहता ने कहा कि निचली अदालत ने गलत तरीके से प्रिजन रूल को अप्लाई किया, जिसके खिलाफ हम हाईकोर्ट में सफल हुए। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा हाईकोर्ट ने कितना समय दिया है? तो कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने उपाय पूरे करने के लिए एक हफ्ता दिया है। जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि किसी भी दोषी को अपने उपचार लेने के लिए विवश नहीं किया जा सकता, अगर वो उपाय नहीं करना चाहता तो नहीं करना चाहता। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि दोषी देश के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। हम समाज के प्रति जवाबदेह हैं।