आज है निर्जला एकादशी, इन उपायों से पूर्ण होगी मनोकामना

आज है निर्जला एकादशी, इन उपायों से पूर्ण होगी मनोकामना
आज है निर्जला एकादशी, इन उपायों से पूर्ण होगी मनोकामना

लखनऊ। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है। सालभर में पड़ने वाली सभी चौबीस एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन बिना जल के उपवास रहने से साल की सारी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पानी पीना वर्जित माना जाता है इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहा जाता है। आइए जानते हैं
निर्जला एकादशी के पूजन विधि के बारे में….

Nirjala Ekadashi Vrat 2020 Puja Vidhi And Significance :

निर्जला एकादशी की पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें।
इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें।
इसके बाद श्री हरि और मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप करें।
किसी निर्धन व्यक्ति को जल का, अन्न-वस्त्र का या जूते छाते का दान करें।
आज के दिन वैसे तो निर्जल उपवास ही रखा जाता है लेकिन आवश्यकता पड़ने पर जलीय आहार और फलाहार लिया जा सकता है।

लखनऊ। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी कहा जाता है। सालभर में पड़ने वाली सभी चौबीस एकादशियों में निर्जला एकादशी सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन बिना जल के उपवास रहने से साल की सारी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन पानी पीना वर्जित माना जाता है इसलिए इस एकादशी को निर्जला कहा जाता है। आइए जानते हैं निर्जला एकादशी के पूजन विधि के बारे में.... निर्जला एकादशी की पूजा विधि प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें। इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद श्री हरि और मां लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप करें। किसी निर्धन व्यक्ति को जल का, अन्न-वस्त्र का या जूते छाते का दान करें। आज के दिन वैसे तो निर्जल उपवास ही रखा जाता है लेकिन आवश्यकता पड़ने पर जलीय आहार और फलाहार लिया जा सकता है।