निर्जला एकादशी व्रत: आज है निर्जला एकादशी, जाने पूजन विधि और महाउपाय के बारे में…

निर्जला एकादशी व्रत: आज है निर्जला एकादशी जाने पूजन विधि और महाउपाय के बारे में...
निर्जला एकादशी व्रत: आज है निर्जला एकादशी जाने पूजन विधि और महाउपाय के बारे में...

लखनऊ। गंगा दशहरा के बाद पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार यह आज यानी गुरुवार को मनाया जा रहा है। वैसे तो साल में 24 एकादशियां होती हैं लेकिन निर्जला एकादशी को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूरे विधिविधान से निर्जला व्रत रखा जाये तो आप अपनी समस्याओं से मुक्त हो सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा भी पा सकते है।

Nirjala Ekadashi Vrat :

निर्जला एकादशी के दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है और पति के दीर्घायु और मोक्ष का वरदान प्राप्त किया जा सकता है। इसदिन व्रत रखने से साल की सभी एकादशी का व्रत फल मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा होती है। जाने निर्जला एकादशी पर कैसे करें पूजा और क्या हैं महाउपाय ….

निर्जला एकादशी पर कैसे करें पूजा अर्चना

  • निर्जला एकादशी का व्रत एक दिन पहले अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही आरम्भ हो जाता है और रात्रि में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। निर्जला एकादशी के व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्य उदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • निर्जला एकादशी के दिन प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पीले चंदन पीले फल फूल से पूजा करें और पीली मिठाई भगवान विष्णु को अर्पण करें।
  • एक आसन पर बैठकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • जाप के बाद गुलाब या आम के शरबत का भोग भगवान विष्णु को लगाएं और जरूरतमंद लोगों में बांटे।
  • ऐसा करने से मन की इच्छा पूरी होगी और पारिवारिक कलह क्लेश खत्म होंगे।

निर्जला एकादशी पर ये सावधानियां बरतें

  • निर्जला एकादशी पर सूर्य उदय से पहले उठे
  • घर में लहसुन प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल भी ना बनाएं
  • एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़ों का ही प्रयोग करें
  • निर्जला एकादशी के व्रत विधान में परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखें तथा सभी प्रकार की पूजा पाठ की सामग्री शुद्ध और साफ ही प्रयोग में लाएं।

 

लखनऊ। गंगा दशहरा के बाद पड़ने वाली एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इस बार यह आज यानी गुरुवार को मनाया जा रहा है। वैसे तो साल में 24 एकादशियां होती हैं लेकिन निर्जला एकादशी को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन को भीम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पूरे विधिविधान से निर्जला व्रत रखा जाये तो आप अपनी समस्याओं से मुक्त हो सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा भी पा सकते है। निर्जला एकादशी के दिन निर्जल रहकर भगवान विष्णु की आराधना की जाती है और पति के दीर्घायु और मोक्ष का वरदान प्राप्त किया जा सकता है। इसदिन व्रत रखने से साल की सभी एकादशी का व्रत फल मिलता है और भगवान विष्णु की कृपा होती है। जाने निर्जला एकादशी पर कैसे करें पूजा और क्या हैं महाउपाय .... निर्जला एकादशी पर कैसे करें पूजा अर्चना
  • निर्जला एकादशी का व्रत एक दिन पहले अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही आरम्भ हो जाता है और रात्रि में अन्न का सेवन नहीं किया जाता है। निर्जला एकादशी के व्रत में सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्य उदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • निर्जला एकादशी के दिन प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पीले चंदन पीले फल फूल से पूजा करें और पीली मिठाई भगवान विष्णु को अर्पण करें।
  • एक आसन पर बैठकर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • जाप के बाद गुलाब या आम के शरबत का भोग भगवान विष्णु को लगाएं और जरूरतमंद लोगों में बांटे।
  • ऐसा करने से मन की इच्छा पूरी होगी और पारिवारिक कलह क्लेश खत्म होंगे।
निर्जला एकादशी पर ये सावधानियां बरतें
  • निर्जला एकादशी पर सूर्य उदय से पहले उठे
  • घर में लहसुन प्याज और तामसिक भोजन बिल्कुल भी ना बनाएं
  • एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़ों का ही प्रयोग करें
  • निर्जला एकादशी के व्रत विधान में परिवार में शांतिपूर्वक माहौल बनाए रखें तथा सभी प्रकार की पूजा पाठ की सामग्री शुद्ध और साफ ही प्रयोग में लाएं।