5 सालों में देश की सड़कों का कायाकल्प कर दूंगा : नितिन गड़करी

अम्बेडकरनगर। यूपी के विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुरू हुई सियासी बयार अब तेज होती जा रही है। इसी को मद्दे नज़र रखते हुए बीजेपी के सभी कद्दावर नेता अब यूपी के सियासी मैदान मे कूद गए है। मंगलवार को जहां एक तरफ हरदोई में राजनाथ सिंह विरोधियों पर निशाना साध रहे थे तो दूसरी ओर अम्बेडकरनगर में केन्द्रीय भूतल व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक वह…

अम्बेडकरनगर। यूपी के विधानसभा चुनावों को देखते हुए शुरू हुई सियासी बयार अब तेज होती जा रही है। इसी को मद्दे नज़र रखते हुए बीजेपी के सभी कद्दावर नेता अब यूपी के सियासी मैदान मे कूद गए है। मंगलवार को जहां एक तरफ हरदोई में राजनाथ सिंह विरोधियों पर निशाना साध रहे थे तो दूसरी ओर अम्बेडकरनगर में केन्द्रीय भूतल व परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक वह देशभर की सड़कों का कायाकल्प कर देंगे।

जनता को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ऐसी इकलौती राजनीतिक पार्टी है जो कि कार्यकर्ता आधारित है। भाजपा में कोई भी बूथ कार्यकर्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। वहीं अन्य पार्टियों में किसी का बेटा, किसी का रिश्तेदार होना अनिवार्य है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी तथा वह स्वयं हैं। देश की जनता ने हमारा सहयोग किया है अब हमारा भी दायित्व बनाता है कि देश की सेवा में अपना सब कुछ लगा दे।

बातों ही बातों में भावुक हुए गडकरी ने कहा कि जब वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, उस दौरान रायबरेली से लखनऊ जाते समय उन्होने देखा कि खराब सड़क होने की वजह से एक नौजवान मोटर साइकिल पर बैठी अपनी पत्नी को बार—बार देख रहा था। उस नौजवान को डर था कि कहीं उसकी पत्नी गिर न जाए। उसी दिन उन्होंने संकल्प लिया था कि अगर कभी मौका मिला तो वह यूपी की सड़कों का कायाकल्प करके ही रहेंगे। आज भी उसी बात को ध्यान में रखकर वह पूरे भारत में सड़कों का कायाकल्प करने में जुटे हैं।

उन्होंने जनसभा में आए लोगों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पांच साल बीतते बीतते वह देश में ऐसी सड़कों का निर्माण करवा देंगे जिनमें अगले सौ सालों तक गढ़ढे नहीं होगें।

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