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42 घंटे बाद भी जेएनयू हिंसा में नहीं हुई कोई गिरफ्तारी, तीन टीमें कर रही पड़ताल

By बलराम सिंह 
Updated Date

No Arrests In Jnu Violence Even After 42 Hours Three Teams Are Investigating

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू हिंसा मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा भड़काने व सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में तीन मुकदमे दर्ज किए हैं। इस मामले में सोमवार शाम तक पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली थी। मामले की जांच स्थानीय पुलिस से लेकर अपराध शाखा को सौंप दी गई है। हालांकि हमले को 42 घंटे होने को आए हैं लेकिन एक भी आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। इस मामले में अहम सुराग होने के बाद भी पुलिस ने अब तक एक भी गिरफ्तारी नहीं की है। बताया जा रहा है कि जेएनयू हमले में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए पुलिस वीडियो फुटेज, चेहरे पहचानने की प्रणाली का इस्तेमाल कर रही है।

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वहीं दूसरी ओर जेएनयू प्रशासन ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को पूरे मामले की प्राथमिक रिपोर्ट सौंप दी है। अपराध शाखा की कई टीमों ने सोमवार सुबह जेएनयू पहुंचकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने मौके से कुछ सैंपल भी उठाए। दिल्ली पुलिस ने इस बात से इंकार किया है कि जेएनयू हिंसा में बाहरी व्यक्ति शामिल थे। सोमवार को भी माहौल तनावपूर्ण था और कैंपस के अंदर व बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था।

जिला पुलिस उपायुक्त देवेंद्र आर्या ने बताया कि एफआईआर में किसी को नामजद नहीं किया गया है। वसंत कुंज (नार्थ) थानाध्यक्ष रितुराज की शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि सोमवार देर शाम तक पुलिस को जेएनयू यूनिवर्सिटी समेत किसी पक्ष से कोई शिकायत नहीं मिली थी।

उपायुक्त का कहना है कि रविवार शाम को 4.57 बजे जेएनयू कैंपस में झगड़े की कॉल मिली थी। पुलिस कैंपस में गई थी। पुलिस माहौल को शांत कराकर वापस आ गई थी। पुलिस को कैंपस में सब कुछ सामान्य लगा था। इसके बाद पुलिस को 7.12 बजे दोबारा झगड़े की सूचना मिली थी। इस पर पुलिस दोबारा वहां गई थी। इसके बाद पुलिस ने वहां फ्लैग मार्च कर स्थिति को नियंत्रित किया गया था। उन्होंने बताया कि जेएनयू हिंसा मामले में 34 लोगों की एमएलसी बनी है।

हालांकि पुलिस उपायुक्त ने इस बात से साफ इंकार किया है कि जेएनयू कैंपस हिंसा में कोई बाहरी व्यक्ति था। अगर लोग आरोप लगा रहे हैं तो इसकी जांच की जाएगी। सोशल मीडिया व सीसीटीवी फुटेज के आधार पर नकाबपोश आरोपियों की पहचान की जा रही है। सोमवार शाम तक किसी आरोपी की पहचान नहीं हुई थी और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया था। एफएसएल टीम ने मौके से कई नमूने उठाए थे।

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पुलिस उपायुक्त के मुताबिक जेएनयू हिंसा मामले में पुलिस को कुल 46 कॉल मिली थीं। सबसे पहली कॉल मिलने पर पीसीआर वैन कैंपस में गई थी। पुलिस वैन में तैनात पुलिसकर्मियों ने हालत सामान्य बताए थे। जेएनयू हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर कहा है कि झगड़ा छात्रों के दो गुटों में हुआ था। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन को लेकर झगड़ा चल रहा था। पुलिस को हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह की देखरेख में फैक्ट फाइंडिंग (तथ्यान्वेषी) कमेटी बनाई गई है।

जेएनयू प्रशासन की अनुमति के बाद दिल्ली पुलिस कैंपस में भीतर घुसी। मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी गई है। उनके मुताबिक, जेएनयू में अपनी सिक्योरिटी होती है। जांच होगी कि जेएनयू के अंदर कौन और किसके साथ गया था। जेएनयू में सभी की एंट्री होती है। पुलिस के हाथ हमलावरों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं। आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। अपराध शाखा की कई टीमें बनाई गई हैं। इन्होंने सोमवार को जेएनयू जाकर मुआयना किया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जेएनयू हिंसा के बाद जितने भी वीडियो सोशल मीडिया पर चल रहे हैं, पुलिस उनके आधार पर भी जांच करेगी। पुलिस सभी वीडियो को कब्जे में लेगी। एक वीडियो ऐसा चल रहा है, जिसमें जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष साबरमती हॉस्टल में दिखाई दे रही हैं। कुछ देर बाद वह पेरियर हॉस्टल में दिखाई दे रही हैं।

अपराध शाखा ने हिंसा की जांच शुरू कर दी है। इसके लिए तीन टीमें बनाकर सबको अलग-अलग काम सौंपा गया है। एक यूनिट जेएनयू कैंपस में लगे सीसीटीवी की फुटेज एकत्र कर रही है। दूसरी यूनिट आरोपियों की धरपकड़ करेगी। तीसरी यूनिट वायरल हो रहे वीडियो व उकसाने वाले वीडियो की जांच करेगी।
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