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पाकिस्तान में कोई अल्पसंख्यक नहीं बनेगा प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति, संसद ने रद्द किया ईसाई सदस्य का बिल

By बलराम सिंह 
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नई दिल्ली। भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर पाकिस्तान हमेशा ही झूठ फैलाने की कोशिश में रहता है। जबकि सच यह है खुद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बेहद खराब है। पाकिस्तान में बहुसंख्यक मुसलमानों के अलावा हिन्दू, सिख, ईसाई तथा अन्य जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यक रहते हैं। अब पाकिस्तान की संसद ने एक अल्पसंख्यक ईसाई सदस्य के संविधान संशोधन बिल को रद कर दिया है, जिसमें किसी गैर-मुस्लिम के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनने का प्रावधान था। पाक पीएम इमरान खान ने भारत पर हमले करते हुए कहा कि भारत सरकार मुसलमानों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रही है और यह मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी की जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास कर रही है।

पाकिस्तान की राष्ट्रीय सभा में इस बिल को गिराने की आवाज तेज हुई और अल्पसंख्यक सदस्य डॉ नावेद आमिर जीवा द्वारा संविधान (संशोधन) विधेयक 2019 को पेश करने की कोशिश को दबा दिया गया। जीवा ने संविधान के अनुच्छेद 41 और 91 में संशोधन करके गैर-मुस्लिमों को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनने की अनुमति देने की मांग की थी। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मुहम्मद ने प्रस्तावित कानून का विरोध करते हुए कहा कि पाकिस्तान एक इस्लामी गणराज्य है जहां केवल एक मुस्लिम को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्लॉट में उतारा जा सकता है।

जमात-ए-इस्लामी (JI) के सदस्य मौलाना अब्दुल अकबर चित्राली ने मंत्री द्वारा उठाए गए रुख की सराहना करते हुए कहा कि संसद में इस्लामिक मूल्यों और शिक्षाओं के खिलाफ कोई कानून पारित, या उनपर बहस नहीं की जा सकती। बता दें कि बुधवार को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के विचार-विमर्श से यह बात साफ हो गई कि पाकिस्तान के अल्पसंख्यक कभी भी देश के सर्वोच्च पद की आकांक्षा नहीं कर सकते।

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