भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपॉल का निधन

भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपॉल का निधन
भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपॉल का निधन

नई दिल्ली। साहित्य का नोबल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल का रविवार तड़के निधन हो गया है। रविवार तड़के 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। नायपॉल ने लंदन स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। बता दें कि वीएस नायपॉल यानी विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल का जन्म 17 अगस्त सन 1932 को ट्रिनिडाड के चगवानस में हुआ था। त्रिनिडाड में पले-बढ़े नायपॉल ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्याल से पढ़ाई की थी लेखन की दुनिया में उन्हें काफी प्रसिद्धि हासिल है। ए बेंड इन द रिवर और अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास उनकी चर्चित कृतियां हैं।

Nobel Prize Winning Author Vs Naipaul Dies In The Age Of 85 :

साल 1950 में उन्होंने एक सरकारी स्कॉलरशिप जीती। ‘ए बेंड इन द रिवर’ और ‘अ हाउस फ़ॉर मिस्टर बिस्वास’ उनकी चर्चित कृतियों में गिनी जाती हैं। नायपॉल को साल 1971 में बुकर और साल 2001 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नायपॉल ने 30 से अधिक किताबें लिखीं। छात्र जीवन में वे अवसाद में घिरे और ख़ुदकुशी करने की कोशिश भी की। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज़्यादा वक्त लगा।

साहित्य की दुनिया में योगदान

साहित्‍य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्‍हें अब तक कई पुरस्‍कर मिल चुके हैं। वर्ष 2008 में द टाइम्‍स ने 50 महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में नायपॉल को 7वां स्‍थान दिया था। खास बात तो यह थी कि इस लिस्‍ट में 1945 से बाद की कृतियों को जगहों दी जानी थी। नायपॉल की कुछ उल्‍लेखनीय कृतियां हैं: इन ए फ्री स्‍टेट (1971), ए वे इन द वर्ल्‍ड (1994), हाफ ए लाइफ (2001), मैजिक सीड्स (2004)।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 1950 में उन्होंने एक सरकारी स्कॉलरशिप जीती। इसके जरिये उन्हें मनचाही कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल सकता था लेकिन उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लेना उचित समझा। नायपॉल की पहली किताब ‘द मिस्टिक मैसर’ साल 1951 में प्रकाशित हुई थी। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज़्यादा वक्त लगा।

आपको बता दें कि वी एस नायपॉल के पूर्वज 1880 में ट्रिनिडाड में बस गए थे. नायपॉल के पिता सीप्रसाद त्रिनिदाद गॉर्जियन में रिपोर्टर और फिक्शन लेखक थे। कहा जाता है कि वी एस नायपॉल के अंदर पढ़ने-लिखने का शौक पिता को देखकर ही आया। नायपॉल की शिक्षा-दीक्षा इंग्‍लैंड में हुई और वे इंग्‍लैंड में ही रहते थे। उन्‍होंने दुनिया के अनेक देशों की कई यात्राएं की। कई पुस्‍तकें, यात्रा-वृतांत और निबंध लिखे हैं, जिनसे उन्‍हें ख्‍याति मिली और उनकी गिनती दुनिया के टॉप लेखकों में होती थी। वी एस नायपॉल कई बार विवादों में भी रहे।

नई दिल्ली। साहित्य का नोबल पुरस्कार जीतने वाले भारतीय मूल के प्रसिद्ध लेखक वीएस नायपॉल का रविवार तड़के निधन हो गया है। रविवार तड़के 85 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। नायपॉल ने लंदन स्थित अपने घर में आखिरी सांस ली। बता दें कि वीएस नायपॉल यानी विद्याधर सूरज प्रसाद नायपॉल का जन्म 17 अगस्त सन 1932 को ट्रिनिडाड के चगवानस में हुआ था। त्रिनिडाड में पले-बढ़े नायपॉल ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्याल से पढ़ाई की थी लेखन की दुनिया में उन्हें काफी प्रसिद्धि हासिल है। ए बेंड इन द रिवर और अ हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास उनकी चर्चित कृतियां हैं।साल 1950 में उन्होंने एक सरकारी स्कॉलरशिप जीती। 'ए बेंड इन द रिवर' और 'अ हाउस फ़ॉर मिस्टर बिस्वास' उनकी चर्चित कृतियों में गिनी जाती हैं। नायपॉल को साल 1971 में बुकर और साल 2001 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। नायपॉल ने 30 से अधिक किताबें लिखीं। छात्र जीवन में वे अवसाद में घिरे और ख़ुदकुशी करने की कोशिश भी की। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज़्यादा वक्त लगा।

साहित्य की दुनिया में योगदान

साहित्‍य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्‍हें अब तक कई पुरस्‍कर मिल चुके हैं। वर्ष 2008 में द टाइम्‍स ने 50 महान ब्रिटिश लेखकों की सूची में नायपॉल को 7वां स्‍थान दिया था। खास बात तो यह थी कि इस लिस्‍ट में 1945 से बाद की कृतियों को जगहों दी जानी थी। नायपॉल की कुछ उल्‍लेखनीय कृतियां हैं: इन ए फ्री स्‍टेट (1971), ए वे इन द वर्ल्‍ड (1994), हाफ ए लाइफ (2001), मैजिक सीड्स (2004)।एक रिपोर्ट के मुताबिक 1950 में उन्होंने एक सरकारी स्कॉलरशिप जीती। इसके जरिये उन्हें मनचाही कॉमनवेल्थ यूनिवर्सिटी में दाखिला मिल सकता था लेकिन उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में दाखिला लेना उचित समझा। नायपॉल की पहली किताब 'द मिस्टिक मैसर' साल 1951 में प्रकाशित हुई थी। अपने सबसे चर्चित उपन्यास ए हाउस फॉर मिस्टर बिस्वास को लिखने में उन्हें तीन साल से ज़्यादा वक्त लगा।आपको बता दें कि वी एस नायपॉल के पूर्वज 1880 में ट्रिनिडाड में बस गए थे. नायपॉल के पिता सीप्रसाद त्रिनिदाद गॉर्जियन में रिपोर्टर और फिक्शन लेखक थे। कहा जाता है कि वी एस नायपॉल के अंदर पढ़ने-लिखने का शौक पिता को देखकर ही आया। नायपॉल की शिक्षा-दीक्षा इंग्‍लैंड में हुई और वे इंग्‍लैंड में ही रहते थे। उन्‍होंने दुनिया के अनेक देशों की कई यात्राएं की। कई पुस्‍तकें, यात्रा-वृतांत और निबंध लिखे हैं, जिनसे उन्‍हें ख्‍याति मिली और उनकी गिनती दुनिया के टॉप लेखकों में होती थी। वी एस नायपॉल कई बार विवादों में भी रहे।