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मथुरा ही नहीं प्रदेश में कई संस्थान छात्रवृत्ति के नाम पर लूट रहे हैं सरकारी रुपये, 27 ITI के ब्लैकलिस्ट होने पर उठे सवाल!

By शिव मौर्या 
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कई ऐसी संस्थाएं हैं, जो छात्रवृत्ति के नाम पर अरबों रुपये डकार जाती हैं। फर्जी तरीके से संस्थान और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ये पूरा खेल खेला जाता है। अगर प्रदेश में छात्रवृत्ति की सही से जांच हो जाए तो अरबों रुपयों की लूट सामने आ जाएगी। दरअसल, मथुरा में 23 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल 27 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद ये मामला उठ रहा है।

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सूत्रों की माने तो कई ऐसे कालेज और निजी संस्थान हैं, जो कागजों पर नाम दर्जकर करोड़ों रुपयों की छात्रवृत्ति गबन कर जाते हैं। अगर इनके खिलाफ जांच हो जाए तो कई बड़े मठाधीशों और कई बड़े कालेजों के नाम इन घोटालों में सामने आ जाएंगे। बता दें कि, मथुरा में हुए 23 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में शामिल प्रदेश के 27 आईटीआई कालेजों को काली सूची में डाल दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दए गए हैं।

घोटाले में 25 अन्य निजी आईटीआई की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। उन्हें भी ब्लैकलिस्ट कर मुकदमा दर्ज कराया जाएगा और इन संस्थानों से घोटाले की रकम की वसूली की जाएगी। बता दें कि, छात्रवृत्ति घोटाला उजागर होने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने निलम्बित मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी व तीन अन्य विभागीय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।

इसके साथ ही इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से घोटाले की रकम भी वसूली जायेगी। इस मामले में कुछ अन्य निजी आईटीआई संस्थाओं की भी जांच की जा रही है। बीते शनिवार समाज कल्याण निदेशक बालकृष्ण त्रिपाठी ने मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी, उनके कार्यालय में तैनात कनिष्ठ सहायक योगेश कुमार, नवीन मेहरोत्रा और सहायक विकास अधिकारी राहुल कुमार को निलम्बित कर दिया था।

गौरतलब है कि, निजी आईटीआई संस्थाओं ने फर्जी अभिलेखों से छात्र-छात्राओं का ब्योरा तैयार किया। अपने पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या कई गुना बढ़ाकर दिखाई, परीक्षा फार्म भी फर्जी ब्योरे से भरवाए और परीक्षा भी दिलवा दी गयी।

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