“काश मुठ्ठीभर लोग बेईमान ना होते“ तो आज करोड़ों लोग परेशान ना होते

बिजनौर। भारत सरकार का विमुद्रीकरण का फैसला करोडों लोगों की परेशानी का कारण बन रहा है। आठ से लेकर साठ तक के सभी महिला पुरूषों को नोट बदलने अथवा जमा करने के लिये लाइन में खडे देखा जा रहा है। समय न होने का रोना रोने वाले लोगों को भी समय से पहले बैंक में पहुंचकर लाइन में लगना पड रहा है। बैंको सक पैसे निकालने व जमा करने के चक्कर में अब तक दर्जनो लोगो की मौत हो चुकी है। इस सब के लिये जहाँ लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा उनकी सरकार को पानी पी पीकर कोस रहे हैं तो ज्यादातर लोग इस सब के लिये उन बेईमानों को जिम्मेदार मान रहें हैं जिन्होंने आम आदमी का हक मारकर अपने लंबे चैडे काले कारोबार खडे करके काला धन जमा कर लिया। ऐसे में किसी शायर की यह पंक्ति सटीक बैठती हैं कि काश मुठ्ठीभर लोग बेईमान ना होते, तो आज करोडों लोग परेशान ना होते सटीक बैठती है।



मजे की बात तो यह है कि परेशानी सहने के बाद भी लोग मोदी और उनके फैसले के समर्थन में खडा है। ऐसे लोगों का मानना है कि बदलाव जरूरी है जिसकी शुरूआत हो चुकी है। लोगों का मानना है कि बदलाव के लिये तो कुछ देश युद्ध लड रहे हैं। उन्हें तो सिर्फ लाइन में लगकर नोट ही बदलने हैं। लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि 68 साल के लोकतंत्रिक इतिहास में यह पहला मौका है जब जनता से ज्यादा नेता परेशान हैं क्योंकि सबसे ज्यादा काला धन नेताओं ने ही इकट्ठा कर रखा है। लोग का कहना है कि बीस-तीस वर्ष पूर्व जो नेता पैदल थे आज वे मंहगी कारों में घूम रहे हैं व शानदार बंगलों में राजसी जीवन जी रहे हैं। वे जबाब भी माँग रहे हैं कि आखिर यह दौलत उनके पास आई कहाँ से। जबाब सभी जानते हैं और नोट बदली से जो उनका इलाज हो रहा है उससे भी सब लोग सहमत है परन्तु उनके कारण जो परेशानी उन्हें हो रही है उससे वे कभी कभी उखड जाते हैं।




दूसरी ओर कुछ राजनैतिक पार्टियाँ पब्लिक की परेशानी को आड बनते अपनी राजनीति चमकाने के लिए भारत बंद का ऐलान कर चुकी हैं। परन्तु पब्लिक से बातें करके ऐसा नहीं लगता कि लोकल में बंदी का कोई असर होने वाला है। लोगों का मानना है कि बंद का बहिस्कार कर वे प्रधानमंत्री जी के निर्णय का समर्थन करेगें ताकि अकूत काले धन को बाहर लाने में हमारे प्रधानमंत्री कमजोर न पडें। वाहटस्एप व फेसबुक जैसी सोशल साईटस् भी ऐसे संदेशों से पटी पडी हैं जिसमें लोग लिख रहे हैं कि परेशानी भुगतने के बावजूद भी वे भारत बंद का विरोध व भारत सरकार के निर्णय का समर्थन करते हैं। जबकि सोशल साईटस पर प्रधानमंत्री पर भी दर्जनो मुहावरों की भरमार की गई है। अधिकांश लोगों का मानना हैं उनकी समस्या का कारण भारत सरकार या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नहीं अपितु वे चंद लोग हैं जिन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों में काली कमाई से अकूत सम्पत्ति इकट्ठी कर ली और आज भी वे उस पर कुंडली मार कर बैठे हैं। साथ ही लोगों को आशा भी है कि नोट बदली से काले धन वाले सडक पर आ जाएगे जबकि इससे आम लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेगीं।

बिजनौर से शहजाद अंसारी की रिपोर्ट