अब ‘अजिता’ की आवाज़ से नौनिहाल सीखेंगे बेसिक शिक्षा का ककहरा, विभाग ने शुरू किया काम

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बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में हुए तमाम सर्वे रिपोर्टों में एक बात निकलकर सामने आई कि स्कूली बच्चे शब्दों के मुकाबले चित्र और वीडियो के जरिए ज्यादा आसानी से संवाद स्थापित करते हैं। जिसके बाद परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को पहुंचाने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय ने नई पहल की शुरुआत की है। जिसके अंतर्गत बच्चों को अब ऑडियो-वीडियों के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

Now With The Sound Of Ajita Naunihal Will Learn Basic Education Department Started Work :

इन्हीं ऑडियो-वीडियो पाठ को तैयार करने के लिए राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद के निर्देश पर पूरे प्रदेश से 11 सदस्यीय अध्यापकों की टीम को लगाया गया है। इस प्रदेश स्तरीय 11 सदस्यीय टीम में बाराबंकी जिले की एक मात्र सहायक अध्यापिका भी शामिल हैं। विकासखंड बंकी के प्राथमिक विद्यालय बनवा की सहायक अध्यापिका अजिता श्रीवास्तव इस प्रोजेक्ट में तकनीकि सहायक के रूप में अपना अहम योगदान दे रही हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग में हो रहे इस अदभुत प्रयोग में लगी इस टीम ने बच्चों को ऑडियो-विजुअल के जरिये पढ़ाने के लिए मिशन प्रेरणा के तहत ‘आधारशिला’ ‘शिक्षण संग्रह’ और ‘ध्यानाकर्षण’ नामक तीन माड्यूल पर आधारित किताब तैयार की गई है। इस किताब का मुख्य उद्देश्य मिशन प्रेरणा के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित करना भी है। जिसे प्रेरणा एप पर अपलोड किया जाएगा। इन हस्तपुस्तिकाओं की खास बात यह है कि यह बोलती भी हैं। यानी वाइस ओवर के साथ इनके वीडियो बनाए जाएंगे और पाठ्य सामग्री में यह वीडियो अपलोड भी किये जाएंगे। हर विषय के आखिर में क्यूआर कोड दिया जाएगा, जिसे स्कैन करके बच्चे पाठ केवीडियो देखकर उसे और अच्छे से समझ सकेंगे।

वीडियो को विकसित करने, स्क्रिप्ट का लेखन, वीडियो निर्माण, वॉयस ओवर, कंपोजिंग से जुड़े कार्यों को अंजाम देने के लिए प्रदेश स्तर पर जो 11 अध्यापकों की टीम बनाई गई है, उसमें बाराबंकी से विकासखंड बंकी के प्राथमिक विद्यालय बनवा की सहायक अध्यापिका अजिता श्रीवास्तव के अलावा लखनऊ के एसके सोनी (सेनानिवृत्त उप शिक्षा निदेशक) व डा. अवनीश यादव (उप प्रधानाचार्य जीआईसी, बरेली), गोरखपुर के जेपी ओझा (सहायक अध्यापक डायट गोरखपुर), फिरोजाबाद के अनुज लहरी, रामपुर के सुरेंद्र पाल सिंह यादव, गोरखपुर के प्रवीण कुमार मिश्रा व प्रतीक्षा ओझा, बहराइच से आंचल श्रीवास्तव, वाराणसी की छवि अग्रनाल और जौनपुर की शिप्रा सिंह शामिल हैं।

11 अध्यापकों की टीम में बेहद अहम रोल निभा रही बाराबंकी की शिक्षिका अजिता श्रीवास्तव ने अपने इस प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए बताया कि कई बच्चे किताबी पढ़ाई के साथ कुछ क्रिएटिव टीचिंग से ज्यादा समझते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्हें समझाने के लिए क्लास में एक्ट कराया जाए या वीडियो और फोटो से समझाया जाए, तो हमारी मेहनत का ज्यादा अच्छा परिणाम निकलकर सामने आता है और बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान भी काफी बढ़ता है। इन हस्तपुस्तिकाओं के पीछे भी मकसद यही है कि बच्चों को रोचक तरीके से खेल-खेल में पढ़ाया जा सके। ये वीडियो बच्चों के साथ साथ शिक्षकों के लिए भी लाभप्रद होंगे। वो इनका इस्तेेमाल अपने पढ़ाने की तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए कर सकेंगे।

100 वीडियो का लक्षय

प्रथम चरण में 100 वीडियो बनाने का लक्षय है। जिनमें से 22 वीडियो को तैयार करने के लिए 14 अगस्त तक की समय सीमा दी गई है। 11 सदस्यीय टीम ने तकनीक पर आधारित अब तक के लक्ष्य के मुताबिक लगभग सारे वीडियो कैयार कर लिये हैं। वीडियो बनाने के बाद तीन मॉड्यूल में क्यूआर कोड या लिंक दिया जाएगा। जिसे स्कैन करके बच्चे और अध्यापक इन वीडियो को देख सकेंगे।

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में हुए तमाम सर्वे रिपोर्टों में एक बात निकलकर सामने आई कि स्कूली बच्चे शब्दों के मुकाबले चित्र और वीडियो के जरिए ज्यादा आसानी से संवाद स्थापित करते हैं। जिसके बाद परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को पहुंचाने के लिए राज्य परियोजना कार्यालय ने नई पहल की शुरुआत की है। जिसके अंतर्गत बच्चों को अब ऑडियो-वीडियों के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इन्हीं ऑडियो-वीडियो पाठ को तैयार करने के लिए राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद के निर्देश पर पूरे प्रदेश से 11 सदस्यीय अध्यापकों की टीम को लगाया गया है। इस प्रदेश स्तरीय 11 सदस्यीय टीम में बाराबंकी जिले की एक मात्र सहायक अध्यापिका भी शामिल हैं। विकासखंड बंकी के प्राथमिक विद्यालय बनवा की सहायक अध्यापिका अजिता श्रीवास्तव इस प्रोजेक्ट में तकनीकि सहायक के रूप में अपना अहम योगदान दे रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग में हो रहे इस अदभुत प्रयोग में लगी इस टीम ने बच्चों को ऑडियो-विजुअल के जरिये पढ़ाने के लिए मिशन प्रेरणा के तहत 'आधारशिला' 'शिक्षण संग्रह' और 'ध्यानाकर्षण' नामक तीन माड्यूल पर आधारित किताब तैयार की गई है। इस किताब का मुख्य उद्देश्य मिशन प्रेरणा के तहत शिक्षकों को प्रशिक्षित करना भी है। जिसे प्रेरणा एप पर अपलोड किया जाएगा। इन हस्तपुस्तिकाओं की खास बात यह है कि यह बोलती भी हैं। यानी वाइस ओवर के साथ इनके वीडियो बनाए जाएंगे और पाठ्य सामग्री में यह वीडियो अपलोड भी किये जाएंगे। हर विषय के आखिर में क्यूआर कोड दिया जाएगा, जिसे स्कैन करके बच्चे पाठ केवीडियो देखकर उसे और अच्छे से समझ सकेंगे। वीडियो को विकसित करने, स्क्रिप्ट का लेखन, वीडियो निर्माण, वॉयस ओवर, कंपोजिंग से जुड़े कार्यों को अंजाम देने के लिए प्रदेश स्तर पर जो 11 अध्यापकों की टीम बनाई गई है, उसमें बाराबंकी से विकासखंड बंकी के प्राथमिक विद्यालय बनवा की सहायक अध्यापिका अजिता श्रीवास्तव के अलावा लखनऊ के एसके सोनी (सेनानिवृत्त उप शिक्षा निदेशक) व डा. अवनीश यादव (उप प्रधानाचार्य जीआईसी, बरेली), गोरखपुर के जेपी ओझा (सहायक अध्यापक डायट गोरखपुर), फिरोजाबाद के अनुज लहरी, रामपुर के सुरेंद्र पाल सिंह यादव, गोरखपुर के प्रवीण कुमार मिश्रा व प्रतीक्षा ओझा, बहराइच से आंचल श्रीवास्तव, वाराणसी की छवि अग्रनाल और जौनपुर की शिप्रा सिंह शामिल हैं। 11 अध्यापकों की टीम में बेहद अहम रोल निभा रही बाराबंकी की शिक्षिका अजिता श्रीवास्तव ने अपने इस प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए बताया कि कई बच्चे किताबी पढ़ाई के साथ कुछ क्रिएटिव टीचिंग से ज्यादा समझते हैं। उदाहरण के तौर पर उन्हें समझाने के लिए क्लास में एक्ट कराया जाए या वीडियो और फोटो से समझाया जाए, तो हमारी मेहनत का ज्यादा अच्छा परिणाम निकलकर सामने आता है और बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान भी काफी बढ़ता है। इन हस्तपुस्तिकाओं के पीछे भी मकसद यही है कि बच्चों को रोचक तरीके से खेल-खेल में पढ़ाया जा सके। ये वीडियो बच्चों के साथ साथ शिक्षकों के लिए भी लाभप्रद होंगे। वो इनका इस्तेेमाल अपने पढ़ाने की तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए कर सकेंगे।

100 वीडियो का लक्षय

प्रथम चरण में 100 वीडियो बनाने का लक्षय है। जिनमें से 22 वीडियो को तैयार करने के लिए 14 अगस्त तक की समय सीमा दी गई है। 11 सदस्यीय टीम ने तकनीक पर आधारित अब तक के लक्ष्य के मुताबिक लगभग सारे वीडियो कैयार कर लिये हैं। वीडियो बनाने के बाद तीन मॉड्यूल में क्यूआर कोड या लिंक दिया जाएगा। जिसे स्कैन करके बच्चे और अध्यापक इन वीडियो को देख सकेंगे।